यूपी की बेटी, मार्शल आर्ट 2025 की गोल्ड मेडलिस्ट और एशियन चैंपियन खुशबू निषाद उर्फ नंदा के सम्मान में सासाराम के डेहरी में भव्य समारोह का आयोजन किया गया। भगवान वेद व्यास ट्रस्ट द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में वीआईपी सुप्रीमो मुकेश साहनी विशेष रूप से मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान खुशबू निषाद का गर्मजोशी से स्वागत किया गया और उनकी उपलब्धियों को समाज के लिए प्रेरणा बताया गया। बिहार और बिहारियों में टैलेंट की कोई कमी नहीं : खुशबू सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए गोल्ड मेडलिस्ट खुशबू निषाद ने कहा कि बिहार में टैलेंट की कोई कमी नहीं है। बिहार और बिहारियों की पहचान देशभर में अलग है। जरूरत सिर्फ इच्छा शक्ति और सही दिशा की है।उन्होंने कहा कि बिहार की बेटियों में प्रतिभा कूट-कूट कर भरी है। अगर उन्हें अवसर और समर्थन मिले तो एक नहीं, बल्कि कई खुशबू गोल्ड मेडल जीत सकती हैं। बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं, बस उन्हें आगे बढ़ने का भरोसा और मंच चाहिए। संघर्ष और शिक्षा से पहचान बनती है : मुकेश साहनी वीआईपी सुप्रीमो मुकेश साहनी ने कहा कि खुशबू निषाद को बुलाने का मूल उद्देश्य यही है कि समाज को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिले।उन्होंने कहा कि खुशबू ने अपनी पहचान शिक्षा और संघर्ष के बल पर बनाई है। यह पूरे समाज के लिए गर्व की बात है। उन्होंने संकल्प लिया कि समाज और प्रदेश को आगे बढ़ाने के लिए ऐसे प्रतिभाशाली युवाओं और बेटियों को हरसंभव सहयोग दिया जाएगा। डॉ. अंबेडकर चौक से निकला भव्य रोड शो खुशबू निषाद के डेहरी आगमन पर शहर में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। डॉ. अंबेडकर चौक से भव्य रोड शो निकाला गया, जिसमें सैकड़ों की संख्या में शहरवासी शामिल हुए।गाजे-बाजे के साथ निकला काफिला पुरानी डेहरी बाजार से होते हुए कर्पूरी ठाकुर चौक पहुंचा और फिर एनिकट पहुंचकर सम्मान समारोह में तब्दील हो गया। सड़क के दोनों ओर लोगों की भीड़ खुशबू का स्वागत करती नजर आई। साधारण परिवार से एशियाई मंच तक का सफर खुशबू निषाद का जन्म प्रयागराज के एक साधारण परिवार में हुआ। बचपन से ही उनका रुझान खेलों की ओर था। हालांकि लड़कियों के लिए मार्शल आर्ट को लेकर समाज की सोच उनके रास्ते में चुनौती बनकर खड़ी हुई, लेकिन खुशबू ने हार नहीं मानी।उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ खेल को अपना लक्ष्य बनाया और कठिन परिश्रम के दम पर गोल्ड मेडलिस्ट बनकर उभरीं। 12 साल की उम्र में शुरू किया जूडो-कराटे खुशबू ने महज 12 साल की उम्र में अपने भाई के साथ जूडो-कराटे सीखना शुरू किया। धीरे-धीरे यह खेल उनका जुनून और फिर करियर बन गया।पिता ने भी हर कदम पर बेटी को प्रोत्साहित किया। सीमित संसाधनों और सामाजिक दबाव के बावजूद खुशबू ने अभ्यास जारी रखा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। एशियाई मंच पर लहराया तिरंगा खुशबू निषाद ने आईएमएमएफ एशिया एमएमए चैंपियनशिप में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। एशियाई मंच पर तिरंगा फहराने वाली खुशबू आज हजारों बेटियों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।