मृत पैदा हुई, आंखें बड़ी थी तो देवी मान लिया:मैनपुरी में 60 हजार चढ़ावा आया, मंदिर बनाने की तैयारी; डॉक्टर बोले- अविकसित भ्रूण था

मृत पैदा हुई, आंखें बड़ी थी तो देवी मान लिया:मैनपुरी में 60 हजार चढ़ावा आया, मंदिर बनाने की तैयारी; डॉक्टर बोले- अविकसित भ्रूण था

‘देवी मां पैदा हुईं…9 दिन में मइया ने 9 रूप दिखाए। पहले काली मां का, फिर दुर्गा मां का। आखिर में कह कर चली गईं कि जा रही हूं… मां मेरा स्थान यहां बना देना।’ मैनपुरी के दन्नाहर क्षेत्र के हलपुरा गांव में यह बात कंचन की पत्नी राधा हर आने-जाने वाले को बता रही हैं। उनका दावा है कि जिस बच्ची को जन्म दिया, वो देवी है। जन्म से पहले देवी ने सपने में अपने बारे में सब कुछ बता दिया था। अब 13 दिन से उनके घर के बाहर कीर्तन हो रहा। चमत्कार का दावा किया जा रहा। दूर-दूर से लोग दर्शन करने आ रहे। 60 हजार का चढ़ावा आ चुका है। मंदिर बनाने की तैयारी है। हालांकि परिवार बार-बार अपना बयान बदल रहा। दैनिक भास्कर की टीम गांव पहुंची, वहां की स्थिति जानी। परिवार का दावा क्या है? डिलीवरी कराने वाले डॉक्टर का क्या कहना है? ऐसे पैदा होने वाले बच्चों के बारे में एक्सपर्ट से बात की। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… सबसे पहले पढ़िए पूरा मामला…
मैनपुरी के हलपुरा गांव के रहने वाले कंचन की पत्नी राधा ने 21 जनवरी, 2026 की सुबह करीब 11 बजे एक बच्ची को जन्म दिया। घरवालों का दावा है कि यह कोई सामान्य बच्ची नहीं, देवी का अवतार थी, जिसने 9 दिनों तक अलग-अलग रूपों में दर्शन दिए। परिवार के अनुसार, राधा को कुछ समय पहले सपने में देवी के दर्शन हुए थे। जिसमें देवी ने उनके घर जन्म लेने की बात कही थी। इसके कुछ समय बाद राधा को प्रसव पीड़ा हुई। उन्हें कुचेला स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां उन्होंने कन्या को जन्म दिया। घरवालों का दावा है कि नवजात पूरी तरह स्वस्थ थी। डॉक्टरों ने भी बच्ची को सामान्य बताया, जिसके बाद उसे घर लाया गया। राधा का कहना है कि बच्ची ने आने से पहले सपना दिया और फिर उसी रात प्रसव पीड़ा हुई। सपने में कहा कि मां मैं आपकी कोख से जन्म ले रही हूं। मैं एक बेटी नहीं, मां हूं। मैंने अपने पति को बताया था कि मुझे सपना आया है। अल्ट्रासाउंड में पहले ही बता दिया था कि न ये लड़की है, न ही लड़का। डॉक्टर ने कहा था कि जितनी जल्दी हो ऑपरेशन करवा दो। लेकिन, मैंने ऑपरेशन नहीं करवाया। क्योंकि मां ने मुझे रोककर रखा था, ऐसा ना करवाना मां। राधा का कहना है कि जन्म के बाद डॉक्टर ने कहा कि बच्चा जिंदा नहीं है। लेकिन मैंने उसे 8 दिन रखा, नौंवें दिन उसे सबने देखा था, फिर देवी जागरण हुआ। बच्ची ने मुझसे सपने में कहा था कि मां मैं समाधि लेने जा रही हूं। मेरा स्थान यहीं बनाना। वह काली के रूप में आई थी। परिवार के दावे ही अलग-अलग
