पूरी दुनिया अब तक यह मान रही थी कि अमेरिका और इजराइल से टकराव के बाद ईरान का तेल कारोबार चौपट हो जाएगा, लेकिन ईरान ने अब एक हैरान करने वाली खबर दी है।
ईरानी संसद की ऊर्जा समिति के प्रमुख मौसा अहमदी ने कहा है कि खार्ग द्वीप से तेल निर्यात घटा नहीं बल्कि पिछले कुछ दिनों में बढ़ा है।
खार्ग द्वीप है क्या और यह इतना जरूरी क्यों?
खार्ग एक छोटा सा द्वीप है जो ईरान के दक्षिणी तट से करीब 55 किलोमीटर दूर फारस की खाड़ी में है। आकार में यह मैनहैटन के एक तिहाई जितना है लेकिन इसकी अहमियत किसी बड़े शहर से कम नहीं।
अमेरिकी बैंक जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान का करीब 90 फीसदी कच्चा तेल इसी द्वीप से निर्यात होता है। इसीलिए इसे ईरान की आर्थिक जीवनरेखा कहते हैं। युद्ध के बीच ईरान इसी रास्ते से अपना तेल पूरी दुनिया में भेजता रहा है।
कितना गहरा खार्ग?
खार्ग की एक खास बात यह है कि यह कोरल द्वीप है और इसके आसपास समुद्र की गहराई बहुत ज्यादा है। इसका फायदा यह है कि दुनिया के सबसे विशाल तेल टैंकर भी यहां आसानी से लंगर डाल सकते हैं।
यही वजह है कि 20वीं सदी के मध्य में ईरान ने इसे बड़े तेल निर्यात टर्मिनल के रूप में विकसित किया। देश के कई तेल क्षेत्रों से पाइपलाइन के जरिए कच्चा तेल यहां आता है और फिर टैंकरों से पूरी दुनिया में भेजा जाता है।
जंग में इसे निशाना बनाने की बात हो रही थी
जब से खाड़ी में तनाव बढ़ा है तब से यह डर था कि खार्ग द्वीप पर हमला हो सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने तो यहां तक कह दिया था कि वे इस द्वीप पर कब्जा करना चाहते हैं।
अगर ऐसा होता तो दुनिया की तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ता और तेल की कीमतें आसमान छू लेतीं। इसी डर से अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल मची हुई थी।
ईरान का दावा, सब ठीक चल रहा है
अब ईरानी संसद की ऊर्जा समिति के प्रमुख ने खार्ग का दौरा करने के बाद कहा है कि हालात सामान्य हैं। उन्होंने साफ कहा कि पिछले कुछ दिनों में तेल निर्यात में न सिर्फ कोई कमी आई है बल्कि इसमें बढ़ोतरी हुई है। यह बयान ऐसे वक्त आया है जब दुनिया भर में यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि ईरान का तेल कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो गया है।
दुनिया के लिए राहत की खबर, तेल बाजार को मिली थोड़ी सांस
ईरान के इस दावे से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार को कुछ राहत मिल सकती है। जब भी खाड़ी में तनाव बढ़ता है तो तेल की कीमतें ऊपर जाती हैं और इसका असर भारत जैसे देशों पर सीधे पड़ता है जो बड़े पैमाने पर तेल आयात करते हैं।
अगर खार्ग से आपूर्ति जारी रही तो कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी उछाल को रोका जा सकता है। हालांकि खाड़ी में स्थिति अभी भी नाजुक है और आने वाले दिनों में क्या होगा यह कोई नहीं जानता।


