कटिहार के हसनगंज प्रखंड में शनिवार को सावित्री बाई फुले जयंती मनाई गई। इस अवसर पर जन जागरण शक्ति संगठन ने एक जन-जागरूकता रैली और कार्यक्रम का आयोजन किया। रैली बलुआ पंचायत भवन से शुरू हुई और छोटकी रटनी, डीह रटनी तथा बड़की रटनी गांवों से होते हुए छोटकी रटनी गांव में एक सभा में परिवर्तित हो गई। इस रैली में शहरपुरा, पनसेरवा, बरुवा टोला, भतौरिया, छोटकी रटनी, बड़की रटनी और डीह रटनी सहित कई गांवों से युवा क्लबों के सैकड़ों बच्चों और महिलाओं ने भाग लिया। पदयात्रा के दौरान प्रतिभागियों ने गीत-संगीत और नारों के जरिए शिक्षा तथा सामाजिक जागरूकता का संदेश दिया। सावित्री बाई फुले थीं देश की पहली महिला शिक्षिका सभा को संबोधित करते हुए फूलकुमारी दीदी ने सावित्री बाई फुले के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि सावित्री बाई फुले देश की पहली महिला शिक्षिका और महान समाज सुधारक थीं, जिन्होंने भारत में महिलाओं के लिए पहला स्कूल खोलकर शिक्षा की नींव रखी। उनके प्रयासों के कारण ही आज देश की बेटियां डॉक्टर, इंजीनियर और पायलट जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर रही हैं। शिक्षा ही महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाती उषा दीदी ने अपने संबोधन में कहा कि महिलाओं के लिए शिक्षा का मार्ग प्रशस्त होने से समाज की आधी आबादी को आगे बढ़ने का अवसर मिला है। उन्होंने जोर दिया कि शिक्षा ही महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाती है। उषा दीदी ने एक गीत के माध्यम से सभी से पढ़ने और जीवन में आगे बढ़ने की अपील की। कार्यक्रम के दौरान युवा टीम ने “हम लोग हैं दीवाने” और “हम होंगे कामयाब” जैसे प्रेरक गीत प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का समापन राष्ट्र और समाज के प्रति समर्पण की भावना के साथ हुआ। इस अवसर पर स्थानीय कार्यकर्ता फूलकुमारी, उषा दीदी, लक्ष्मीकांत प्रसाद और साहिल सहित युवा टीम के सदस्य आरती, प्रियंका, सुनील, चाँद, माला, सबरी, योगिता, ज्योति, खुशबू तथा सैकड़ों अन्य बच्चे और महिलाएं उपस्थित रहे। कटिहार के हसनगंज प्रखंड में शनिवार को सावित्री बाई फुले जयंती मनाई गई। इस अवसर पर जन जागरण शक्ति संगठन ने एक जन-जागरूकता रैली और कार्यक्रम का आयोजन किया। रैली बलुआ पंचायत भवन से शुरू हुई और छोटकी रटनी, डीह रटनी तथा बड़की रटनी गांवों से होते हुए छोटकी रटनी गांव में एक सभा में परिवर्तित हो गई। इस रैली में शहरपुरा, पनसेरवा, बरुवा टोला, भतौरिया, छोटकी रटनी, बड़की रटनी और डीह रटनी सहित कई गांवों से युवा क्लबों के सैकड़ों बच्चों और महिलाओं ने भाग लिया। पदयात्रा के दौरान प्रतिभागियों ने गीत-संगीत और नारों के जरिए शिक्षा तथा सामाजिक जागरूकता का संदेश दिया। सावित्री बाई फुले थीं देश की पहली महिला शिक्षिका सभा को संबोधित करते हुए फूलकुमारी दीदी ने सावित्री बाई फुले के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि सावित्री बाई फुले देश की पहली महिला शिक्षिका और महान समाज सुधारक थीं, जिन्होंने भारत में महिलाओं के लिए पहला स्कूल खोलकर शिक्षा की नींव रखी। उनके प्रयासों के कारण ही आज देश की बेटियां डॉक्टर, इंजीनियर और पायलट जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर रही हैं। शिक्षा ही महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाती उषा दीदी ने अपने संबोधन में कहा कि महिलाओं के लिए शिक्षा का मार्ग प्रशस्त होने से समाज की आधी आबादी को आगे बढ़ने का अवसर मिला है। उन्होंने जोर दिया कि शिक्षा ही महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाती है। उषा दीदी ने एक गीत के माध्यम से सभी से पढ़ने और जीवन में आगे बढ़ने की अपील की। कार्यक्रम के दौरान युवा टीम ने “हम लोग हैं दीवाने” और “हम होंगे कामयाब” जैसे प्रेरक गीत प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का समापन राष्ट्र और समाज के प्रति समर्पण की भावना के साथ हुआ। इस अवसर पर स्थानीय कार्यकर्ता फूलकुमारी, उषा दीदी, लक्ष्मीकांत प्रसाद और साहिल सहित युवा टीम के सदस्य आरती, प्रियंका, सुनील, चाँद, माला, सबरी, योगिता, ज्योति, खुशबू तथा सैकड़ों अन्य बच्चे और महिलाएं उपस्थित रहे।