दैनिक भास्कर ने परिवार के सदस्यों से अलग-अलग बात की, तो उन्होंने अलग-अलग बातें बताईं। मां राधा ने पहले कहा कि बच्ची ने अस्पताल से आने के बाद दूध पीया, फिर पीना बंद कर दिया। घर आने के बाद विशाल रूप दिखाया और 9 रूप में दर्शन दिए। कंचन (बच्ची के पिता) के भाई चरण सिंह का कहना है कि बच्ची के नैन-नक्श माता दुर्गा जैसे थे। वो माता है। फोन पर बातचीत के दौरान चरण सिंह कहते हैं कि वह बच्ची 9 दिन तक जीवित रही। इस दौरान वह थोड़ा-थोड़ा दूध पीती थी। कभी काली, तो कभी विशाल रूप में दिखाई देती थी। चरण सिंह और बच्ची की मां राधा बताती हैं- हम एक चौकी पर बैठे थे, तभी माता ने समाधि ले ली। फिर मुझे सपने में दर्शन देते हुए बच्ची ने कहा कि वह जा रही है। उसका स्थान यहीं बनाया जाए। परिवार का यह भी दावा है कि सपने में बच्ची ने खुद को “नादाऊ धाम” की देवी बताया। बच्ची के पिता कंचन का कहना है- मेरी पत्नी को सपना आया था। हॉस्पिटल में बताया था कि ये ना लड़का हैं ना लड़की। कुचैला के सरकारी अस्पताल में बच्ची का जन्म हुआ। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। उसके बाद हम उसे घर लेकर आए। घर आने के बाद देवी ने रंग बदल लिया। उसके बाद गांव में जागरण होने लगा। अब बहुत भीड़ हो रही है। ढोल-नगाड़े बज रहे हैं। स्थान बना दिया है, अब मंदिर बनवाएंगे।’ हालांकि बाद में राधा ने भी बताया कि डॉक्टरों ने जन्म के समय ही बच्ची को मृत घोषित कर दिया था। राधा ने बताया कि बच्ची का जन्म 8वां महीना पूरा होने में 5-6 दिन बाकी थे, तभी हुआ था। डॉक्टरों ने अस्पताल में कहा कि घर ले जाकर इसका अंतिम संस्कार कर देना। लेकिन, जब मैं घर आई तो बच्ची ने आंखें खोलीं और मां काली के रूप में दर्शन दिए। नादऊ धाम क्या है?
स्थानीय लोगों के अनुसार, नादऊ धाम को एक दैवीय स्थान माना जाता है। जहां दर्शन करने के लिए लोग दूर-दराज से आते हैं। यह स्थान गांव से करीब 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। पिछले तीन-चार साल से यहां लोगों की आस्था बढ़ी है। अब नियमित रूप से दर्शन के लिए भीड़ पहुंचने लगी है। कंचन, राधा और उसका पूरा परिवार यहां हमेशा आते हैं। यहां आने वाले श्रद्धालु इसे किसी अवतार या दिव्य शक्ति से जुड़ा स्थल मानते हैं। मनोकामना पूरी होने की मान्यता भी प्रचलित है। हालांकि, नादऊ धाम को लेकर जो भी कथाएं और विश्वास हैं, वे स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं। कंचन और राधा की 11 साल पहले हुई थी शादी
कंचन ने बताया कि वह मजदूरी करता है। उसकी पत्नी गृहिणी है। दोनों पढ़े-लिखे नहीं हैं। दोनों का एक ढाई साल का बेटा है। यह दूसरी बेटी हुई थी। कंचन और राधा की शादी करीब 11 साल पहले हुई थी। कंचन के 5 भाई हैं। वह चौथे नंबर का है। पांचों भाई मजदूरी करते हैं। कंचन अपने माता-पिता, पत्नी और बच्चे के साथ अलग रहता है। अब गांव में माहौल के बारे में जानिए… पड़ोसी बोले- मां में शक्ति है
यह खबर फैलने के बाद गांव में भीड़ लगने लगी। एक टेंट लगा दिया गया है। बच्ची के शव को शृंगार करके 2 फरवरी को समाधि दे दी गई। वहां सजावट कर दी गई है। समाधि पर कालीजी की फोटो रख दी गई है। वहां भजन-कीर्तन और हवन-पूजन हो रहा। दूर-दराज से लोग दर्शन करने आ रहे है। आगे मंदिर बनाने की तैयारी की जा रही है। गांव के पड़ोसी रंजीत यादव दावा करते हैं कि मां काली की शक्ति है। मां सच्ची है, मां का स्थान सच्चा है। काली के रूप में मां ने जन्म लिया। काफी दूर-दूर से भक्त आ रहे हैं। अब गांव में भक्तिमय माहौल है। जल्द ही मंदिर बना दिया जाएगा। अब तक यहां पर 50 से 60 हजार का चढ़ावा भी चढ़ाया जा चुका है। डॉक्टर ने बताई सच्चाई, कहा- मृत पैदा हुई थी बच्ची
