Moscow-Tehran Intelligence Sharing: ईरान अब अमेरिका के सैन्य अड्डों पर सटीक हमले कर रहा है। इसका सबसे ताजा उदाहरण है, रविवार को कुवैत में हुए छह US सैनिक की मौत और कई दूसरे घायल हो गए। अब ऐसे में ये उठ रहा है कि आखिर ईरानी सेना को अमेरिकी फोर्स की इतनी सटीक लोकेशन कैसे मिल रही है? क्या कोई बड़ा देश पर्दे के पीछे से तेहरान की मदद कर रहा है?
एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मॉस्को (रूस), तेहरान को मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी वॉरशिप, एयरक्राफ्ट और दूसरे मिलिट्री एसेट्स की रियल-टाइम जानकारी दे रहा है। अगर ये दावा सच है, तो इसका मतलब है कि यह संघर्ष सिर्फ ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें एक और ताकत भी जुड़ गया है।
ईरान के पास अपना सैटेलाइट ग्रुप नहीं…फिर भी सटीक हमले
‘द वाशिंगटन पोस्ट’ के अनुसार, इस पूरे मामले पर एक अधिकारी और विशेषज्ञों ने बताया कि रूस की मदद कितनी गहरी है, यह अभी पूरी तरह साफ नहीं है। हालांकि यह जरूर माना जा रहा है कि लड़ाई के शुरुआती दिनों में ईरान की अमेरिकी सेना को ट्रैक करने की क्षमता कम हो गई थी और अगर रूस खुफिया जानकारी दे रहा है, तो इससे समझ आता है कि ईरान के कुछ हमले इतने सटीक कैसे हो रहे हैं। संघर्ष शुरू होने के बाद ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों, दूतावासों और अन्य टारगेट पर हजारों ड्रोन और सैकड़ों मिसाइलें दागी हैं।
रूस के सैन्य मामलों के विशेषज्ञ दारा मैसिकॉट के अनुसार, ईरान खास तौर पर रडार सिस्टम और कमांड-कंट्रोल जैसे अहम ठिकानों को निशाना बना रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि रूस की एडवांस सैटेलाइट तकनीक से ईरान की टारगेटिंग क्षमता बेहतर हो सकती है, क्योंकि ईरान के पास खुद इतने मिलिट्री सैटेलाइट नहीं हैं। इसलिए रूस से मिली तस्वीरें और जानकारी ईरान के लिए काफी अहम साबित हो सकती हैं।
ईरान-अमेरिका युद्ध में रूस का स्टैंड
ईरान-अमेरिका युद्ध में रूस ने खुलकर लड़ाई खत्म करने की बात कही है और इसे बिना उकसावे का सशस्त्र हमला बताया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर रूस और ईरान के बीच खुफिया जानकारी साझा हो रही है, तो यह अमेरिका के विरोधी देशों के बीच बढ़ते सहयोग को भी दिखाता है। यूक्रेन युद्ध के दौरान ईरान, चीन और नॉर्थ कोरिया जैसे देशों ने अलग-अलग तरीकों से रूस की मदद की है। वहीं दूसरी तरफ अमेरिका ने यूक्रेन को हथियार और खुफिया जानकारी देकर रूस के खिलाफ उसकी मदद की है।
ईरान इस युद्ध में रूस का अहम सहयोगी रहा है। उसने कम लागत वाले अटैक ड्रोन की तकनीक दी, जिनका इस्तेमाल रूस ने यूक्रेन के शहरों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों में किया। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि रूस के सीधे इस संघर्ष में कूदने की संभावना कम है, क्योंकि फिलहाल उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता यूक्रेन युद्ध ही है।


