‘वे (बालेन) हमारे बॉर्डर इलाके (तराई) के ही रहने वाले हैं। बॉर्डर के इस पार और उस पार दोनों तरफ के लोगों में काफी घनिष्ठता है। यहां की बेटियां वहां शादी करती हैं और वहां की बेटियां यहां आती हैं। ऐसे में वहां जो भी सरकार बनेगी, उसका असर हम लोगों पर जरूर पड़ता है।’ यह कहना है भारत-नेपाल सीमा से सटे सुपौल जिले के निवासी और पेशे से दुकानदार सतेंद्र गुप्ता का। नेपाल में हाल में हुए चुनाव के बाद नई सरकार बन रही है। सीमावर्ती इलाकों के लोग नेपाल की राजनीति को करीब से देखते हैं, क्योंकि वहां की सरकार और उनकी नीतियों का सीधा असर सीमा पार के सामाजिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंधों पर पड़ता है। 35 वर्षीय बालेन शाह मैथिली भाषी माने जाते हैं और उन्हें नेपाल की नई पीढ़ी के उभरते नेताओं में गिना जाता है। नेपाल चुनाव में मधेश क्षेत्र की कई सीटों पर उनकी पार्टी को बढ़त मिली है। बालेन शाह पहले काठमांडू के मेयर रह चुके हैं और जेन-जी आंदोलन के बाद उभरे युवा नेता के रूप में उनकी पहचान बनी है। उनका पैतृक घर बिहार के मधुबनी जिले से सटे नेपाल के महोत्तरी इलाके में है, जो मधेश बाहुल क्षेत्र का हिस्सा है। बासोपट्टी बाजार के प्रमुख व्यवसायी जीतेन्द्र साह का कहना है कि नेपाल में मधेशी और मैथिली भाषी नेता के प्रधानमंत्री बनने से भारत-नेपाल के रिश्तों में सुधार की संभावना बढ़ेगी। खासकर सीमावर्ती इलाकों में व्यापार, आवाजाही और रोटी-बेटी के संबंध और मजबूत होने की उम्मीद है। नेपाल में नई सरकार बनने से बिहार के बॉर्डर जिलों में क्या असर होगा? यहां के लोगों को आखिर नेपाल की सत्ता से क्या फर्क पड़ता है? क्या एक मधेशी नेता के उभार से भारत-नेपाल सीमा के इलाकों में सांस्कृतिक और सामाजिक जुड़ाव को नई मजबूती मिलेगी? पढ़िए ग्राउंड रिपोर्ट… पहले पढ़िए नेपाल चुनाव नतीजों में किस पार्टी की क्या स्थिति है नेपाल में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स चुनाव में फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट (FPTP) प्रणाली के तहत 165 सीटों और प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन (PR) प्रणाली के तहत 110 सीटों के लिए 5 मार्च को मतदान हुआ था। FPTP श्रेणी के रुझानों में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने 124 सीटें जीती हैं और एक सीट पर बढ़त बनाए हुए है। नेपाली कांग्रेस को 17 सीटें मिली हैं और एक सीट पर बढ़त है। CPN-UML ने 8 सीटें जीती हैं और एक सीट पर आगे है, जबकि नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (NCP) को 7 सीटें मिली हैं। श्रम संस्कृति पार्टी ने 3 सीटें और राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (RPP) ने 1 सीट जीती है। स्वतंत्र उम्मीदवार महाबीर पुन भी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के लिए निर्वाचित हुए हैं। PR श्रेणी में अब तक 10.9 मिलियन वोटों में से 8.122 मिलियन वोटों की गिनती हो चुकी है। इसमें RSP को 3,916,502 वोट, नेपाली कांग्रेस को 1,319,879 वोट और CPN-UML को 1,119,841 वोट मिले हैं। PR प्रणाली में सीट पाने के लिए किसी भी पार्टी को कुल वोटों का कम से कम 3 प्रतिशत हासिल करना आवश्यक है। मौजूदा रुझानों के अनुसार RSP, नेपाली