‘मेरी कोई प्रेमिका नहीं है, ये सिर्फ कहानी है’:लव गुरु मटुकनाथ बोले- जूली से बात होती है, स्टूडेंट्स को देता हूं लव टिप्स

‘मेरी कोई प्रेमिका नहीं है, ये सिर्फ कहानी है’:लव गुरु मटुकनाथ बोले- जूली से बात होती है, स्टूडेंट्स को देता हूं लव टिप्स

‘जूली से मेरी अभी भी बात होती है, 3-4 महीने पहले ही जूली से बात हुई थी, सिर्फ हाल समाचार और सेहत को लेकर बात होती है, पहले जैसी कोई बात नहीं है। जूली का मेरे प्रति प्रेम अतीत था, वो अतीत ही है, लेकिन मेरे मन में उनके लिए अभी भी प्रेम और सद्भाव है, हमेशा रहेगा। हां, उनके वेस्टइंडीज जाने के बाद, मेरी लाइफ से जाने के बाद कुछ दिनों तक जो पीड़ा थी, उनके हेल्थ को लेकर जो चिंता थी, वो अब गायब हो गई है, अब प्यार वाली कोई बात नहीं है।’ वेलेंटाइन वीक के खत्म होने के बाद बिहार के लव गुरु यानी मटुकनाथ इन दिनों अपने एक फेसबुक पोस्ट को लेकर चर्चा में हैं। पोस्ट पर मटुकनाथ ने जो कुछ लिखा, उससे कयास लगाए जाने लगा कि वे एक बार फिर से प्यार में हैं। क्या सच में प्रोफेसर मटुकनाथ चौधरी एक बार फिर से प्यार में हैं, क्या जूली से उनकी अभी भी बातचीत होती है, मटुकनाथ का पत्नी और बच्चों से बातचीत होती है? दैनिक भास्कर रिपोर्टर ने मटुकनाथ से मुलाकात की और उनसे बातचीत की। पढ़िए पूरी बातचीत। ‘फेसबुक पोस्ट पर जो लिखा, वो सिर्फ कहानी है, कोई सच्चाई नहीं है’ मटुकनाथ चौधरी ने बताया कि मेरे फेसबुक पोस्ट को लेकर कई लोगों ने खबर बनाई। ये सब अफवाह है, ऐसी कोई बात नहीं है। फेसबुक पर जो कुछ लिखा, वो सिर्फ कहानी है और ये कहानी सिर्फ मैं ही लिख सकता हूं, दूसरा कोई नहीं, क्योंकि ये मैं अपने अनुभव से लिखता हूं। ‘लोगों की मनगढ़ंत कहानियों का माध्यम मैं बनता हूं’ वेलेंटाइन वीक पर मेरी कहानियां हर साल मीडिया में आती हैं, कई खबरें बनती हैं, वे सभी मनगढ़ंत होती हैं, जो पहले की सच्चाई थी, वो सभी को पता है, लेकिन जूली के जाने के बाद जो कुछ सामने आया, वो लोगों की दिलचस्पी थी, लेकिन ये लोगों के मन की उपज होती है। इन मनगढ़ंत कहानियां का बस मैं माध्यम बनता हूं और मेरे जरिए लोग अपने मन की गंदगी को सामने लाते हैं। मैं जो हूं, जहां हूं, जैसा हूं, जो मेरा विचार है, वो बिल्कुल अलग है और लोग जो मेरे बारे में बताते हैं, लिखते हैं, कहते हैं वो बिल्कुल अलग है। ‘जूली से आज भी बातचीत होती है’ जूली से आखिरी बार कब बात हुई थी, इस सवाल पर मटुकनाथ बताते हैं कि आखिरी बार कोई बात होती नहीं है, क्योंकि आखिरी तब हो, जब उसके बाद कोई बातचीत न हो। दो से तीन महीने पहले ही मेरी जूली से बातचीत हुई थी। अब क्या बातचीत हुई, ये मत पूछिए, बस इतना है कि हाल समाचार पूछ लेता हूं, वो बिल्कुल ठीक हैं, जहां हैं, खुश हैं। ‘मटुकनाथ बिल्कुल अकेले नहीं है, खुद के लिए समय निकालता हूं’ क्या मटुकनाथ अकेले हैं, इस सवाल पर वे कहते हैं कि नहीं, मैं अकेला नहीं हूं, मेरा अपना एक समाज है। मैं पढ़ता-लिखता हूं, ये मेरा धर्म है। मेरे सोशल मीडिया पर हजारों फॉलोअर्स हैं, उनसे रोजाना बातचीत