US-Iran War Update: 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए इस महायुद्ध में जहां अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर एक साथ मिलकर हमला किया, वहीं ईरान ने भी इसका जोरदार जवाब दिया है। अब इस जंग के 35 दिनों बाद पहली बार अमेरिका को हुए नुकसान के आंकड़े सामने आए हैं, जिसने सबका ध्यान खींच लिया है।
पेंटागन के मुताबिक, ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत अब तक 13 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है, जबकि 365 जवान घायल हुए हैं। ये आंकड़े रक्षा विभाग के डिफेंस कैजुएल्टी एनालिसिस सिस्टम (DCAS) में दर्ज किए गए हैं, जिससे इनकी आधिकारिक पुष्टि हो गई है।
डीसीएएस में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक, घायल सैनिक विभिन्न सैन्य शाखाओं से हैं। इनमें सबसे अधिक 247 सैनिक अमेरिकी थलसेना (आर्मी) से हैं, जबकि नौसेना (नेवी) के 63, वायु सेना (एयर फोर्स) के 36 और मरीन कॉर्प्स के 19 जवान घायल हुए हैं।
आधिकारिक आंकड़ों के जारी होने से इस संघर्ष की वास्तविक गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। अब तक हताहतों के बारे में केवल अनुमान ही लगाए जा रहे थे, लेकिन पेंटागन द्वारा पुष्टि के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट हो गई है।
डीसीएएस क्या है? इसे भी समझे…
दरअसल, डीसीएएस (DCAS) एक ऐसा सिस्टम है, जिसे डिफेंस मैनपावर डेटा सेंटर संभालता है। इसका काम अमेरिकी रक्षा विभाग के लिए सैनिकों से जुड़ी सही और पक्की जानकारी देना है। इसमें उन सभी सैनिकों का रिकॉर्ड रखा जाता है जो किसी सैन्य अभियान में मारे गए, घायल हुए, लापता हैं या किसी तरह चोटिल हुए हैं।
यह सिस्टम अलग-अलग सैन्य विभागों से मिली रिपोर्ट को इकट्ठा करता है, ताकि जो आंकड़े जनता के सामने आएं, वे पूरी तरह सही और भरोसेमंद हों।
इस डेटाबेस में युद्ध, सेना की शाखा, नुकसान के प्रकार और साल के हिसाब से पूरी जानकारी मिलती है। साथ ही, इसमें जरूरी समझाने वाली जानकारी और नोट्स भी दिए जाते हैं, जिससे डेटा को समझना आसान हो जाता है।
इकनॉमिक दृष्टि से अमेरिका को कितना नुकसान?
एक्सपर्ट्स और BBC की रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के शुरुआती 2 हफ्तों में ही अमेरिका के सैन्य ठिकानों और हथियारों को करीब 800 मिलियन डॉलर (लगभग 7,360 करोड़ रुपये) का नुकसान हुआ। आगे चलकर यह नुकसान बढ़कर लगभग 2.9 बिलियन डॉलर (करीब 26,680 करोड़ रुपये) तक पहुंच सकता है।
इस पूरे संघर्ष में ईरान का सबसे बड़ा हथियार होर्मुज स्ट्रेट को बंद करना रहा। इसके बंद होते ही कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई। अमेरिकी सीनेटर क्रिस मर्फी के मुताबिक, इस रास्ते को फिर से खोलने के लिए अमेरिका को हर दिन करीब 2 बिलियन डॉलर (लगभग 18,400 करोड़ रुपये) खर्च करने पड़ रहे हैं।