कांग्रेस, CPN-UML, NCP और RPP इस सीमा को पार करती दिख रही हैं। अनुमान है कि PR प्रणाली के तहत RSP को करीब 60 सीटें, नेपाली कांग्रेस को 20, CPN-UML को 17, माओइस्ट सेंटर को 8 और RPP को 5 सीटें मिल सकती हैं। नेपाल की सरकार का बॉर्डर जिलों पर क्या असर होगा सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों का मानना है कि नेपाल में बनने वाली सरकार का असर सीधे यहां के सामाजिक और आर्थिक जीवन पर पड़ता है। सुपौल के व्यापारी सतेंद्र साह कहते हैं, “मैं एक व्यापारी हूं और मेरे कई ग्राहक नेपाल से आते हैं। यहां के लोग अक्सर चर्चा करते रहते हैं कि नेपाल में किसकी सरकार आ रही है। वहां के लोगों से भी हम पूछते रहते हैं। बातचीत से यही लगता है कि बालेन शाह प्रधानमंत्री बनेंगे और उनके आने से भारत-नेपाल के बीच शांति, सुरक्षा और व्यापार मजबूत होगा।” नेपाल की सत्ता से बिहार के बॉर्डर इलाके के लोगों को क्या फर्क पड़ता है भारत-नेपाल सीमा से सटे इलाकों में व्यापार और आवाजाही काफी हद तक एक-दूसरे पर निर्भर है। किशनगंज के गलगलिया और ठाकुरगंज जैसे बाजारों में रोजाना दोनों देशों के व्यापारी सामान लेकर आते-जाते हैं। व्यापारी राजकुमार शाह कहते हैं, “मेरी बहन की शादी नेपाल में हुई है। बालेन शाह के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत और नेपाल के रिश्ते काफी अच्छे होंगे। वह एक युवा और बढ़िया नेता हैं। मुझे लगता है कि व्यापार पर किसी प्रकार का असर नहीं पड़ेगा और दोनों देशों के बीच अच्छे संबंध रहेंगे। नेपाल के लोगों के साथ हमारा रिश्ता हमेशा से अच्छा रहा है और आगे भी अच्छा ही रहेगा। मेरी बहन ने बताया कि बालेन शाह भारत के साथ रोटी-बेटी का रिश्ता निभाएंगे।” नेपाल के काठमांडू निवासी गणेश, जो इन दिनों अपने रिश्तेदार के यहां भारत आए हुए हैं। वो कहते हैं, “मुझे लगता है कि वह बहुत अच्छे प्रधानमंत्री साबित होंगे। उनकी उम्र 40 साल से कम है और मैं समझता हूं कि वह और मोदी जी मिलकर विश्व में शांति कायम कर सकते हैं। नेपाल और भारत के बीच रोटी-बेटी का रिश्ता पहले से अच्छा था, अब और भी बेहतर होगा। दोनों देशों की बीच व्यापार और बढ़ेगा।” मधेशी नेता प्रधानमंत्री बनते हैं तो सांस्कृतिक रिश्ते मजबूत होंगे सीमावर्ती जिलों के लोगों का मानना है कि मधेश क्षेत्र से जुड़े नेता प्रधानमंत्री बनते हैं, तो सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूती मिल सकती है। मधुबनी जिले के महीनाथपुर गांव के शंकर चौधरी और श्याम चौधरी कहते हैं कि नेपाल में मधेशी समुदाय के मैथिली भाषी नेता के प्रधानमंत्री बनने की सूचना है। इससे हम लोगों के बीच खुशी की लहर है। उन्होंने आगे कहा कि भारत और नेपाल के बीच सदियों से चली आ रही बेटी-रोटी की परंपरा और मजबूत होगी। वहीं, उमगांव के व्यापारी हरी किशोर मोदी और शम्भू सम्राट ने कहा कि नेपाल के चुनाव में जिस तरह युवा नेता को दो-तिहाई समर्थन मिल रहा है, वह नेपाल के चुनावी इतिहास में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इससे नेपाल की राजनीति में नई पीढ़ी की भूमिका मजबूत होगी। बासोपट्टी बाजार के व्यापारी जीतेन्द्र साह ने कहते हैं, “हम लोगों की कई रिश्तेदारी नेपाल के जनकपुर और अन्य जगहों पर है। बालेन शाह के प्रधानमंत्री बनने से रिश्तों