गोपालगंज में RSS का होली मिलन कार्यक्रम:गायत्री मंदिर परिसर में आयोजन, पारंपरिक वाद्य यंत्रों पर फगुआ, सामाजिक समरसता का संदेश

गोपालगंज में RSS का होली मिलन कार्यक्रम:गायत्री मंदिर परिसर में आयोजन, पारंपरिक वाद्य यंत्रों पर फगुआ, सामाजिक समरसता का संदेश

गोपालगंज में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्वयंसेवकों ने जिले के वीएम फील्ड के पास स्थित गायत्री मंदिर परिसर में पारंपरिक हर्षोल्लास और आपसी भाईचारे के साथ रंगों का त्योहार होली मनाया। इस अवसर पर ‘होली मिलन’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें स्वयंसेवकों ने अनुशासन और लोक संस्कृति का प्रदर्शन किया।उत्सव का मुख्य आकर्षण पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप रही। झाल, मजीरा और नाल की धुन पर स्वयंसेवक जमकर थिरके। फगुआ के पारंपरिक गीतों और ‘जोगीरा सारा रारारा’ के उद्घोष से पूरा वातावरण भक्तिमय और उत्साहपूर्ण हो गया। फागुन की मस्ती में डूबे स्वयंसेवकों ने अपनी संस्कृति को जीवंत करते हुए सामूहिक रूप से होली के गीतों का गायन किया।कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवकों ने एक-दूसरे को अबीर और गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। मिलन समारोह में उम्र का कोई बंधन नहीं
इस मिलन समारोह में उम्र का कोई बंधन नहीं दिखा; युवाओं के साथ-साथ वरिष्ठ स्वयंसेवकों ने भी समान उत्साह के साथ त्योहार का आनंद लिया। स्वयंसेवकों ने समाज में प्रेम, एकता और सद्भाव का संदेश देते हुए कहा कि होली केवल रंगों का मेल नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने का माध्यम है। संघ के स्वयंसेवकों ने इस अवसर पर बताया कि होली का यह पर्व सामाजिक समरसता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार विभिन्न रंग मिलकर एक सुंदर छवि बनाते हैं, उसी प्रकार समाज के हर वर्ग को साथ मिलकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए। स्वयंसेवकों ने समाज में व्याप्त बुराइयों को मिटाकर भाईचारे की मिठास घोलने का संकल्प लिया। गोपालगंज में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्वयंसेवकों ने जिले के वीएम फील्ड के पास स्थित गायत्री मंदिर परिसर में पारंपरिक हर्षोल्लास और आपसी भाईचारे के साथ रंगों का त्योहार होली मनाया। इस अवसर पर ‘होली मिलन’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें स्वयंसेवकों ने अनुशासन और लोक संस्कृति का प्रदर्शन किया।उत्सव का मुख्य आकर्षण पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप रही। झाल, मजीरा और नाल की धुन पर स्वयंसेवक जमकर थिरके। फगुआ के पारंपरिक गीतों और ‘जोगीरा सारा रारारा’ के उद्घोष से पूरा वातावरण भक्तिमय और उत्साहपूर्ण हो गया। फागुन की मस्ती में डूबे स्वयंसेवकों ने अपनी संस्कृति को जीवंत करते हुए सामूहिक रूप से होली के गीतों का गायन किया।कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवकों ने एक-दूसरे को अबीर और गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। मिलन समारोह में उम्र का कोई बंधन नहीं
इस मिलन समारोह में उम्र का कोई बंधन नहीं दिखा; युवाओं के साथ-साथ वरिष्ठ स्वयंसेवकों ने भी समान उत्साह के साथ त्योहार का आनंद लिया। स्वयंसेवकों ने समाज में प्रेम, एकता और सद्भाव का संदेश देते हुए कहा कि होली केवल रंगों का मेल नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने का माध्यम है। संघ के स्वयंसेवकों ने इस अवसर पर बताया कि होली का यह पर्व सामाजिक समरसता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार विभिन्न रंग मिलकर एक सुंदर छवि बनाते हैं, उसी प्रकार समाज के हर वर्ग को साथ मिलकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए। स्वयंसेवकों ने समाज में व्याप्त बुराइयों को मिटाकर भाईचारे की मिठास घोलने का संकल्प लिया।  

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