‘राज्यसभा चुनाव में हॉर्स ट्रेडिंग हुई…मुझे भी ऑफर मिला था’:कांग्रेस विधायक का खुलासा- बीजेपी का यह कल्चर है, मैंने पार्टी के प्रति अपना सिद्धांत नहीं छोड़ा

‘राज्यसभा चुनाव में हॉर्स ट्रेडिंग हुई…मुझे भी ऑफर मिला था’:कांग्रेस विधायक का खुलासा- बीजेपी का यह कल्चर है, मैंने पार्टी के प्रति अपना सिद्धांत नहीं छोड़ा

राज्यसभा चुनाव में बिहार की राजनीति में कांग्रेस को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस के 3 विधायक महागठबंधन के प्रत्याशी को वोट देने नहीं पहुंचे थे। अगले दिन तीनों ने अपनी-अपनी बातें रखी। वोटिंग के दौरान उपस्थित नहीं होने का कारण भी बताया। इस बीच चनपटिया से कांग्रेस विधायक अभिषेक रंजन ने दैनिक भास्कर से बातचीत में स्वीकार किया कि उन्हें बीजेपी से ऑफर मिला था, लेकिन उन्होंने कांग्रेस पार्टी और सिद्धांत को प्राथमिकता दी। कांग्रेस विधायक अभिषेक रंजन ने राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग को लेकर और क्या खुलासे किया? जानने के लिए पढ़िए दैनिक भास्कर से खास बातचीत… सवाल: राज्यसभा चुनाव में आपके दल के तीन विधायक वोटिंग में नहीं पहुंचे थे। क्या आपको भी किसी तरह का ऑफर मिला था? जवाब: राजनीति में जोड़ तोड़ का खेल चलता रहता है। हमें पहले से अंदेशा था कि संख्या पूरी करने के लिए कोशिश होगी। मुझे भी ऑफर मिला था, लेकिन यह सिर्फ ऑफर का मामला नहीं था, यह सिद्धांत का सवाल था। मैं अपनी पार्टी की विचारधारा और संविधान बचाने की लड़ाई के साथ खड़ा हूं। सवाल: चुनाव के दौरान क्या किसी तरह का दबाव या प्रलोभन दिया गया? जवाब: चुनाव जीतना ही सब कुछ नहीं होता, बल्कि कैसे जीता जाता है, यह ज्यादा महत्वपूर्ण है। नीतीश जी पूरे होशोहवास में थे, तो उन्होंने कभी बिहार में राज्यसभा का चुनाव नहीं होने दिया, क्योंकि वो जानते थे कि जब चुनाव होगा तो हॉर्स ट्रेडिंग होगी। बीजेपी का यह कल्चर बन चुका है। आज जो माहौल बना है, उसमें हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका साफ दिखती है। विधायकों को अनुपस्थित रहने के लिए भी प्रलोभन दिए जा रहे हैं। ऐसा हो सकता है कि उन पर किसी तरह का दबाव हो। मुझे इसकी विशेष जानकारी नहीं है। तीनों हमारे पार्टी के विधायक ही रहे हैं। अनुपस्थित रहने के पीछे उनकी क्या मजबूरी रही, इसका जवाब वही बेहतर दे सकते हैं। सवाल: आपकी पार्टी के कुछ विधायकों ने उम्मीदवार को लेकर असहमति जताई थी। वह मुकेश सहनी या हिना शहाब को उम्मीदवार बनाना चाहते थे। इस पर क्या कहेंगे? जवाब: कभी-कभी परिवार को एकजुट रखने के लिए विष का घूंट भी पीना पड़ता है। पांचों उंगलियां बराबर नहीं होती है। अगर लीडरशिप का आदेश था कि महागठबंधन के प्रत्याशी को अपना मत प्रदान करना है, तो उस आदेश से बड़ा कुछ भी नहीं है। वो विपक्ष के प्रत्याशी थे और विपक्ष की संख्या वैसे भी कमजोर है। ऐसे में एक सीट जीतने से कुछ बड़ा नहीं हो जाता।
सवाल: पार्टी के अंदर अलग-अलग बयान सामने आ रहे हैं। विधायक मनोज विश्वास ने कहा है कि प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने स्वतंत्रता से वोट देने की बात कही थी। इस पर आप क्या कहेंगे? जवाब: उन्होंने हो सकता है विधायक से पर्सनली बात की हो। मुझे इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। तेजस्वी और राहुल गांधी के साथ जो मीटिंग हुई थी, उसके बाद यही मैसेज दिया किया गया कि हमें महागठबंधन के प्रत्याशी के साथ रहना है और उनकी मदद करनी है। सवाल: क्या भविष्य में पार्टी छोड़ने की कोई संभावना है या कांग्रेस में ही बने रहना है? जवाब: मैं यूथ कांग्रेस से राजनीति में आया हूं और पार्टी ने मुझे पहचान दी है। मेरे लिए कांग्रेस सिर्फ एक पार्टी नहीं, बल्कि विचारधारा है। कहीं जाने का कोई सवाल ही नहीं है। राजनीति में कुछ भी स्थायी नहीं होता, लेकिन मैं स्पष्ट कहना चाहता हूं कि मैं पार्टी के साथ ईमानदारी से खड़ा हूं और अपना कार्यकाल कांग्रेस के साथ ही पूरा करूंगा। अगर मुझे