में और मजबूती आएगी। व्यापार भी बढ़ेगा।” रैपर से मेयर, अब पीएम बनने की राह पर.. काठमांडू के मेयर बनने से पहले बालेंद्र शाह, जिन्हें लोग बालेन के नाम से जानते हैं, नेपाल के अंडरग्राउंड हिप-हॉप सीन में सक्रिय थे। कभी वे छतों पर रैप बैटल करते नजर आते थे, तो कभी म्यूजिक वीडियो बनाते थे। उनके गानों में गरीबी, पिछड़ापन और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे उठाए जाते थे। इन्हीं गीतों ने उन्हें युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया। उनके रैप में अक्सर नेताओं की आलोचना की जाती थी। ऐसे में जब बालेन ने मई 2022 में काठमांडू से मेयर पद के लिए चुनाव लड़ने का ऐलान किया, तो लोग चौंक गए। चुनाव प्रचार के दौरान बालेन काले ब्लेजर, काली जींस और काले धूप के चश्मे में नजर आते थे, जिसकी काफी चर्चा हुई। सिर्फ 33 साल की उम्र में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ते हुए उन्होंने बड़े-बड़े दिग्गजों को हरा दिया। वे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में काठमांडू के मेयर का चुनाव जीतने वाले पहले शख्स बने। नेपाल में काठमांडू के मेयर का पद काफी प्रभावशाली माना जाता है और इसकी हैसियत कई मामलों में केंद्रीय मंत्रियों से भी अधिक मानी जाती है। ऐसे में उनकी इस जीत की चर्चा सिर्फ नेपाल तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरी दुनिया में हुई। साल 2023 में टाइम मैगजीन ने उन्हें दुनिया के टॉप 100 प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल किया, जबकि न्यूयॉर्क टाइम्स ने उनकी प्रोफाइल स्टोरी प्रकाशित की थी। ‘वे (बालेन) हमारे बॉर्डर इलाके (तराई) के ही रहने वाले हैं। बॉर्डर के इस पार और उस पार दोनों तरफ के लोगों में काफी घनिष्ठता है। यहां की बेटियां वहां शादी करती हैं और वहां की बेटियां यहां आती हैं। ऐसे में वहां जो भी सरकार बनेगी, उसका असर हम लोगों पर जरूर पड़ता है।’ यह कहना है भारत-नेपाल सीमा से सटे सुपौल जिले के निवासी और पेशे से दुकानदार सतेंद्र गुप्ता का। नेपाल में हाल में हुए चुनाव के बाद नई सरकार बन रही है। सीमावर्ती इलाकों के लोग नेपाल की राजनीति को करीब से देखते हैं, क्योंकि वहां की सरकार और उनकी नीतियों का सीधा असर सीमा पार के सामाजिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंधों पर पड़ता है। 35 वर्षीय बालेन शाह मैथिली भाषी माने जाते हैं और उन्हें नेपाल की नई पीढ़ी के उभरते नेताओं में गिना जाता है। नेपाल चुनाव में मधेश क्षेत्र की कई सीटों पर उनकी पार्टी को बढ़त मिली है। बालेन शाह पहले काठमांडू के मेयर रह चुके हैं और जेन-जी आंदोलन के बाद उभरे युवा नेता के रूप में उनकी पहचान बनी है। उनका पैतृक घर बिहार के मधुबनी जिले से सटे नेपाल के महोत्तरी इलाके में है, जो मधेश बाहुल क्षेत्र का हिस्सा है। बासोपट्टी बाजार के प्रमुख व्यवसायी जीतेन्द्र साह का कहना है कि नेपाल में मधेशी और मैथिली भाषी नेता के प्रधानमंत्री बनने से भारत-नेपाल के रिश्तों में सुधार की संभावना बढ़ेगी। खासकर सीमावर्ती इलाकों में व्यापार, आवाजाही और रोटी-बेटी के संबंध और मजबूत होने की उम्मीद है। नेपाल में नई सरकार बनने से बिहार के बॉर्डर जिलों में क्या असर होगा? यहां के लोगों को आखिर नेपाल की