औरंगाबाद जिले के अंबा विशुनपुर गांव में नवनिर्मित देवी मंदिर में ग्राम देवी की प्राण प्रतिष्ठा सह सत्यचंडी महायज्ञ का आयोजन हो रहा है। जिसकी शुरुआत शनिवार को भव्य कलश यात्रा के साथ हुई। लगभग पांच किलोमीटर लंबी इस शोभा यात्रा में सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। मंदिर परिसर से आचार्य पंडित अरुण कुमार मिश्रा के नेतृत्व में वैदिक मंत्रोच्चार और विधिवत पूजा-अर्चना के बाद कलश यात्रा निकाली गई। इस यात्रा में करीब 500 महिला-पुरुष श्रद्धालुओं ने कलश धारण किया। हाथी-घोड़े और पारंपरिक गाजे-बाजे के साथ निकली शोभा यात्रा आकर्षण का केंद्र बनी रही। जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। कलश यात्रा मंदिर से निकलकर कुटुंबा थाना मोड़ और तमसी मोड़ होते हुए लगभग 5 किलोमीटर दूरी तय कर झिकटिया पोखर तक पहुंची। वहां आचार्यों ने विधिवत गंगा पूजन कराया। मुख्य यजमान भोला मेहता और दीपक गुप्ता ने सप्तनिक जल उठाया, जिसके बाद अन्य श्रद्धालुओं ने अपने-अपने कलश में जल भरा। इसके बाद श्रद्धालु पैदल ही मंदिर परिसर लौटे, जहां वैदिक रीति से कलश स्थापना और पंचांग पूजन किया गया। इंदु शास्त्री और रेनू शास्त्री का प्रवचन आचार्य अरुण मिश्रा ने बताया कि 22 फरवरी को अग्नि स्थापना और वेदी पूजन होगा। 26 फरवरी को ग्राम देवी की प्राण प्रतिष्ठा और 27 फरवरी को पूर्णाहुति एवं भंडारे का आयोजन किया जाएगा। प्रतिदिन संध्या में प्रसिद्ध कथावाचक इंदु शास्त्री और रेनू शास्त्री का कथा वाचन होगा। ग्रामीणों ने बताया कि मंदिर का निर्माण जनसहयोग से कराया गया है। आयोजन समिति के सदस्य ऋषि गुप्ता, विनोद मेहता, पूर्व मुखिया कुमारी सावित्री सिंह, शंभू प्रसाद, दीपक गुप्ता और राम साव सहित कई लोग आयोजन को सफल बनाने में जुटे हैं। लक्ष्मी नारायण महायज्ञ का आयोजन इसके अलावा अंबा शाही गांव में राधा-कृष्ण और बजरंगबली की प्रतिमा स्थापना को लेकर श्री श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ का आयोजन किया गया है। श्री श्री मौनी बाबा के सानिध्य और आचार्य कृष्ण देव रामानुज वैष्णो दास के नेतृत्व में मंदिर परिसर से भव्य कलश यात्रा निकाली गई। इस यात्रा में लगभग 1000 श्रद्धालु शामिल हुए। गाजे-बाजे के साथ निकली कलश यात्रा गांव का भ्रमण करते हुए गोवास स्थित खैरो पोखर पहुंची। वहां गंगा पूजन के बाद श्रद्धालुओं ने अपने कलश में जल भरा। आयोजन समिति के अध्यक्ष शिवपूजन यादव ने बताया कि मंदिर का निर्माण ग्रामीणों के सहयोग से हुआ है और अब विधिवत प्राण प्रतिष्ठा की जा रही है। भव्य भंडारे का होगा आयोजन कार्यक्रम के अनुसार 22 फरवरी को मंडप प्रवेश एवं अग्नि मंथन, 23 फरवरी को मंडप पूजा-अन्नाधिवास, 24 फरवरी को प्रतिमाओं का नगर भ्रमण, 25 फरवरी को न्यासवास और 26 फरवरी को प्राण प्रतिष्ठा के साथ महायज्ञ की पूर्णाहुति होगी। हवन के बाद भव्य भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें आसपास के गांवों के सैकड़ों श्रद्धालु शामिल होंगे। वृंदावन के कलाकारों के द्वारा रामलीला का मंचन आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि यज्ञ के दौरान पूज्य दीदी प्रेमा राखी का प्रवचन होगा। साथ ही रात्रि में वृंदावन की टीम द्वारा रामलीला का मंचन भी किया जाएगा। समिति के सदस्य अमोद कुमार, कपिल देव यादव, तपेश्वर यादव, सनोज यादव, रंजन कुमार, अरविंद कुमार और शंकर कुमार सहित अन्य ग्रामीण व्यवस्था में जुटे हैं। दोनों गांवों में चल रहे धार्मिक अनुष्ठानों को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। आसपास के गांवों के लोग भी बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं। पांच किलोमीटर लंबी कलश यात्रा और सैकड़ों-हजारों श्रद्धालुओं की भागीदारी ने यह साबित कर दिया कि ग्रामीण अंचल में आस्था और परंपरा की जड़ें आज भी बेहद मजबूत