भक्ति, शक्ति और परंपराओं की त्रिवेणी स्वर्णनगरी जैसलमेर में सोमवार को बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व ‘होलिका दहन’ हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। जैसलमेर शहर के ऐतिहासिक गांधी चौक से लेकर ग्रामीण अंचलों तक फागुनी गीतों और जयकारों के साथ होलिका का पूजन किया गया। विशेष आकर्षण गांधी चौक में रहा, जहाँ पूर्व राजपरिवार के सदस्य विक्रम सिंह नाचना ने विधिवत पूजा-अर्चना के बाद होलिका दहन किया।
सात समंदर पार से आए मेहमानों पर चढ़ा होली का रंग जैसलमेर की होली का जादू इस बार विदेशी सैलानियों के सिर चढ़कर बोला। गांधी चौक में आयोजित मुख्य समारोह के दौरान बड़ी संख्या में फ्रांस, जर्मनी और अन्य देशों के पर्यटक मौजूद रहे। फ्रांस से आई कैटरीना ने बताया, “भारत के त्योहार अद्भुत हैं। हमने स्थानीय लोगों के साथ होली की परिक्रमा की और कल रंग-गुलाल के साथ प्यार से यह पर्व मनाने को लेकर बेहद उत्साहित हैं।” पूर्व राजपरिवार सदस्य विक्रम सिंह नाचना ने सभी को पर्व की बधाई देते हुए आपसी भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की। शुभ मुहूर्त में 500 से अधिक स्थानों पर जली होली पंचांग के अनुसार सोमवार शाम पूर्णिमा तिथि शुरू होते ही शहर में उत्सव का माहौल बन गया। ज्योतिषाचार्यों द्वारा बताए गए शाम 6:43 से रात 9:17 बजे के बीच प्रदोष काल के श्रेष्ठ मुहूर्त में शहर और आसपास के इलाकों में 500 से अधिक स्थानों पर होलिका दहन किया गया। इससे पूर्व दोपहर से ही गली-मोहल्लों में युवतियों और बच्चों ने रंग-बिरंगी रंगोली बनाई और ‘हैप्पी होली’ लिखकर खुशियों का इजहार किया। परंपराओं का निर्वाह, महिलाओं ने किया मंगल गान अंधेरा होते ही महिलाएं और युवतियां पारंपरिक वेशभूषा में मंगल गीत गाती हुई होलिका पूजन के लिए निकलीं। कच्चा सूत, गुड़, साबुत हल्दी, मूंग, बताशे और गेहूं की बालियों के साथ विधि-विधान से पूजा की गई। नवविवाहित जोड़ों ने एक साथ होलिका की पूजा कर सुखी दांपत्य की कामना की। दहन के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाया और ढोल की थाप पर जमकर नृत्य किया। कल धुलंडी, दुर्ग में सजेगा ऐतिहासिक ‘बादशाह का दरबार’ होलिका दहन के बाद अब मंगलवार को धुलंडी का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। जैसलमेर की सबसे अनूठी परंपरा के तहत सोनार दुर्ग के व्यासा पाड़ा में पुष्करणा ब्राह्मण समाज द्वारा ‘बादशाह का दरबार’ सजाया जाएगा। यहाँ व्यास जाति के व्यक्ति बादशाह बनते हैं और पूरे शहर में उनका शाही लवाजमा निकलता है। साथ ही ‘जिंदा-जिंदी’ के स्वांग के साथ शहरवासी रंगों और खुशियों के समंदर में गोते लगाएंगे।


