Holi Unique Tradition: 139 साल से ससुराल जाकर होली खेलते हैं भगवान चारभुजानाथ, जानें फूलडोल परंपरा की अनोखी कहानी

Holi Unique Tradition: 139 साल से ससुराल जाकर होली खेलते हैं भगवान चारभुजानाथ, जानें फूलडोल परंपरा की अनोखी कहानी

Kishanganj Town Holi Celebration: राजस्थान के बारां जिले के किशनगंज कस्बे में होली का पर्व एक अनोखी परंपरा के साथ मनाया जाता है। यहां धुलंडी के अवसर पर पिछले 139 वर्षों से फूलडोल लोकोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस परंपरा की खास बात यह है कि भगवान चारभुजानाथ हर साल ससुराल जाकर होली खेलते हैं। इस अनोखी मान्यता को देखने और इसमें शामिल होने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।

तुलसी को पुत्री मानकर कराया था विवाह

कस्बे के निवासी अयोध्या प्रसाद सक्सेना की कोई संतान नहीं थी। उन्होंने अपने आंगन में लगी तुलसी को पुत्री के रूप में स्वीकार किया। श्रद्धा और विश्वास के साथ उन्होंने तुलसी का विवाह भगवान चारभुजानाथ से कराया। हिंदू परंपरा के अनुसार विवाह के बाद पहली होली ससुराल में खेली जाती है। इसी मान्यता के चलते भगवान चारभुजानाथ ससुराल में होली खेलने पहुंचे और यहीं से इस परंपरा की शुरुआत हुई।

घास-फूस के हाथी पर निकली शोभायात्रा

परंपरा की शुरुआत के समय घास-फूस से एक कृत्रिम हाथी तैयार किया गया था। भगवान की प्रतिमा को उस पर विराजमान कर रात के समय भव्य शोभायात्रा निकाली गई। श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों और भजनों के साथ उत्साहपूर्वक जुलूस में शामिल हुए। ससुराल पहुंचकर रंग-गुलाल से होली खेली गई और उत्सव का माहौल बना।

आज भी जारी है 139 साल पुरानी परंपरा

समय के साथ यह आयोजन और भी भव्य होता गया लेकिन परंपरा आज भी उसी श्रद्धा और आस्था के साथ निभाई जा रही है। हर वर्ष धुलंडी पर फूलडोल उत्सव के दौरान भगवान चारभुजानाथ की सवारी निकाली जाती है और ससुराल में होली खेली जाती है। यह अनोखी परंपरा किशनगंज की पहचान बन चुकी है और लोगों के लिए आस्था व उत्साह का विशेष अवसर है।

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