मैं सुन्न हो गया था… टी20 वर्ल्ड कप में चयन न होने के बाद जितेश शर्मा ने तोड़ी चुप्पी

मैं सुन्न हो गया था… टी20 वर्ल्ड कप में चयन न होने के बाद जितेश शर्मा ने तोड़ी चुप्पी

Jitesh Sharma Statement on T20 World Cup Snub: फरवरी में भारत और श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में आयोजित होने वाले टी20 वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम घोषित हो चुकी है। इस टीम में भारतीय चयनकर्ताओं ने कई बड़े बदलाव किए। टीम के उपकप्तान तक को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इसी सूची में विस्फोटक विकेटकीपर बल्लेबाज जितेश शर्मा का नाम भी शामिल था, जो हाल के समय में भारतीय टी20 टीम का हिस्सा थे, लेकिन वर्ल्ड कप की टीम में उन्हें जगह नहीं मिल पाई। इस पर आखिरकार उन्होंने पहली बार चुप्पी तोड़ी और खुलकर अपनी बात रखी।

चयन न होने पर लगा झटका

जितेश शर्मा ने बताया कि जब टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए भारतीय टीम घोषित हुई और उन्होंने सूची में अपना नाम नहीं देखा, तो वह कुछ समय तक इस फैसले को समझ ही नहीं पाए। वह इसको प्रोसेस ही नहीं कर सके और वह पल उनके लिए दिल तोड़ देने वाला था। उनके मुताबिक, यह पल उनके लिए काफी भावनात्मक था क्योंकि उन्होंने इस टूर्नामेंट को ध्यान में रखकर लगातार मेहनत की थी। जितेश ने कहा कि चयन से पहले उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी और टीम घोषित होने के बाद ही उन्हें अपने बाहर होने का पता चला।

चयनकर्ताओं से बातचीत के बाद बदला नजरिया

टीम चयन के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में चयन समिति की ओर से दिए गए कारणों को सुनने के बाद जितेश शर्मा ने कहा कि वह उन बातों से सहमत थे। बाद में उनकी कोचिंग स्टाफ और चयनकर्ताओं से भी बातचीत हुई, जिसमें पूरे फैसले को विस्तार से समझाया गया। जितेश के अनुसार, बातचीत के दौरान उन्हें लगा कि चयन के पीछे जो सोच थी, वह पूरी तरह सही थी और उन्होंने उस फैसले को स्वीकार किया। इस प्रक्रिया के बाद उनका नजरिया थोड़ा बदला और वह स्थिति को बेहतर तरीके से समझ पाए।

परिवार और सीनियर खिलाड़ियों से मिला सहारा

जितेश शर्मा ने कहा कि इस मुश्किल समय में उनके परिवार ने उन्हें भावनात्मक सहारा दिया। इसके अलावा उन्होंने सीनियर खिलाड़ी और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के पूर्व स्टार विकेटकीपर बल्लेबाज दिनेश कार्तिक से भी बातचीत की, जिससे उन्हें आगे बढ़ने की हिम्मत मिली। जितेश ने माना कि उस समय वह अंदर से टूटे हुए थे और कुछ भी सोच पाने की हालत में नहीं थे। परिवार के साथ समय बिताने और भरोसेमंद लोगों से बात करने के बाद उन्होंने खुद को संभाला और भविष्य पर ध्यान केंद्रित किया।

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