कुचैला सीएचसी के अधीक्षक डॉ. एसएस भदौरिया से हमने बात की। उन्होंने बताया कि बच्ची मृत पैदा हुई थी। क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
मेडिकल साइंस की नजर में यह अविकसित भ्रूण है। जिसकी समय से अल्ट्रासाउंड और अन्य जांच न होने के कारण ऐसा हुआ। लेकिन, अंधविश्वास के चलते लोग इसे दैवीय अवतार मान रहे। गोरखपुर जिला अस्पताल के साइकेट्रिस्ट डॉ. अमित शाही का कहना है कि इस तरह की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। लेकिन, अंधविश्वास के चलते लोग इन्हें दैवीय अवतार मानने लगते हैं। ऐसा कुछ नहीं होता। गोरखपुर के संजीवनी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के एमडी फिजिशियन डॉ. संजीव बताते हैं कि कई बार कुछ बच्चों के जन्म के वक्त आखें बड़ी, माथा चौड़ा या बहुत छोटा होता है। फेस की आकृति थोड़ी विचित्र होती है। ऐसे मामलों में नवजात में जन्मजात विकृति के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसे मेडिकल भाषा में कन्जेनाइटल डिफॉर्मिटी (Congenital Deformity) कहा जाता है। संभव है कि इस बच्ची को अंदरूनी तौर पर कोई चिकित्सकीय समस्या रही हो। हालांकि, बिना मेडिकल जांच के कहना कि क्या समस्या है, वो संभव नहीं। कन्जेनाइटल डिफॉर्मिटी क्या होती है?
वह शारीरिक विकृति या असामान्यता, जो बच्चे में जन्म के समय से मौजूद होती है। जब बच्चे के शरीर का कोई हिस्सा (हाथ-पैर, चेहरा, दिल आदि) सामान्य बनावट से अलग हो। यह फर्क जन्म से ही दिखे, तो वह कन्जेनाइटल डिफॉर्मिटी कहलाती है। एक्सपर्ट के अनुसार, यह समस्या गर्भावस्था के दौरान भ्रूण के विकास में गड़बड़ी के कारण होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि कन्जेनाइटल डिफॉर्मिटी के पीछे कई कारण हो सकते हैं। सबसे प्रमुख कारणों में जेनेटिक या वंशानुगत गड़बड़ी शामिल है। इसमें माता-पिता के जीन या क्रोमोसोम की समस्या बच्चे में आ सकती है। ऐसा क्यों होता है?
गर्भावस्था के दौरान होने वाले संक्रमण, जैसे रूबेला (जर्मन मीजल्स), टॉक्सोप्लाज्मोसिस या सिफिलिस, भ्रूण के अंगों के विकास को प्रभावित करते हैं। पोषण की कमी भी एक बड़ा कारण मानी जाती है। डॉक्टरों के मुताबिक, गर्भावस्था में फॉलिक एसिड की कमी से रीढ़ और मस्तिष्क से जुड़ी जन्मजात विकृतियां होने का खतरा बढ़ जाता है। वहीं, गर्भावस्था के दौरान शराब, सिगरेट, तंबाकू या कुछ दवाओं का सेवन, केमिकल्स और रेडिएशन के संपर्क में आना भी कन्जेनाइटल डिफॉर्मिटी का कारण बन सकता है। इसके साथ ही मां की डायबिटीज, थायरॉइड जैसी बीमारियां, अधिक उम्र में गर्भधारण और प्लेसेंटा से जुड़ी समस्याएं भी जोखिम बढ़ाती हैं। कई मामलों में तमाम जांच के बावजूद साफ कारण सामने नहीं आ पाता। ————————- यह खबर भी पढ़ें… मैनपुरी में नवजात बच्ची को देवी मानने का दावा, दर्शन के लिए उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ मैनपुरी के दन्नाहर क्षेत्र के हलपुरा गांव में एक नवजात बच्ची को देवी का स्वरूप मानने का दावा किया जा रहा है। गांव निवासी कंचन के परिवार का कहना है कि उन्हें कन्या के रूप में देवी के दर्शन हुए हैं। इस घटना को लेकर ग्रामीणों और श्रद्धालुओं में चर्चा का माहौल है। पढ़िए पूरी खबर…

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