होती है। हां, जहां तक अकेलेपन की बात है, ये मुझे खुद पसंद है। दरअसल, कुछ लिखने-पढ़ने के लिए अकेलापन चाहिए, एकांत चाहिए और ध्यान करने के लिए, चिंतन-मनन के लिए भी एकांत चाहिए, तो इस तरह का एकांत मुझे बहुत प्यारा है, जिसमें मैं क्रिएटिव हो कर कुछ करता हूं। ‘मॉर्डन समय में यूथ्स पर शादी का दबाव, कानून का बंधन है’ शादी और लिव इन रिलेशन से जुड़े सवाल पर मटुकनाथ बताते हैं कि शादी का हर किसी के पास अपना अलग-अलग अनुभव है। किसी के लिए शादी बहुत ही अच्छी चीज है। कोई शादी में घुटन महसूस कर रहा है तो उनके लिए शादी बहुत बुरी चीज है। ‘पत्नी के साथ दोबारा रहना चाहता था, लेकिन उनकी ओर से कोई कोशिश नहीं हुई’ मटुकनाथ कहते हैं कि मैं कभी पत्नी और बच्चों से अलग नहीं हुआ, न होना चाहा। ऐसा नहीं है कि जो कुछ हुआ, उसके बाद मैंने पत्नी और बच्चों से मिलने की कोशिश नहीं की, खूब प्रयास किया, लेकिन पत्नी और बच्चों की ओर से कभी उस तरह की कोई कोशिश नहीं हुई कि हम दोबारा एक साथ रहे, हम फिर साथ आए। जो हमारा संबंध था, एक बार टूटा तो फिर दोबारा नहीं जुड़ा। ‘स्टूडेंट्स जब प्यार में फंसते हैं, तो मुझसे टिप्स लेते हैं’ मटुकनाथ कहते हैं कि मेरी प्रेम कहानी जब शुरू हुई, सबके सामने आई। जब खत्म हुई, तब भी लोगों को पता चला, लेकिन कभी किसी ने मुझसे सवाल नहीं पूछा। मैं शुरु में बीए, एमए के छात्रों को पढ़ाता था, अब बच्चों को पढ़ाता हूं। कई बच्चे ऐसे हैं, जिनका उस वक्त जन्म भी नहीं हुआ था, लेकिन बच्चों ने कभी मुझसे मेरी प्रेम कहानी नहीं पूछी। इन बच्चों से प्रेम कहानी शेयर करने का कोई मतलब भी नहीं है। हां, पटना यूनिवर्सिटी में कभी कोई छात्र प्यार में मामले में फंस जाता था, तो मेरे पास आता था, तब मैं उसके हिसाब से उसे टिप्स भी देता था। जूली से पहली मुलाकात के सवाल पर मटुकनाथ कहते हैं कि ये सभी को पता है। साल 2004 में पहली मुलाकात हुई, एक-दूसरे से परिचय हुआ, दोस्ती हुई, एक-दूसरे की पसंदगी हुई और धीरे-धीरे हम लोग एक-दूसरे के विचारों से प्रभावित हुए और एक-दूसरे के पास आते गए और अंत में वही कहानी प्रेम में बदल गई। ‘जूली की यादों से मुझे छुटकारा मिल चुका है’ जूली आज भी आपको याद आती है, इस सवाल पर मटुकनाथ तपाक से जवाब देते हैं- नहीं। मुझे जूली की यादों से छुटकारा मिल चुका है, मैं किसी को याद नहीं करता हूं। अगर याद भी करता हूं तो आनंद से ही करता हूं, पीड़ा में रहकर याद नहीं करता हूं। समय-समय पर कभी कोई बात छिड़ता है तो उनकी बात होती है। उनके साथ कई बेहतरीन पल रहे हैं, दिल छूने वाली कई यादें हैं। जब तक साथ रहे, हम लोग चमकते ही रहे। हां, हमारे बीच बहस भी होती थी। एक दूसरे से नाराज भी होते थे, एक दूसरे पर गुस्सा भी करते थे, लेकिन प्यार में ये सब जरूरी होता है। मीडिया में जूली की जो बीमार होने वाली तस्वीर वायरल होती है, वो पुरानी है, यूजर्स उसे बार-बार दोहराते हैं, ये 2020 की बातें है। जब मैं ये खबरें देखता हूं तो परेशानी होती है, क्योंकि मुझे अभी भी सोशल मीडिया पर लोग गालियां देते