माता-पिता का ख्याल नहीं रखा तो कटेगी सैलेरी, तेलंगाना विधानसभा में पेश हुआ विधेयक

माता-पिता का ख्याल नहीं रखा तो कटेगी सैलेरी, तेलंगाना विधानसभा में पेश हुआ विधेयक

बदलती जीवनशैली में परिवार के बुजुर्गों की बढ़ती उपेक्षा के बीच तेलंगाना सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। विधानसभा में रविवार को पेश ‘तेलंगाना कर्मचारी जवाबदेही और माता-पिता सहायता विधेयक-2026’ कानून के तहत अब माता-पिता की देखभाल न करने वाले कर्मचारियों की जिम्मेदारी सीधे उनकी सैलरी से तय होगी।

विधेयक के दायरे में सरकारी और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के साथ-साथ विधायक, सांसद और स्थानीय निकायों के जनप्रतिनिधि भी शामिल हैं। दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के वेतन से अधिकतम 15 प्रतिशत या 10,000 रुपए (जो भी कम हो) तक की कटौती की जा सकेगी। यह प्रावधान जैविक और सौतेले दोनों तरह के माता-पिता पर लागू होगा।

कानून की जरूरत क्यों?

सरकार का तर्क है कि भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 के बावजूद प्रभावी अमल में कमी रही है। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने कहा कि माता-पिता के अधिकारों को केवल नैतिक जिम्मेदारी के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। बदलते सामाजिक ढांचे में कानूनी हस्तक्षेप जरूरी हो गया है।

60 दिन में होगा निपटारा

विधेयक के तहत उपेक्षित वरिष्ठ नागरिक जिला कलेक्टर के समक्ष शिकायत दर्ज करा सकेंगे। कलेक्टर को 60 दिनों के भीतर दोनों पक्षों को सुनकर फैसला देना होगा। तय राशि सीधे माता-पिता के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी। अपील की सुनवाई के लिए ‘सीनियर सिटिजन कमीशन’ गठित करने का प्रस्ताव है, जिसकी अध्यक्षता रिटायर्ड हाईकोर्ट जज करेंगे।

BRS के 24 विधायक दो दिन के लिए निलंबित

तेलंगाना विधानसभा में हंगामा के आरोप में भारत राष्ट्र समिति के 24 विधायकों को दो दिन के लिए सदन से निलंबित कर दिया गया है। विधायकों को निलंबित करने का प्रस्ताव विधायी मामलों के मंत्री डी श्रीधर बाबू ने पेश किया था। जिसे ध्वनि मत से स्वीकार कर लिया गया। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष गड्डम प्रसाद कुमार ने 24 बीआरएस विधायकों को सदन से दो दिन के लिए निलंबित कर दिया।

क्यों किया गया निलंबित?

दरअल भारत राष्ट्र समिति (BRS) के सदस्य राजस्व मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी पर लगे भ्रष्टाचार और अवैध खनन के मामलों की जांच विधानसभा की समिति से कराए जाने की मांग कर रहे थे। इसी मांग को लेकर उन्होंने सदन की कार्यवाही शुरू होते ही BRS विधायकों ने समिति गठित किए जाने की मांग शुरू कर दी है।

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