उनकी इस उपलब्धि पर सम्मान समारोह में मौजूद लोगों ने तालियों के साथ उनका उत्साहवर्धन किया। बेटियों के लिए बनी प्रेरणा डेहरी में आयोजित यह सम्मान समारोह सिर्फ एक खिलाड़ी के सम्मान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह संदेश भी दे गया कि अगर बेटियों को अवसर, समर्थन और भरोसा मिले तो वे किसी भी मंच पर देश का नाम रोशन कर सकती हैं। खुशबू निषाद आज सिर्फ एक एथलीट नहीं, बल्कि समाज के लिए बदलाव की मिसाल बनकर उभरी हैं। यूपी की बेटी, मार्शल आर्ट 2025 की गोल्ड मेडलिस्ट और एशियन चैंपियन खुशबू निषाद उर्फ नंदा के सम्मान में सासाराम के डेहरी में भव्य समारोह का आयोजन किया गया। भगवान वेद व्यास ट्रस्ट द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में वीआईपी सुप्रीमो मुकेश साहनी विशेष रूप से मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान खुशबू निषाद का गर्मजोशी से स्वागत किया गया और उनकी उपलब्धियों को समाज के लिए प्रेरणा बताया गया। बिहार और बिहारियों में टैलेंट की कोई कमी नहीं : खुशबू सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए गोल्ड मेडलिस्ट खुशबू निषाद ने कहा कि बिहार में टैलेंट की कोई कमी नहीं है। बिहार और बिहारियों की पहचान देशभर में अलग है। जरूरत सिर्फ इच्छा शक्ति और सही दिशा की है।उन्होंने कहा कि बिहार की बेटियों में प्रतिभा कूट-कूट कर भरी है। अगर उन्हें अवसर और समर्थन मिले तो एक नहीं, बल्कि कई खुशबू गोल्ड मेडल जीत सकती हैं। बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं, बस उन्हें आगे बढ़ने का भरोसा और मंच चाहिए। संघर्ष और शिक्षा से पहचान बनती है : मुकेश साहनी वीआईपी सुप्रीमो मुकेश साहनी ने कहा कि खुशबू निषाद को बुलाने का मूल उद्देश्य यही है कि समाज को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिले।उन्होंने कहा कि खुशबू ने अपनी पहचान शिक्षा और संघर्ष के बल पर बनाई है। यह पूरे समाज के लिए गर्व की बात है। उन्होंने संकल्प लिया कि समाज और प्रदेश को आगे बढ़ाने के लिए ऐसे प्रतिभाशाली युवाओं और बेटियों को हरसंभव सहयोग दिया जाएगा। डॉ. अंबेडकर चौक से निकला भव्य रोड शो खुशबू निषाद के डेहरी आगमन पर शहर में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। डॉ. अंबेडकर चौक से भव्य रोड शो निकाला गया, जिसमें सैकड़ों की संख्या में शहरवासी शामिल हुए।गाजे-बाजे के साथ निकला काफिला पुरानी डेहरी बाजार से होते हुए कर्पूरी ठाकुर चौक पहुंचा और फिर एनिकट पहुंचकर सम्मान समारोह में तब्दील हो गया। सड़क के दोनों ओर लोगों की भीड़ खुशबू का स्वागत करती नजर आई। साधारण परिवार से एशियाई मंच तक का सफर खुशबू निषाद का जन्म प्रयागराज के एक साधारण परिवार में हुआ। बचपन से ही उनका रुझान खेलों की ओर था। हालांकि लड़कियों के लिए मार्शल आर्ट को लेकर समाज की सोच उनके रास्ते में चुनौती बनकर खड़ी हुई, लेकिन खुशबू ने हार नहीं मानी।उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ खेल को अपना लक्ष्य बनाया और कठिन परिश्रम के दम पर गोल्ड मेडलिस्ट बनकर उभरीं। 12 साल की उम्र में शुरू किया जूडो-कराटे खुशबू ने महज 12 साल की उम्र में अपने भाई के साथ जूडो-कराटे सीखना शुरू किया। धीरे-धीरे यह खेल उनका जुनून और फिर करियर बन गया।पिता ने भी हर कदम पर बेटी को प्रोत्साहित किया। सीमित संसाधनों और सामाजिक दबाव के बावजूद खुशबू ने अभ्यास जारी रखा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। एशियाई मंच पर लहराया तिरंगा खुशबू निषाद ने आईएमएमएफ एशिया एमएमए चैंपियनशिप में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। एशियाई मंच पर तिरंगा फहराने वाली खुशबू आज हजारों बेटियों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।उनकी इस उपलब्धि पर सम्मान समारोह में मौजूद लोगों ने तालियों के साथ उनका उत्साहवर्धन किया। बेटियों के लिए बनी प्रेरणा डेहरी में आयोजित यह सम्मान समारोह सिर्फ एक खिलाड़ी के सम्मान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह संदेश भी दे गया कि अगर बेटियों को अवसर, समर्थन और भरोसा मिले तो वे किसी भी मंच पर देश का नाम रोशन कर सकती हैं। खुशबू निषाद आज सिर्फ एक एथलीट नहीं, बल्कि समाज के लिए बदलाव की मिसाल बनकर उभरी हैं।