हैं, श्राप देते हैं। स्वाभाविक है कि बुरा लगता है, क्योंकि इन सभी बातों के लिए मैं जिम्मेदार नहीं था, उनका मन था, वो चली गईं। अब जानिए मटुकनाथ कौन हैं और उनकी और जूली की लव स्टोरी क्या है मटुकनाथ-जूली की प्रेम कहानी 2004 में चर्चा में आई थी। मटुकनाथ पटना यूनिवर्सिटी में हिन्दी के प्रोफेसर थे और जूली उनकी स्टूडेंट थी। दोनों की उम्र में 30 साल का अंतर था। मटुकनाथ के मुताबिक, जूली ने ही उन्हें प्रपोज किया था, फिर दोनों लिव इन में रहने लगे थे। जूली के साथ प्रेम-प्रसंग की वजह से 15 जुलाई, 2006 को पटना यूनिवर्सिटी ने मटुकनाथ को बीएन कॉलेज के हिंदी डिपार्टमेंट के रीडर पद से सस्पेंड कर दिया था। बाद में 20 जुलाई, 2009 को उन्हें नौकरी से ही बर्खास्त कर दिया गया। वहीं, जूली से अफेयर के बाद मटुकनाथ की पत्नी आभा से तलाक हो गया था। फिलहाल, 72 साल के मटुकनाथ बिहार के भागलपुर नवगछिया में एक स्कूल चलाते हैं। अध्यात्म की तलाश में बढ़ी मटुकनाथ से जूली की दूरी जूली इस वक्त पोर्ट ऑफ स्पेन में हैं। वह वहां एक बुजुर्ग के साथ रहती हैं। अध्यात्म और व्यवसाय से जुड़े वृद्ध ही जूली का खर्च उठाते हैं। मटुकनाथ बताते हैं कि प्रेम में आने के बाद भी शुरू से जूली अध्यात्म और साधना के प्रति आकर्षित होती रहीं। साल 2013 तक तो सबकुछ ठीक ठाक रहा, लेकिन साधना के लिए गुरु की तलाश में वह भटक गईं। मटुकनाथ और जूली के बीच दूरी 2014 से बढ़ने लगी। अपनी आधी उम्र की लड़की से प्यार करने वाले मटुकनाथ को जूली की साधना पसंद नहीं आई जिससे दूरियां खाई बनती गईं। इसके बाद जूली सात समंदर पार पोर्ट ऑफ स्पेन पहुंच गईं। ‘जूली से मेरी अभी भी बात होती है, 3-4 महीने पहले ही जूली से बात हुई थी, सिर्फ हाल समाचार और सेहत को लेकर बात होती है, पहले जैसी कोई बात नहीं है। जूली का मेरे प्रति प्रेम अतीत था, वो अतीत ही है, लेकिन मेरे मन में उनके लिए अभी भी प्रेम और सद्भाव है, हमेशा रहेगा। हां, उनके वेस्टइंडीज जाने के बाद, मेरी लाइफ से जाने के बाद कुछ दिनों तक जो पीड़ा थी, उनके हेल्थ को लेकर जो चिंता थी, वो अब गायब हो गई है, अब प्यार वाली कोई बात नहीं है।’ वेलेंटाइन वीक के खत्म होने के बाद बिहार के लव गुरु यानी मटुकनाथ इन दिनों अपने एक फेसबुक पोस्ट को लेकर चर्चा में हैं। पोस्ट पर मटुकनाथ ने जो कुछ लिखा, उससे कयास लगाए जाने लगा कि वे एक बार फिर से प्यार में हैं। क्या सच में प्रोफेसर मटुकनाथ चौधरी एक बार फिर से प्यार में हैं, क्या जूली से उनकी अभी भी बातचीत होती है, मटुकनाथ का पत्नी और बच्चों से बातचीत होती है? दैनिक भास्कर रिपोर्टर ने मटुकनाथ से मुलाकात की और उनसे बातचीत की। पढ़िए पूरी बातचीत। ‘फेसबुक पोस्ट पर जो लिखा, वो सिर्फ कहानी है, कोई सच्चाई नहीं है’ मटुकनाथ चौधरी ने बताया कि मेरे फेसबुक पोस्ट को लेकर कई लोगों ने खबर बनाई। ये सब अफवाह है, ऐसी कोई बात नहीं है। फेसबुक पर जो कुछ लिखा, वो सिर्फ कहानी है और ये कहानी सिर्फ मैं ही लिख सकता हूं, दूसरा कोई नहीं, क्योंकि ये मैं अपने अनुभव से लिखता हूं। ‘लोगों