आमिर कैसे बने पैरा क्रिकेटर, लुधियाना में सुनाई कहानी:दोनों हाथ नहीं, फिर भी बैटिंग-बॉलिंग में माहिर; सचिन तेंदुलकर के साथ खेल चुके

पंजाब के लुधियाना में पैरा क्रिकेट टीम के ट्रायल करवाए गए। ट्रायल में हिस्सा लेने के लिए नए पैरा क्रिकेटर पहुंचे तो उनका हौसला बढ़ाने के लिए देश के बड़े पैरा क्रिकेटर आमिर हुसैन लोन भी लुधियाना आए। आमिर ने युवा पैरा क्रिकेटरों को प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि उनके दोनों हाथ नहीं हैं। लेकिन वह बैटिंग और बॉलिंग पूरे फ्लो के साथ करते हैं। आमिर अपने संघर्ष की कहानी सुनाते सुनाते भावुक हुए। उन्होंने युवा पैरा क्रिकेटर्स को कहा कि एक ओवर में छह गेंद होती हैं, अगर पांच गेंद डॉट भी चले जाएं तो छठी गेंद पर छक्का मारकर गेम बदला जा सकता है। इसलिए अपने दिव्यांग होने पर परेशान न हों। ओवर की आखिरी गेंद पर छक्का मारने का दम पैदा करो। आमिर हुसैन लोन 2013 में ग्रेजुएशन कर रहे थे तो उस समय उनका सिलेक्शन पैरा क्रिकेट टीम में हुआ। फिर उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी। अब उन्होंने दोबारा पढ़ाई शुरू की है और चंडीगढ़ के आर्यन ग्रुप ऑफ कॉलेज से ग्रेजुएशन कर रहे हैं। आमिर हुसैन लोन जम्मू कश्मीर के अनंतनाग के रहने वाले हैं। वह जम्मू कश्मीर पैरा क्रिकेट टीम के कप्तान हैं। यही नहीं लोन जम्मू कश्मीर में अडानी फाउंडेशन की मदद से पैरा क्रिकेट अकादमी चलाते हैं और दिव्यांगों को क्रिकेटर बना रहे हैं। उनके फेसबुक पर 82 हजार और इंस्टाग्राम पर 1.10 लाख फॉलोअर्स हैं। आमिर हुसैन लोन ने सुनाई दोनों हाथ कटने से पैरा क्रिकेटर बनने की कहानी…

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