पार्टी से कभी जाना भी होगा, तो पूरे मान सम्मान के साथ जाऊंगा। ऐसा कोई नहीं कह सकता है कि मैंने पार्टी के साथ कभी गद्दारी की है। राज्यसभा चुनाव में बिहार की राजनीति में कांग्रेस को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस के 3 विधायक महागठबंधन के प्रत्याशी को वोट देने नहीं पहुंचे थे। अगले दिन तीनों ने अपनी-अपनी बातें रखी। वोटिंग के दौरान उपस्थित नहीं होने का कारण भी बताया। इस बीच चनपटिया से कांग्रेस विधायक अभिषेक रंजन ने दैनिक भास्कर से बातचीत में स्वीकार किया कि उन्हें बीजेपी से ऑफर मिला था, लेकिन उन्होंने कांग्रेस पार्टी और सिद्धांत को प्राथमिकता दी। कांग्रेस विधायक अभिषेक रंजन ने राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग को लेकर और क्या खुलासे किया? जानने के लिए पढ़िए दैनिक भास्कर से खास बातचीत… सवाल: राज्यसभा चुनाव में आपके दल के तीन विधायक वोटिंग में नहीं पहुंचे थे। क्या आपको भी किसी तरह का ऑफर मिला था? जवाब: राजनीति में जोड़ तोड़ का खेल चलता रहता है। हमें पहले से अंदेशा था कि संख्या पूरी करने के लिए कोशिश होगी। मुझे भी ऑफर मिला था, लेकिन यह सिर्फ ऑफर का मामला नहीं था, यह सिद्धांत का सवाल था। मैं अपनी पार्टी की विचारधारा और संविधान बचाने की लड़ाई के साथ खड़ा हूं। सवाल: चुनाव के दौरान क्या किसी तरह का दबाव या प्रलोभन दिया गया? जवाब: चुनाव जीतना ही सब कुछ नहीं होता, बल्कि कैसे जीता जाता है, यह ज्यादा महत्वपूर्ण है। नीतीश जी पूरे होशोहवास में थे, तो उन्होंने कभी बिहार में राज्यसभा का चुनाव नहीं होने दिया, क्योंकि वो जानते थे कि जब चुनाव होगा तो हॉर्स ट्रेडिंग होगी। बीजेपी का यह कल्चर बन चुका है। आज जो माहौल बना है, उसमें हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका साफ दिखती है। विधायकों को अनुपस्थित रहने के लिए भी प्रलोभन दिए जा रहे हैं। ऐसा हो सकता है कि उन पर किसी तरह का दबाव हो। मुझे इसकी विशेष जानकारी नहीं है। तीनों हमारे पार्टी के विधायक ही रहे हैं। अनुपस्थित रहने के पीछे उनकी क्या मजबूरी रही, इसका जवाब वही बेहतर दे सकते हैं। सवाल: आपकी पार्टी के कुछ विधायकों ने उम्मीदवार को लेकर असहमति जताई थी। वह मुकेश सहनी या हिना शहाब को उम्मीदवार बनाना चाहते थे। इस पर क्या कहेंगे? जवाब: कभी-कभी परिवार को एकजुट रखने के लिए विष का घूंट भी पीना पड़ता है। पांचों उंगलियां बराबर नहीं होती है। अगर लीडरशिप का आदेश था कि महागठबंधन के प्रत्याशी को अपना मत प्रदान करना है, तो उस आदेश से बड़ा कुछ भी नहीं है। वो विपक्ष के प्रत्याशी थे और विपक्ष की संख्या वैसे भी कमजोर है। ऐसे में एक सीट जीतने से कुछ बड़ा नहीं हो जाता।
सवाल: पार्टी के अंदर अलग-अलग बयान सामने आ रहे हैं। विधायक मनोज विश्वास ने कहा है कि प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने स्वतंत्रता से वोट देने की बात कही थी। इस पर आप क्या कहेंगे? जवाब: उन्होंने हो सकता है विधायक से पर्सनली बात की हो। मुझे इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। तेजस्वी और राहुल गांधी के साथ जो मीटिंग हुई थी, उसके बाद यही मैसेज दिया किया गया कि हमें महागठबंधन के प्रत्याशी के साथ रहना है और उनकी मदद करनी है। सवाल: क्या भविष्य में पार्टी छोड़ने की कोई संभावना है या कांग्रेस में ही बने रहना है? जवाब: मैं यूथ कांग्रेस से राजनीति में आया हूं और पार्टी ने मुझे पहचान दी है। मेरे लिए कांग्रेस सिर्फ एक पार्टी नहीं, बल्कि विचारधारा है। कहीं जाने का कोई सवाल ही नहीं है। राजनीति में कुछ भी स्थायी नहीं होता, लेकिन मैं स्पष्ट कहना चाहता हूं कि मैं पार्टी के साथ ईमानदारी से खड़ा हूं और अपना कार्यकाल कांग्रेस के साथ ही पूरा करूंगा। अगर मुझे पार्टी से कभी जाना भी होगा, तो पूरे मान सम्मान के साथ जाऊंगा। ऐसा कोई नहीं कह सकता है कि मैंने पार्टी के साथ कभी गद्दारी की है।  

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