‘मैं बेटे का चेहरा आखिरी बार भी न देख सकी…’:इंदौर अग्निकांड में किशनगंज के 6 लोगों की मौत, पहुंचने से पहले ही हो गया था अंतिम संस्कार

‘मैं बेटे का चेहरा आखिरी बार भी न देख सकी…’:इंदौर अग्निकांड में किशनगंज के 6 लोगों की मौत, पहुंचने से पहले ही हो गया था अंतिम संस्कार

“मैं अपने बेटे का चेहरा अंतिम बार देखना चाहती थी, लेकिन देख नहीं सकी। मेरे जाने से पहले ही मेरे बेटे का शरीर जल चुका था…” यह कहते-कहते 15 वर्षीय कार्तिक की मां मैहर सेठिया की आवाज भर जाती है, उनकी आंखों से आंसू बहने लगते हैं और वे सुबक-सुबक कर रो पड़ती हैं। यह दर्द सिर्फ एक मां का नहीं, बल्कि उस पूरे परिवार का है, जिसने मध्य प्रदेश के इंदौर में बुधवार तड़के 4 बजे हुए अग्निकांड में अपने 6 सदस्यों को हमेशा के लिए खो दिया। किशनगंज के रहने वाले इस परिवार को अपनों के अंतिम दर्शन तक नसीब नहीं हुए। एक साथ उठीं 6 अर्थियां, बिलखता रहा परिवार इंदौर में हुए इस दर्दनाक हादसे में किशनगंज के सेठिया परिवार के 6 लोगों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान विजय सेठिया (65), उनकी पत्नी सुमन सेठिया (60), बेटी रुचिका (30), भतीजा कार्तिक (15), नातिनी तान्या (8) और राशि (12) शामिल है। कार्तिक की मां मैहर की हालत बेहद खराब है। वह बार-बार एक ही बात दोहराती हैं, “मेरा भाग्य इतना फूटा है कि मैं अपने बेटे का चेहरा नहीं देख पाई। जिस दिन वह इंदौर जा रहा था, मुझे बहुत बेचैनी हुई, लेकिन मैंने उसे हंसी-खुशी भेज दिया। मैं चाहती थी कि मेरा बेटा पढ़-लिखकर बड़ा अफसर बने, लेकिन अब तो बस उसकी यादें ही बची हैं।”
परिजन के पहुंचने से पहले हुआ अंतिम संस्कार घटना की सूचना बुधवार को मृतक विजय सेठिया की बहू को फोन पर मिली। खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। विजय सेठिया के पुत्र विकास सेठिया और अन्य रिश्तेदार तुरंत इंदौर के लिए निकल पड़े। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। एक तो पूरे परिवार की एक साथ मृत्यु का गम, ऊपर से जब तक वे इंदौर पहुंचे, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। बताया जाता है कि शवों की स्थिति ऐसी थी कि उन्हें ज्यादा देर तक रखना संभव नहीं था, इसलिए परिजनों के पहुंचने से पहले ही उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। जब रिश्तेदार इंदौर पहुंचे, तो वे अपनों के अंतिम दर्शन भी नहीं कर पाए और वहीं फूट-फूटकर रोने लगे। यह गम अब उन्हें जीवन भर सालता रहेगा। इस विडंबना का सबसे बड़ा शिकार राजेश जैन हुए, जिन्होंने अपनी पत्नी रुचिका और पुत्र कार्तिक दोनों को खो दिया और वे दोनों का चेहरा आखिरी बार देख भी नहीं सके। मुख्यमंत्री ने की मदद की घोषणा किशनगंज स्थित उनके किराए के मकान में भी मातम पसरा हुआ है। रिश्तेदार और पड़ोसी सदमे में हैं और सांत्वना देने वालों का तांता लगा हुआ है। इस दुखद घटना पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी शोक व्यक्त किया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “मध्यप्रदेश के इंदौर में शॉर्ट सर्किट से बिहार के किशनगंज जिले के रहने वाले छह लोगों की मृत्यु दुखद है। मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपए अनुग्रह राशि दिया जाएगा।” “मैं अपने बेटे का चेहरा अंतिम बार देखना चाहती थी, लेकिन देख नहीं सकी। मेरे जाने से पहले ही मेरे बेटे का शरीर जल चुका था…” यह कहते-कहते 15 वर्षीय कार्तिक की मां मैहर सेठिया की आवाज भर जाती है, उनकी आंखों से आंसू बहने लगते हैं और वे सुबक-सुबक कर रो पड़ती हैं। यह दर्द सिर्फ एक मां का नहीं, बल्कि उस पूरे परिवार का है, जिसने मध्य प्रदेश के इंदौर में बुधवार तड़के 4 बजे हुए अग्निकांड में अपने 6 सदस्यों को हमेशा के लिए खो दिया। किशनगंज के रहने वाले इस परिवार को अपनों के अंतिम दर्शन तक नसीब नहीं हुए। एक साथ उठीं 6 अर्थियां, बिलखता रहा परिवार इंदौर में हुए इस दर्दनाक हादसे में किशनगंज के सेठिया परिवार के 6 लोगों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान विजय सेठिया (65), उनकी पत्नी सुमन सेठिया (60), बेटी रुचिका (30), भतीजा कार्तिक (15), नातिनी तान्या (8) और राशि (12) शामिल है। कार्तिक की मां मैहर की हालत बेहद खराब है। वह बार-बार एक ही बात दोहराती हैं, “मेरा भाग्य इतना फूटा है कि मैं अपने बेटे का चेहरा नहीं देख पाई। जिस दिन वह इंदौर जा रहा था, मुझे बहुत बेचैनी हुई, लेकिन मैंने उसे हंसी-खुशी भेज दिया। मैं चाहती थी कि मेरा बेटा पढ़-लिखकर बड़ा अफसर बने, लेकिन अब तो बस उसकी यादें ही बची हैं।”
परिजन के पहुंचने से पहले हुआ अंतिम संस्कार घटना की सूचना बुधवार को मृतक विजय सेठिया की बहू को फोन पर मिली। खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। विजय सेठिया के पुत्र विकास सेठिया और अन्य रिश्तेदार तुरंत इंदौर के लिए निकल पड़े। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। एक तो पूरे परिवार की एक साथ मृत्यु का गम, ऊपर से जब तक वे इंदौर पहुंचे, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। बताया जाता है कि शवों की स्थिति ऐसी थी कि उन्हें ज्यादा देर तक रखना संभव नहीं था, इसलिए परिजनों के पहुंचने से पहले ही उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। जब रिश्तेदार इंदौर पहुंचे, तो वे अपनों के अंतिम दर्शन भी नहीं कर पाए और वहीं फूट-फूटकर रोने लगे। यह गम अब उन्हें जीवन भर सालता रहेगा। इस विडंबना का सबसे बड़ा शिकार राजेश जैन हुए, जिन्होंने अपनी पत्नी रुचिका और पुत्र कार्तिक दोनों को खो दिया और वे दोनों का चेहरा आखिरी बार देख भी नहीं सके। मुख्यमंत्री ने की मदद की घोषणा किशनगंज स्थित उनके किराए के मकान में भी मातम पसरा हुआ है। रिश्तेदार और पड़ोसी सदमे में हैं और सांत्वना देने वालों का तांता लगा हुआ है। इस दुखद घटना पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी शोक व्यक्त किया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “मध्यप्रदेश के इंदौर में शॉर्ट सर्किट से बिहार के किशनगंज जिले के रहने वाले छह लोगों की मृत्यु दुखद है। मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपए अनुग्रह राशि दिया जाएगा।”  

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