इस गाने को सुनकर खूब रोया था असली खूंखार डॉन, गीतकार समीर का खुलासा, बोले- 4 बजे मुझे फोन किया

Lyricist Sameer Big Revealed: बॉलीवुड और अंडरवर्ल्ड का रिश्ता सालों पुराना रहा है, लेकिन कभी-कभी कुछ किस्से ऐसे होते हैं जो फिल्मी स्क्रिप्ट से भी ज्यादा फिल्मी लगते हैं। ऐसा ही एक हैरान कर देने वाला वाकया मशहूर गीतकार समीर अनजान के साथ हुआ था। समीर ने हजारों सुपरहिट गाने लिखे हैं, लेकिन उनके लिखे एक गाने ने सात समंदर पार दुबई में बैठे असली माफिया डॉन को भी रोने पर मजबूर कर दिया। वह इस कदर भावुक हुई कि उसने समीर को ‘सोने से लादने’ तक का ऑफर दे दिया था।

सुबह 4 बजे आया था डॉन का फोन (Lyricist Sameer Big Revealed real Don cry after listening this song)

समीर अनजान ने एक इंटरव्यू के दौरान इस दिलचस्प किस्से का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि यह वाकया तब का है जब उनका करियर ऊंचाइयों पर था। एक दिन सुबह करीब 4 बजे उनके फोन की घंटी बजी। दूसरी तरफ से जो आवाज आई, उसका नाम सुनते ही किसी के भी पसीने छूट जाएं। वह दुबई का एक कुख्यात माफिया डॉन था। समीर ने बताया कि वह डॉन उस समय नशे में था और बहुत ज्यादा रो रहा था।

फोन उठाते ही डॉन ने कहा, “समीर साहब, आप बस एक बार दुबई आ जाओ। मैं आपको सिर से पांव तक सोने से लादकर वापस भेजूंगा।” समीर यह सुनकर सन्न रह गए। उन्होंने हिम्मत जुटाकर पूछा कि आखिर बात क्या है? मुझसे ऐसी क्या सेवा हो गई?

Lyricist Sameer Big Revealed real Don cry after listening this song

गाने की दो लाइनों में दिखी अपनी जिंदगी (Dubai real Don cry)

डॉन ने रोने वाली आवाज में समीर से कहा, “सर, आपने एक ऐसा गाना लिख दिया है जिसने मेरी पूरी जिंदगी की हकीकत बयान कर दी है। इस गाने को सुनकर मैं रात भर रोया हूं और रात भर शराब पी है। मैंने न जाने कहां-कहां से आपका नंबर निकलवाया, क्योंकि मैं आमतौर पर किसी को खुद फोन नहीं करता। लेकिन आज मैं खुद को रोक नहीं पाया क्योंकि मुझे आपसे बात करनी ही थी।”

Lyricist Sameer Big Revealed real Don cry after listening this song

वो गाना जिसने माफिया को रुला दिया

समीर ने बताया कि वह गाना साल 1991 में आई फिल्म साथी’ का था। गाने के बोल थे- “जिंदगी की तलाश में हम, मौत के कितने पास आ गए… जब ये सोचा तो घबरा गए, हम कहां थे कहां आ गए।” इस गाने को कुमार सानू ने अपनी दर्दभरी आवाज दी थी। फिल्म में भी यह गाना एक ऐसे अपराधी पर फिल्माया गया था जो जुर्म की दुनिया में बहुत आगे निकल चुका है और अब पीछे मुड़कर देखता है तो उसे सिर्फ पछतावा होता है। समीर ने तो यह गाना फिल्म की सिचुएशन के हिसाब से लिखा था, लेकिन उन्हें रत्ती भर भी अंदाजा नहीं था कि असल जिंदगी में मौत के साये में जीने वाला एक खूंखार डॉन भी इन शब्दों में अपनी कहनी ढूंढ लेगा।

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