प्रयागराज में यूजीसी एक्ट 2026 की बहाली और शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव के विरोध में बड़ा जनाक्रोश देखने को मिला। ‘यूजीसी एक्ट 2026 बचाओ समता आंदोलन’ के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर शहर के बैंक रोड से जिलाधिकारी कार्यालय तक एक विशाल प्रतिरोध मार्च निकाला गया। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे डॉ. कमल उसरी ने मार्च को संबोधित करते हुए कहा कि यह कानून रोहित वेमुला, पायल तड़वी और दर्शन सोलंकी जैसे हजारों छात्रों की शहादत और उनके परिवारों के लंबे कानूनी संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और सर्वदलीय संसदीय कमेटी के सुझावों पर बने इस कानून को केंद्र सरकार की कमजोर पैरवी के कारण स्थगित किया गया है।
प्रो. विक्रम और अन्य वक्ताओं ने यूजीसी एक्ट के विरोधियों पर ‘जातिवादी मानसिकता’ से ग्रसित होने का आरोप लगाया। उन्होंने संकल्प लिया कि जब तक यह एक्ट पूरी तरह बहाल नहीं हो जाता, लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रहेगा। मार्च में ननकू राम धुरिया, आलोक अम्बेडकर, अधिवक्ता धीरेंद्र यादव सहित बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न छात्र संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। कई राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने अपनी पार्टी के रुख से हटकर इस आंदोलन को समर्थन दिया। एससी/एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यक समाज के विभिन्न संगठनों ने एकजुट होकर शक्ति प्रदर्शन किया। आंदोलनकारियों ने घोषणा की कि 19 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने तक सेमिनार, गोष्ठियां और धरने प्रदर्शन लगातार जारी रहेंगे। मार्च का संचालन डॉ. कमल उसरी ने किया, जबकि अध्यक्षता ननकू राम धुरिया ने की। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह लड़ाई अब केवल प्रयागराज तक सीमित नहीं, बल्कि एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन का रूप ले चुकी है।


