‘पहली बार आई हूं, भगवान सूर्य की महिमा अपरंपार है’:’देव महोत्सव’ में औरंगाबाद पहुंचीं कल्पना पटवारी, छठ के गीतों से लोगों को झुमाया

‘पहली बार आई हूं, भगवान सूर्य की महिमा अपरंपार है’:’देव महोत्सव’ में औरंगाबाद पहुंचीं कल्पना पटवारी, छठ के गीतों से लोगों को झुमाया

औरंगाबाद के देव महोत्सव में दूसरे दिन यानी सोमवार को भोजपुरी सिंगर कल्पना पटवारी पहुंची। कल्पना ने देव स्थित रानी तालाब परिसर में आयोजित कार्यक्रम में एक से बढ़कर एक प्रस्तुति दी। कल्पना पटवारी ने जैसे ही मंच संभाला, वैसे ही माहौल पूरी तरह संगीतमय हो गया। उन्होंने सूर्य मंत्र से गायन शुरू की। इसके बाद उन्होंने कई छठ गीत सुनाए। कल्पना पटवारी ने पारंपरिक छठ गीत ‘मारवो रे सुगवा धनुष से’, ‘सुगा गिरे मुरुछाए और ऊगा हे सुरुजदेव भइले अरग के बेरवा’ गाकर दर्शकों का मन मोह लिया। इसके बाद ‘पहिले-पहिल बानी कइले छठी मईया व्रत तोहार’ समेत अन्य छठ गीत और लोकगीतों के साथ-साथ देशभक्ति से जुड़े गीतों की प्रस्तुति दी, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा। उनकी ऊर्जावान आवाज और मंचीय प्रस्तुति ने लोगों को देर रात तक बांधे रखा। कल्पना पटवारी की प्रस्तुति की 2 तस्वीरें देखिए कल्पना बोलीं- पहली बार देव आई हूं, बहुत अच्छा लग रहा है भोजपुरी सिंगर ने कहा कि पहली बार देव आई हूं। बहुत अच्छा लगा। यहां त्रेतायुगीन विश्व प्रसिद्ध सूर्य मंदिर है। भगवान राम और सिया ने यहीं छठ किया था। इसलिए इस स्थान की धार्मिक महत्ता और भी बढ़ जाता है। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, आसपास के ग्रामीण क्षेत्र से आए दर्शक, युवा और महिलाएं मौजूद रहीं। गीतों की धुन पर दर्शक झूमते और गुनगुनाते नजर आए। सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। देव महोत्सव के आयोजन से क्षेत्र में सांस्कृतिक माहौल बना हुआ है और स्थानीय कलाकारों को भी मंच मिल रहा है। दूसरे दिन की यह प्रस्तुति महोत्सव का मुख्य आकर्षण रही। आयोजकों के अनुसार महोत्सव के आगामी दिनों में भी कई प्रसिद्ध कलाकारों की प्रस्तुति प्रस्तावित है, जिसे लेकर लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। पहले दिन बॉलीवुड सिंगर पवनदीन ने सुरों से बांधा था समां तीन दिवसीय सूर्य महोत्सव का रविवार को भव्य आगाज हुआ था। बॉलीवुड सिंगर पवनदीप राजन ने सुरों से समां बांधा। देर रात तक श्रोता झूमते रहे। शाम करीब 7 बजकर 5 मिनट पर जैसे ही पवनदीप मंच पर पहुंचे, दर्शकों ने जोरदार तालियों और जयघोष के साथ उनका स्वागत किया। माहौल को भावनाओं से सराबोर किया कार्यक्रम की शुरुआत पवनदीप राजन ने भावपूर्ण गीत “शायद कभी न कह सकूं मैं तुमको, कहे बिना समझ लो तुम” से की। इसके बाद उन्होंने “लग जा गले कि फिर ये हंसी रात हो न हो” जैसे कालजयी गीत की प्रस्तुति देकर पूरे माहौल को भावनाओं से सराबोर कर दिया। उनकी गायिकी ने श्रोताओं को बीते दौर की यादों में लौटा दिया और सुरों की यह यात्रा लगातार आगे बढ़ती चली गई। पावन भूमि पर प्रस्तुति देना सौभाग्य की बात मंच से दर्शकों का अभिवादन करते हुए पवनदीप राजन ने कहा कि ऐतिहासिक सूर्य मंदिर की पावन भूमि पर प्रस्तुति देना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि देव की यह सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत कलाकारों को विशेष ऊर्जा प्रदान करती है। 27 जनवरी को प्रतियोगिताएं और समापन समारोह महोत्सव के अंतिम दिन 27 जनवरी को सुबह 11:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक सरस मेला मैदान में पेंटिंग, मेंहदी और रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। इसी समय राजा जगन्नाथ उच्च माध्यमिक विद्यालय, देव के खेल मैदान में जिला स्तरीय निबंध प्रतियोगिता आयोजित होगी। दोपहर 12 :00 बजे से शाम 5:00बजे तक स्थानीय कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी। इसके बाद शाम 5:00 बजे से 6:00 बजे तक विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा। शाम 