Pakistan Child Marriage Law: पाकिस्तान में नाबालिगों की शादी के खिलाफ आ रहे बिल पर वहां सियासत तेज हो गई है। जहां शहबाज शरीफ की सरकार बाल विवाह रोकने के लिए सख्त कानून लाने की तैयारी में है, वहीं उनके ही सहयोगी संगठन जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने सरकार को खुली चुनौती दे दी है।
मौलाना ने इस बिल का विरोध करते हुए संसद के अंदर खड़े होकर कहा है कि वे 10 साल तक की बच्चियों की शादी कराएंगे और सरकार के कानूनों का विरोध करेंगे। मौलाना के इन दावों के बाद देश में एक नया राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा हो गया है।
मौलाना की सरकार को सीधी चुनौती
मौलाना फजलुर रहमान ने पाकिस्तानी नेशनल असेंबली में बोलते हुए कहा कि वे बाल विवाह रोकने वाले इस कानून को नहीं मानते और इसका सख्त विरोध करते हैं।
उन्होंने शहबाज सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि अगर यह सरकार कानून को लागू करने में सफल हो जाती है, तो वे इसके खिलाफ मोर्चा खोलेंगे और इस कानून का जानबूझकर उल्लंघन करेंगे।
मौलाना ने दावा किया कि वे खुद 10, 12, 15 और 16 साल के नाबालिग बच्चों की शादियों में शामिल होंगे। ताकि एक मिशाल पेश की जा सके और यह मेरा विरोध करने का एक तरीका होगा। मौलाना के इस बयान के बाद सदन के अंदर और बाहर दोनों जगह बहस होने लगी और मौलाना को आलोचनाओं का भी शिकार होना पड़ा।
इस्लामिक परिषद के पास भेजे बिल
मौलाना फजलुर रहमान ने इस कानून की आलोचना करते हुए इसे ‘इस्लाम विरोधी और गैरकानूनी’ बताया है। उनके अनुसार यह संसद के अधिकार क्षेत्र में नहीं है कि वह शादी से जुड़े मामलों पर कानून बनाए। उन्होंने कहा कि यह एक धार्मिक मुद्दा है, जिसका संसद से कोई लेना-देना नहीं है।
साथ ही, मौलाना ने बिल को इस्लामिक विचारधारा परिषद के पास भेजने की भी मांग की, ताकि इस्लामिक परिषद इस बिल की समीक्षा कर सके।
क्या है बाल विवाह कानून?
शहबाज शरीफ सरकार नए कानून लाने की तैयारियों में है। यह सरकार बाल विवाह रोकथाम बिल 2025 और घरेलू हिंसा अधिनियम 2026 लागू करने जा रही है।
इन कानूनों के लागू होने के बाद नाबालिगों की शादी कराना, उसमें किसी भी प्रकार की मदद करना, यहां तक कि शादी में शामिल होना भी अपराध माना जाएगा।
पहले राजधानी क्षेत्र में लागू हुआ था बाल विवाह बिल
हालांकि, इससे पहले मई 2025 में राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी बाल विवाह निषेध अधिनियम पर हस्ताक्षर कर चुके हैं। यह कानून पूरे पाकिस्तान पर लागू न होकर केवल इस्लामाबाद राजधानी क्षेत्र में ही लागू किया गया था।
राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी द्वारा लागू किए गए इस कानून में लड़की और लड़के दोनों की शादी की न्यूनतम उम्र 18 साल निर्धारित की गई है। इस कानून के बाद मानवाधिकार संगठनों ने इसकी सराहना की और इसे बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।


