जयपुर. हीरे, रंगीन रत्नों और आभूषणों के प्रमाणन की वैश्विक संस्था इंटरनेशनल जेमोलॉजिकल इंस्टिट्यूट (IGI) ने गुरुवार को जयपुर में अपनी दूसरी अत्याधुनिक प्रयोगशाला का उद्घाटन किया। 29 जनवरी 2026 को शुरू हुई यह नई लैब जयपुर के सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित की गई है, जिससे उत्तर भारत में IGI की मौजूदगी और अधिक सशक्त हुई है। जयपुर रंगीन रत्नों के व्यापार, बिना कटे पोल्की और पारंपरिक आभूषण कारीगरी के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखता है।
IGI के अनुसार, सीतापुरा में प्रयोगशाला की स्थापना का उद्देश्य रत्न एवं आभूषण उद्योग के निकट रहकर निर्माताओं, निर्यातकों और व्यापारियों को तेज, सटीक और भरोसेमंद प्रमाणन सेवाएं उपलब्ध कराना है। इससे न केवल उपभोक्ताओं के लिए पारदर्शिता और भरोसा बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय उद्योग को भी सीधा लाभ मिलेगा।
पसंद में तेजी से बदलाव
इस अवसर पर IGI के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं ग्लोबल चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर तेहमास्प प्रिंटर ने कहा कि वैश्विक स्तर पर उपभोक्ताओं की पसंद में तेजी से बदलाव आ रहा है और रंगीन रत्नों की मांग लगातार बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि फ्यूज़न डिज़ाइनों, पर्सनलाइज़्ड ज्वेलरी और रंगीन रत्नों की दुर्लभता व सुंदरता ने इस मांग को और गति दी है। ऐसे में रत्नों की उत्पत्ति और उनमें किए गए ट्रीटमेंट की सटीक पहचान पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
उन्नत तकनीक का उपयोग
जयपुर की नई प्रयोगशाला में रमन स्पेक्ट्रोमेट्री, यूवी-विज़-एनआईआर स्पेक्ट्रोस्कोपी और एक्स-रे फ्लोरेसेंस जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इन उपकरणों के जरिए रत्नों की आंतरिक संरचना, संघटन और समावेशन का विश्लेषण कर उनकी भूवैज्ञानिक उत्पत्ति और इतिहास का पता लगाया जा सकेगा। यह सुविधा हीरे, रंगीन रत्नों और आभूषणों के लिए IGI की प्रमाणन सेवाओं की पूरी श्रृंखला प्रदान करेगी।
क्षेत्रीय कौशल को बढ़ावा
इसके साथ ही, सीतापुरा स्थित IGI कार्यालय क्षेत्रीय कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए IGI स्कूल ऑफ जेमोलॉजी के माध्यम से विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित करेगा। इन पाठ्यक्रमों से उद्योग को प्रशिक्षित और दक्ष मानव संसाधन उपलब्ध होगा। उल्लेखनीय है कि इस विस्तार के साथ IGI अब 10 देशों में 35 प्रयोगशालाएं संचालित कर रहा है।