6:00 बजे से 6:30 बजे तक धन्यवाद ज्ञापन के साथ सूर्य महोत्सव का विधिवत समापन होगा। औरंगाबाद के देव महोत्सव में दूसरे दिन यानी सोमवार को भोजपुरी सिंगर कल्पना पटवारी पहुंची। कल्पना ने देव स्थित रानी तालाब परिसर में आयोजित कार्यक्रम में एक से बढ़कर एक प्रस्तुति दी। कल्पना पटवारी ने जैसे ही मंच संभाला, वैसे ही माहौल पूरी तरह संगीतमय हो गया। उन्होंने सूर्य मंत्र से गायन शुरू की। इसके बाद उन्होंने कई छठ गीत सुनाए। कल्पना पटवारी ने पारंपरिक छठ गीत ‘मारवो रे सुगवा धनुष से’, ‘सुगा गिरे मुरुछाए और ऊगा हे सुरुजदेव भइले अरग के बेरवा’ गाकर दर्शकों का मन मोह लिया। इसके बाद ‘पहिले-पहिल बानी कइले छठी मईया व्रत तोहार’ समेत अन्य छठ गीत और लोकगीतों के साथ-साथ देशभक्ति से जुड़े गीतों की प्रस्तुति दी, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा। उनकी ऊर्जावान आवाज और मंचीय प्रस्तुति ने लोगों को देर रात तक बांधे रखा। कल्पना पटवारी की प्रस्तुति की 2 तस्वीरें देखिए कल्पना बोलीं- पहली बार देव आई हूं, बहुत अच्छा लग रहा है भोजपुरी सिंगर ने कहा कि पहली बार देव आई हूं। बहुत अच्छा लगा। यहां त्रेतायुगीन विश्व प्रसिद्ध सूर्य मंदिर है। भगवान राम और सिया ने यहीं छठ किया था। इसलिए इस स्थान की धार्मिक महत्ता और भी बढ़ जाता है। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, आसपास के ग्रामीण क्षेत्र से आए दर्शक, युवा और महिलाएं मौजूद रहीं। गीतों की धुन पर दर्शक झूमते और गुनगुनाते नजर आए। सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। देव महोत्सव के आयोजन से क्षेत्र में सांस्कृतिक माहौल बना हुआ है और स्थानीय कलाकारों को भी मंच मिल रहा है। दूसरे दिन की यह प्रस्तुति महोत्सव का मुख्य आकर्षण रही। आयोजकों के अनुसार महोत्सव के आगामी दिनों में भी कई प्रसिद्ध कलाकारों की प्रस्तुति प्रस्तावित है, जिसे लेकर लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। पहले दिन बॉलीवुड सिंगर पवनदीन ने सुरों से बांधा था समां तीन दिवसीय सूर्य महोत्सव का रविवार को भव्य आगाज हुआ था। बॉलीवुड सिंगर पवनदीप राजन ने सुरों से समां बांधा। देर रात तक श्रोता झूमते रहे। शाम करीब 7 बजकर 5 मिनट पर जैसे ही पवनदीप मंच पर पहुंचे, दर्शकों ने जोरदार तालियों और जयघोष के साथ उनका स्वागत किया। माहौल को भावनाओं से सराबोर किया कार्यक्रम की शुरुआत पवनदीप राजन ने भावपूर्ण गीत “शायद कभी न कह सकूं मैं तुमको, कहे बिना समझ लो तुम” से की। इसके बाद उन्होंने “लग जा गले कि फिर ये हंसी रात हो न हो” जैसे कालजयी गीत की प्रस्तुति देकर पूरे माहौल को भावनाओं से सराबोर कर दिया। उनकी गायिकी ने श्रोताओं को बीते दौर की यादों में लौटा दिया और सुरों की यह यात्रा लगातार आगे बढ़ती चली गई। पावन भूमि पर प्रस्तुति देना सौभाग्य की बात मंच से दर्शकों का अभिवादन करते हुए पवनदीप राजन ने कहा कि ऐतिहासिक सूर्य मंदिर की पावन भूमि पर प्रस्तुति देना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि देव की यह सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत कलाकारों को विशेष ऊर्जा प्रदान करती है। 27 जनवरी को प्रतियोगिताएं और समापन समारोह महोत्सव के अंतिम दिन 27 जनवरी को सुबह 11:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक सरस मेला मैदान में पेंटिंग, मेंहदी और रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। इसी समय राजा जगन्नाथ उच्च माध्यमिक विद्यालय, देव के खेल मैदान में जिला स्तरीय निबंध प्रतियोगिता आयोजित होगी। दोपहर 12 :00 बजे से शाम 5:00बजे तक स्थानीय कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी। इसके बाद शाम 5:00 बजे से 6:00 बजे तक विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा। शाम 6:00 बजे से 6:30 बजे तक धन्यवाद ज्ञापन के साथ सूर्य महोत्सव का विधिवत समापन होगा।  

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