गोपालगंज में दहेज हत्या मामले में पति बरी:एडीजे 12 कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में सुनाया फैसला, 7 थे नामजद

गोपालगंज में दहेज हत्या मामले में पति बरी:एडीजे 12 कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में सुनाया फैसला, 7 थे नामजद

गोपालगंज जिले के व्यवहार न्यायालय के एडीजे 12 की अदालत ने दहेज हत्या के एक मामले में पति को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। यह फैसला शुक्रवार को सुनाया गया। ये मामला दहेज प्रताड़ना और विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत से संबंधित था। मृतका के परिजनों ने आरोप लगाया था कि शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष द्वारा दहेज की मांग को लेकर उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। मायके वालों ने FIR की थी दर्ज इस संबंध में मृतका के मायके वालों ने स्थानीय थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें पति समेत कुल सात लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया था। पुलिस जांच में तीन लोगों के खिलाफ मामला सत्य पाया गया था, जिनमें पति भी शामिल था। पुलिस ने पति को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा था और न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की थी। चार अन्य लोगों के खिलाफ पुलिस का पूरक अनुसंधान अभी जारी है। मामले की सुनवाई के दौरान, अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत गवाहों और सबूतों का गहन अध्ययन किया। बचाव पक्ष के वकीलों ने तर्क दिया कि आरोपी पति के खिलाफ दहेज हत्या के सीधे साक्ष्य उपलब्ध नहीं थे। उन्होंने बताया कि गवाहों के बयानों में विरोधाभास था और पोस्टमार्टम रिपोर्ट सहित अन्य फोरेंसिक साक्ष्य यह साबित करने में विफल रहे कि मौत में पति की सीधी भूमिका थी। सबूतों के अभाव में पति बरी इन दलीलों और सबूतों के अभाव को देखते हुए, एडीजे 12 की अदालत ने पति को निर्दोष मानते हुए बाइज्जत बरी कर दिया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता राजेश पाठक ने बताया कि यह मामला बरौली थाना कांड संख्या 163/24 के तहत दर्ज किया गया था। उन्होंने बताया कि थावे की एक लड़की की शादी बरौली के बड़ा बड़ेया निवासी किशोर सिंह से हुई थी। उसकी मौत के बाद दहेज हत्या का मामला दर्ज किया गया था। विचारण के दौरान, माननीय न्यायालय ने इस केस को असत्य पाया और अभियुक्त पति किशोर सिंह को बाइज्जत बरी कर दिया। गोपालगंज जिले के व्यवहार न्यायालय के एडीजे 12 की अदालत ने दहेज हत्या के एक मामले में पति को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। यह फैसला शुक्रवार को सुनाया गया। ये मामला दहेज प्रताड़ना और विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत से संबंधित था। मृतका के परिजनों ने आरोप लगाया था कि शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष द्वारा दहेज की मांग को लेकर उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। मायके वालों ने FIR की थी दर्ज इस संबंध में मृतका के मायके वालों ने स्थानीय थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें पति समेत कुल सात लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया था। पुलिस जांच में तीन लोगों के खिलाफ मामला सत्य पाया गया था, जिनमें पति भी शामिल था। पुलिस ने पति को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा था और न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की थी। चार अन्य लोगों के खिलाफ पुलिस का पूरक अनुसंधान अभी जारी है। मामले की सुनवाई के दौरान, अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत गवाहों और सबूतों का गहन अध्ययन किया। बचाव पक्ष के वकीलों ने तर्क दिया कि आरोपी पति के खिलाफ दहेज हत्या के सीधे साक्ष्य उपलब्ध नहीं थे। उन्होंने बताया कि गवाहों के बयानों में विरोधाभास था और पोस्टमार्टम रिपोर्ट सहित अन्य फोरेंसिक साक्ष्य यह साबित करने में विफल रहे कि मौत में पति की सीधी भूमिका थी। सबूतों के अभाव में पति बरी इन दलीलों और सबूतों के अभाव को देखते हुए, एडीजे 12 की अदालत ने पति को निर्दोष मानते हुए बाइज्जत बरी कर दिया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता राजेश पाठक ने बताया कि यह मामला बरौली थाना कांड संख्या 163/24 के तहत दर्ज किया गया था। उन्होंने बताया कि थावे की एक लड़की की शादी बरौली के बड़ा बड़ेया निवासी किशोर सिंह से हुई थी। उसकी मौत के बाद दहेज हत्या का मामला दर्ज किया गया था। विचारण के दौरान, माननीय न्यायालय ने इस केस को असत्य पाया और अभियुक्त पति किशोर सिंह को बाइज्जत बरी कर दिया।  

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