श्री रामलीला समिति महानगर ने श्री रामलीला भवन में महिलाओं और पुरुषों के लिए पर्वतीय शैली की रंगारंग होली बैठक का आयोजन किया। इस अवसर पर अवध की धरती पर उत्तराखंड की लोक परंपरा के रंग बिखरे, जिससे पूरा सभागार फाग के सुरों से सराबोर हो गया। कार्यक्रम में विमल पन्त, सरोज खुल्वे, नन्दा रावत, फाल्गुनी लोहुमी, यशी लोहुमी, भावना लोहानी, अनुराधा मिश्रा, लीला जोशी, प्रतिष्ठा शर्मा, किशोर कोठारी, महेंद्र रावत, गोविंद बोरा, लक्ष्मण सिंह मार्तोलिया, ज्ञान पन्त और महेंद्र पन्त ने विभिन्न रागों में होली गीत प्रस्तुत किए। हारमोनियम पर मनोज मेहता, तबले पर दिवाकर राव, ढोलक पर हरीश लोहुमी और मजीरे पर दिनेश पांडे ने शानदार संगत दी। गीतों के माध्यम से होली के महत्व को बताया इस दौरान ‘आज बिरज में होली रे रसिया’, ‘फागुन आयो रे, रंग बरसाओ रे’, ‘खेले रघुवीरा अवध में होली’, ‘होली खेलन कैसे जाऊं सखी री’ और ‘रंग डालो री सजनी आज’ जैसे पाँच होली गीत गूंजे। कलाकारों ने इन गीतों के माध्यम से होली के सांस्कृतिक महत्व को बताया। श्रोताओं ने ‘वाह-वाह’ और तालियों से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। समिति के मीडिया प्रभारी देवेंद्र मिश्रा ने बताया कि इन होली बैठकों का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को लोकसंस्कृति से जोड़ना और पर्वतीय परंपराओं को संरक्षित करना है।उन्होंने आगे कहा कि होली केवल रंगों का नहीं, बल्कि मेल-मिलाप और भाईचारे का त्योहार है।