की मनगढ़ंत कहानियों का माध्यम मैं बनता हूं’ वेलेंटाइन वीक पर मेरी कहानियां हर साल मीडिया में आती हैं, कई खबरें बनती हैं, वे सभी मनगढ़ंत होती हैं, जो पहले की सच्चाई थी, वो सभी को पता है, लेकिन जूली के जाने के बाद जो कुछ सामने आया, वो लोगों की दिलचस्पी थी, लेकिन ये लोगों के मन की उपज होती है। इन मनगढ़ंत कहानियां का बस मैं माध्यम बनता हूं और मेरे जरिए लोग अपने मन की गंदगी को सामने लाते हैं। मैं जो हूं, जहां हूं, जैसा हूं, जो मेरा विचार है, वो बिल्कुल अलग है और लोग जो मेरे बारे में बताते हैं, लिखते हैं, कहते हैं वो बिल्कुल अलग है। ‘जूली से आज भी बातचीत होती है’ जूली से आखिरी बार कब बात हुई थी, इस सवाल पर मटुकनाथ बताते हैं कि आखिरी बार कोई बात होती नहीं है, क्योंकि आखिरी तब हो, जब उसके बाद कोई बातचीत न हो। दो से तीन महीने पहले ही मेरी जूली से बातचीत हुई थी। अब क्या बातचीत हुई, ये मत पूछिए, बस इतना है कि हाल समाचार पूछ लेता हूं, वो बिल्कुल ठीक हैं, जहां हैं, खुश हैं। ‘मटुकनाथ बिल्कुल अकेले नहीं है, खुद के लिए समय निकालता हूं’ क्या मटुकनाथ अकेले हैं, इस सवाल पर वे कहते हैं कि नहीं, मैं अकेला नहीं हूं, मेरा अपना एक समाज है। मैं पढ़ता-लिखता हूं, ये मेरा धर्म है। मेरे सोशल मीडिया पर हजारों फॉलोअर्स हैं, उनसे रोजाना बातचीत होती है। हां, जहां तक अकेलेपन की बात है, ये मुझे खुद पसंद है। दरअसल, कुछ लिखने-पढ़ने के लिए अकेलापन चाहिए, एकांत चाहिए और ध्यान करने के लिए, चिंतन-मनन के लिए भी एकांत चाहिए, तो इस तरह का एकांत मुझे बहुत प्यारा है, जिसमें मैं क्रिएटिव हो कर कुछ करता हूं। ‘मॉर्डन समय में यूथ्स पर शादी का दबाव, कानून का बंधन है’ शादी और लिव इन रिलेशन से जुड़े सवाल पर मटुकनाथ बताते हैं कि शादी का हर किसी के पास अपना अलग-अलग अनुभव है। किसी के लिए शादी बहुत ही अच्छी चीज है। कोई शादी में घुटन महसूस कर रहा है तो उनके लिए शादी बहुत बुरी चीज है। ‘पत्नी के साथ दोबारा रहना चाहता था, लेकिन उनकी ओर से कोई कोशिश नहीं हुई’ मटुकनाथ कहते हैं कि मैं कभी पत्नी और बच्चों से अलग नहीं हुआ, न होना चाहा। ऐसा नहीं है कि जो कुछ हुआ, उसके बाद मैंने पत्नी और बच्चों से मिलने की कोशिश नहीं की, खूब प्रयास किया, लेकिन पत्नी और बच्चों की ओर से कभी उस तरह की कोई कोशिश नहीं हुई कि हम दोबारा एक साथ रहे, हम फिर साथ आए। जो हमारा संबंध था, एक बार टूटा तो फिर दोबारा नहीं जुड़ा। ‘स्टूडेंट्स जब प्यार में फंसते हैं, तो मुझसे टिप्स लेते हैं’ मटुकनाथ कहते हैं कि मेरी प्रेम कहानी जब शुरू हुई, सबके सामने आई। जब खत्म हुई, तब भी लोगों को पता चला, लेकिन कभी किसी ने मुझसे सवाल नहीं पूछा। मैं शुरु में बीए, एमए के छात्रों को पढ़ाता था, अब बच्चों को पढ़ाता हूं। कई बच्चे ऐसे हैं, जिनका उस वक्त जन्म भी नहीं हुआ था, लेकिन बच्चों ने कभी मुझसे मेरी प्रेम कहानी नहीं पूछी। इन बच्चों से प्रेम कहानी शेयर करने का कोई मतलब भी नहीं है। हां, पटना यूनिवर्सिटी में कभी कोई छात्र प्यार में मामले में