सत्ता से क्या फर्क पड़ता है? क्या एक मधेशी नेता के उभार से भारत-नेपाल सीमा के इलाकों में सांस्कृतिक और सामाजिक जुड़ाव को नई मजबूती मिलेगी? पढ़िए ग्राउंड रिपोर्ट… पहले पढ़िए नेपाल चुनाव नतीजों में किस पार्टी की क्या स्थिति है नेपाल में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स चुनाव में फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट (FPTP) प्रणाली के तहत 165 सीटों और प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन (PR) प्रणाली के तहत 110 सीटों के लिए 5 मार्च को मतदान हुआ था। FPTP श्रेणी के रुझानों में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने 124 सीटें जीती हैं और एक सीट पर बढ़त बनाए हुए है। नेपाली कांग्रेस को 17 सीटें मिली हैं और एक सीट पर बढ़त है। CPN-UML ने 8 सीटें जीती हैं और एक सीट पर आगे है, जबकि नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (NCP) को 7 सीटें मिली हैं। श्रम संस्कृति पार्टी ने 3 सीटें और राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (RPP) ने 1 सीट जीती है। स्वतंत्र उम्मीदवार महाबीर पुन भी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के लिए निर्वाचित हुए हैं। PR श्रेणी में अब तक 10.9 मिलियन वोटों में से 8.122 मिलियन वोटों की गिनती हो चुकी है। इसमें RSP को 3,916,502 वोट, नेपाली कांग्रेस को 1,319,879 वोट और CPN-UML को 1,119,841 वोट मिले हैं। PR प्रणाली में सीट पाने के लिए किसी भी पार्टी को कुल वोटों का कम से कम 3 प्रतिशत हासिल करना आवश्यक है। मौजूदा रुझानों के अनुसार RSP, नेपाली कांग्रेस, CPN-UML, NCP और RPP इस सीमा को पार करती दिख रही हैं। अनुमान है कि PR प्रणाली के तहत RSP को करीब 60 सीटें, नेपाली कांग्रेस को 20, CPN-UML को 17, माओइस्ट सेंटर को 8 और RPP को 5 सीटें मिल सकती हैं। नेपाल की सरकार का बॉर्डर जिलों पर क्या असर होगा सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों का मानना है कि नेपाल में बनने वाली सरकार का असर सीधे यहां के सामाजिक और आर्थिक जीवन पर पड़ता है। सुपौल के व्यापारी सतेंद्र साह कहते हैं, “मैं एक व्यापारी हूं और मेरे कई ग्राहक नेपाल से आते हैं। यहां के लोग अक्सर चर्चा करते रहते हैं कि नेपाल में किसकी सरकार आ रही है। वहां के लोगों से भी हम पूछते रहते हैं। बातचीत से यही लगता है कि बालेन शाह प्रधानमंत्री बनेंगे और उनके आने से भारत-नेपाल के बीच शांति, सुरक्षा और व्यापार मजबूत होगा।” नेपाल की सत्ता से बिहार के बॉर्डर इलाके के लोगों को क्या फर्क पड़ता है भारत-नेपाल सीमा से सटे इलाकों में व्यापार और आवाजाही काफी हद तक एक-दूसरे पर निर्भर है। किशनगंज के गलगलिया और ठाकुरगंज जैसे बाजारों में रोजाना दोनों देशों के व्यापारी सामान लेकर आते-जाते हैं। व्यापारी राजकुमार शाह कहते हैं, “मेरी बहन की शादी नेपाल में हुई है। बालेन शाह के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत और नेपाल के रिश्ते काफी अच्छे होंगे। वह एक युवा और बढ़िया नेता हैं। मुझे लगता है कि व्यापार पर किसी प्रकार का असर नहीं पड़ेगा और दोनों देशों के बीच अच्छे संबंध रहेंगे। नेपाल के लोगों के साथ हमारा रिश्ता हमेशा से अच्छा रहा है और आगे भी अच्छा ही रहेगा। मेरी