हैं। औरंगाबाद जिले के अंबा विशुनपुर गांव में नवनिर्मित देवी मंदिर में ग्राम देवी की प्राण प्रतिष्ठा सह सत्यचंडी महायज्ञ का आयोजन हो रहा है। जिसकी शुरुआत शनिवार को भव्य कलश यात्रा के साथ हुई। लगभग पांच किलोमीटर लंबी इस शोभा यात्रा में सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। मंदिर परिसर से आचार्य पंडित अरुण कुमार मिश्रा के नेतृत्व में वैदिक मंत्रोच्चार और विधिवत पूजा-अर्चना के बाद कलश यात्रा निकाली गई। इस यात्रा में करीब 500 महिला-पुरुष श्रद्धालुओं ने कलश धारण किया। हाथी-घोड़े और पारंपरिक गाजे-बाजे के साथ निकली शोभा यात्रा आकर्षण का केंद्र बनी रही। जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। कलश यात्रा मंदिर से निकलकर कुटुंबा थाना मोड़ और तमसी मोड़ होते हुए लगभग 5 किलोमीटर दूरी तय कर झिकटिया पोखर तक पहुंची। वहां आचार्यों ने विधिवत गंगा पूजन कराया। मुख्य यजमान भोला मेहता और दीपक गुप्ता ने सप्तनिक जल उठाया, जिसके बाद अन्य श्रद्धालुओं ने अपने-अपने कलश में जल भरा। इसके बाद श्रद्धालु पैदल ही मंदिर परिसर लौटे, जहां वैदिक रीति से कलश स्थापना और पंचांग पूजन किया गया। इंदु शास्त्री और रेनू शास्त्री का प्रवचन आचार्य अरुण मिश्रा ने बताया कि 22 फरवरी को अग्नि स्थापना और वेदी पूजन होगा। 26 फरवरी को ग्राम देवी की प्राण प्रतिष्ठा और 27 फरवरी को पूर्णाहुति एवं भंडारे का आयोजन किया जाएगा। प्रतिदिन संध्या में प्रसिद्ध कथावाचक इंदु शास्त्री और रेनू शास्त्री का कथा वाचन होगा। ग्रामीणों ने बताया कि मंदिर का निर्माण जनसहयोग से कराया गया है। आयोजन समिति के सदस्य ऋषि गुप्ता, विनोद मेहता, पूर्व मुखिया कुमारी सावित्री सिंह, शंभू प्रसाद, दीपक गुप्ता और राम साव सहित कई लोग आयोजन को सफल बनाने में जुटे हैं। लक्ष्मी नारायण महायज्ञ का आयोजन इसके अलावा अंबा शाही गांव में राधा-कृष्ण और बजरंगबली की प्रतिमा स्थापना को लेकर श्री श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ का आयोजन किया गया है। श्री श्री मौनी बाबा के सानिध्य और आचार्य कृष्ण देव रामानुज वैष्णो दास के नेतृत्व में मंदिर परिसर से भव्य कलश यात्रा निकाली गई। इस यात्रा में लगभग 1000 श्रद्धालु शामिल हुए। गाजे-बाजे के साथ निकली कलश यात्रा गांव का भ्रमण करते हुए गोवास स्थित खैरो पोखर पहुंची। वहां गंगा पूजन के बाद श्रद्धालुओं ने अपने कलश में जल भरा। आयोजन समिति के अध्यक्ष शिवपूजन यादव ने बताया कि मंदिर का निर्माण ग्रामीणों के सहयोग से हुआ है और अब विधिवत प्राण प्रतिष्ठा की जा रही है। भव्य भंडारे का होगा आयोजन कार्यक्रम के अनुसार 22 फरवरी को मंडप प्रवेश एवं अग्नि मंथन, 23 फरवरी को मंडप पूजा-अन्नाधिवास, 24 फरवरी को प्रतिमाओं का नगर भ्रमण, 25 फरवरी को न्यासवास और 26 फरवरी को प्राण प्रतिष्ठा के साथ महायज्ञ की पूर्णाहुति होगी। हवन के बाद भव्य भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें आसपास के गांवों के सैकड़ों श्रद्धालु शामिल होंगे। वृंदावन के कलाकारों के द्वारा रामलीला का मंचन आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि यज्ञ के दौरान पूज्य दीदी प्रेमा राखी का प्रवचन होगा। साथ ही रात्रि में वृंदावन की टीम द्वारा रामलीला का मंचन भी किया जाएगा। समिति के सदस्य अमोद कुमार, कपिल देव यादव, तपेश्वर यादव, सनोज यादव, रंजन कुमार, अरविंद कुमार और शंकर कुमार सहित अन्य ग्रामीण व्यवस्था में जुटे हैं। दोनों गांवों में चल रहे धार्मिक अनुष्ठानों को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। आसपास के गांवों के लोग भी बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं। पांच किलोमीटर लंबी कलश यात्रा और सैकड़ों-हजारों श्रद्धालुओं की भागीदारी ने यह साबित कर दिया कि ग्रामीण अंचल में आस्था और परंपरा की जड़ें आज भी बेहद मजबूत हैं।