फंस जाता था, तो मेरे पास आता था, तब मैं उसके हिसाब से उसे टिप्स भी देता था। जूली से पहली मुलाकात के सवाल पर मटुकनाथ कहते हैं कि ये सभी को पता है। साल 2004 में पहली मुलाकात हुई, एक-दूसरे से परिचय हुआ, दोस्ती हुई, एक-दूसरे की पसंदगी हुई और धीरे-धीरे हम लोग एक-दूसरे के विचारों से प्रभावित हुए और एक-दूसरे के पास आते गए और अंत में वही कहानी प्रेम में बदल गई। ‘जूली की यादों से मुझे छुटकारा मिल चुका है’ जूली आज भी आपको याद आती है, इस सवाल पर मटुकनाथ तपाक से जवाब देते हैं- नहीं। मुझे जूली की यादों से छुटकारा मिल चुका है, मैं किसी को याद नहीं करता हूं। अगर याद भी करता हूं तो आनंद से ही करता हूं, पीड़ा में रहकर याद नहीं करता हूं। समय-समय पर कभी कोई बात छिड़ता है तो उनकी बात होती है। उनके साथ कई बेहतरीन पल रहे हैं, दिल छूने वाली कई यादें हैं। जब तक साथ रहे, हम लोग चमकते ही रहे। हां, हमारे बीच बहस भी होती थी। एक दूसरे से नाराज भी होते थे, एक दूसरे पर गुस्सा भी करते थे, लेकिन प्यार में ये सब जरूरी होता है। मीडिया में जूली की जो बीमार होने वाली तस्वीर वायरल होती है, वो पुरानी है, यूजर्स उसे बार-बार दोहराते हैं, ये 2020 की बातें है। जब मैं ये खबरें देखता हूं तो परेशानी होती है, क्योंकि मुझे अभी भी सोशल मीडिया पर लोग गालियां देते हैं, श्राप देते हैं। स्वाभाविक है कि बुरा लगता है, क्योंकि इन सभी बातों के लिए मैं जिम्मेदार नहीं था, उनका मन था, वो चली गईं। अब जानिए मटुकनाथ कौन हैं और उनकी और जूली की लव स्टोरी क्या है मटुकनाथ-जूली की प्रेम कहानी 2004 में चर्चा में आई थी। मटुकनाथ पटना यूनिवर्सिटी में हिन्दी के प्रोफेसर थे और जूली उनकी स्टूडेंट थी। दोनों की उम्र में 30 साल का अंतर था। मटुकनाथ के मुताबिक, जूली ने ही उन्हें प्रपोज किया था, फिर दोनों लिव इन में रहने लगे थे। जूली के साथ प्रेम-प्रसंग की वजह से 15 जुलाई, 2006 को पटना यूनिवर्सिटी ने मटुकनाथ को बीएन कॉलेज के हिंदी डिपार्टमेंट के रीडर पद से सस्पेंड कर दिया था। बाद में 20 जुलाई, 2009 को उन्हें नौकरी से ही बर्खास्त कर दिया गया। वहीं, जूली से अफेयर के बाद मटुकनाथ की पत्नी आभा से तलाक हो गया था। फिलहाल, 72 साल के मटुकनाथ बिहार के भागलपुर नवगछिया में एक स्कूल चलाते हैं। अध्यात्म की तलाश में बढ़ी मटुकनाथ से जूली की दूरी जूली इस वक्त पोर्ट ऑफ स्पेन में हैं। वह वहां एक बुजुर्ग के साथ रहती हैं। अध्यात्म और व्यवसाय से जुड़े वृद्ध ही जूली का खर्च उठाते हैं। मटुकनाथ बताते हैं कि प्रेम में आने के बाद भी शुरू से जूली अध्यात्म और साधना के प्रति आकर्षित होती रहीं। साल 2013 तक तो सबकुछ ठीक ठाक रहा, लेकिन साधना के लिए गुरु की तलाश में वह भटक गईं। मटुकनाथ और जूली के बीच दूरी 2014 से बढ़ने लगी। अपनी आधी उम्र की लड़की से प्यार करने वाले मटुकनाथ को जूली की साधना पसंद नहीं आई जिससे दूरियां खाई बनती गईं। इसके बाद जूली सात समंदर पार पोर्ट ऑफ स्पेन पहुंच गईं।  

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