बहन ने बताया कि बालेन शाह भारत के साथ रोटी-बेटी का रिश्ता निभाएंगे।” नेपाल के काठमांडू निवासी गणेश, जो इन दिनों अपने रिश्तेदार के यहां भारत आए हुए हैं। वो कहते हैं, “मुझे लगता है कि वह बहुत अच्छे प्रधानमंत्री साबित होंगे। उनकी उम्र 40 साल से कम है और मैं समझता हूं कि वह और मोदी जी मिलकर विश्व में शांति कायम कर सकते हैं। नेपाल और भारत के बीच रोटी-बेटी का रिश्ता पहले से अच्छा था, अब और भी बेहतर होगा। दोनों देशों की बीच व्यापार और बढ़ेगा।” मधेशी नेता प्रधानमंत्री बनते हैं तो सांस्कृतिक रिश्ते मजबूत होंगे सीमावर्ती जिलों के लोगों का मानना है कि मधेश क्षेत्र से जुड़े नेता प्रधानमंत्री बनते हैं, तो सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूती मिल सकती है। मधुबनी जिले के महीनाथपुर गांव के शंकर चौधरी और श्याम चौधरी कहते हैं कि नेपाल में मधेशी समुदाय के मैथिली भाषी नेता के प्रधानमंत्री बनने की सूचना है। इससे हम लोगों के बीच खुशी की लहर है। उन्होंने आगे कहा कि भारत और नेपाल के बीच सदियों से चली आ रही बेटी-रोटी की परंपरा और मजबूत होगी। वहीं, उमगांव के व्यापारी हरी किशोर मोदी और शम्भू सम्राट ने कहा कि नेपाल के चुनाव में जिस तरह युवा नेता को दो-तिहाई समर्थन मिल रहा है, वह नेपाल के चुनावी इतिहास में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इससे नेपाल की राजनीति में नई पीढ़ी की भूमिका मजबूत होगी। बासोपट्टी बाजार के व्यापारी जीतेन्द्र साह ने कहते हैं, “हम लोगों की कई रिश्तेदारी नेपाल के जनकपुर और अन्य जगहों पर है। बालेन शाह के प्रधानमंत्री बनने से रिश्तों में और मजबूती आएगी। व्यापार भी बढ़ेगा।” रैपर से मेयर, अब पीएम बनने की राह पर.. काठमांडू के मेयर बनने से पहले बालेंद्र शाह, जिन्हें लोग बालेन के नाम से जानते हैं, नेपाल के अंडरग्राउंड हिप-हॉप सीन में सक्रिय थे। कभी वे छतों पर रैप बैटल करते नजर आते थे, तो कभी म्यूजिक वीडियो बनाते थे। उनके गानों में गरीबी, पिछड़ापन और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे उठाए जाते थे। इन्हीं गीतों ने उन्हें युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया। उनके रैप में अक्सर नेताओं की आलोचना की जाती थी। ऐसे में जब बालेन ने मई 2022 में काठमांडू से मेयर पद के लिए चुनाव लड़ने का ऐलान किया, तो लोग चौंक गए। चुनाव प्रचार के दौरान बालेन काले ब्लेजर, काली जींस और काले धूप के चश्मे में नजर आते थे, जिसकी काफी चर्चा हुई। सिर्फ 33 साल की उम्र में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ते हुए उन्होंने बड़े-बड़े दिग्गजों को हरा दिया। वे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में काठमांडू के मेयर का चुनाव जीतने वाले पहले शख्स बने। नेपाल में काठमांडू के मेयर का पद काफी प्रभावशाली माना जाता है और इसकी हैसियत कई मामलों में केंद्रीय मंत्रियों से भी अधिक मानी जाती है। ऐसे में उनकी इस जीत की चर्चा सिर्फ नेपाल तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरी दुनिया में हुई। साल 2023 में टाइम मैगजीन ने उन्हें दुनिया के टॉप 100 प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल किया, जबकि न्यूयॉर्क टाइम्स ने उनकी प्रोफाइल स्टोरी प्रकाशित की थी।


