Holi 2026: कहीं कुंवारों के देवता की पूजा तो कहीं शोक में डूबे परिवारों का साथ, राजस्थान का वो गांव, जहां अनूठी है यह परंपरा

Holi 2026: कहीं कुंवारों के देवता की पूजा तो कहीं शोक में डूबे परिवारों का साथ, राजस्थान का वो गांव, जहां अनूठी है यह परंपरा

Rajasthan Holi 2026: राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्र गडरारोड में होली का त्योहार एक अनूठी परंपरा के साथ मनाया जा रहा है, जो सदियों से चली आ रही है। यहां धुलंडी के दिन रंगों की होली खेलने से पहले गांववासी शोक संवेदना प्रकट करने जाते हैं, जो सामुदायिक एकजुटता का प्रतीक है।

दीपावली से होली के बीच यदि किसी परिवार में मृत्यु हो जाती है तो ऐसे परिवार पहली होली नहीं मनाते और घर में शोक रखते हैं। धुलंडी को ऐसे हर शोक संतप्त परिवार के घर पूरे गांव के लोग सुबह सवेरे पहुंचते हैं। बैठक आयोजित कर शोक संवेदना व्यक्त की जाती है।

Rajasthan Holi 2026 Gadraroad Mourns First Then Celebrates as Unique Dhulandi Tradition Continues

बच्चों के लिए मिठाई लेकर जाते हैं, जबकि बड़ों के साथ दुख साझा करते हैं। यदि मृत्यु के 12 दिनों के भीतर बैठना संभव न हो, तो होली के ठीक बाद धुलंडी या दीपावली के दूसरे दिन यह रिवाज निभाया जाता है।

80 वर्षीय वृद्ध सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य रविशंकर वासु बताते हैं कि गडरारोड कस्बे में यह परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है। सुबह के पहले दो तीन घंटे सभी शोक परिवारों के पास संवेदना व्यक्त करने में बीत जाते हैं। उसके बाद ही रंग-गुलाल की होली का आनंद लिया जाता है।

वासु ने एक उदाहरण दिया कि आस-पड़ोस में कोई छोटी मौत या प्रबुद्ध व्यक्ति की मौत हो जाती है तो पूरे गांव में त्योहार को सादगी से मनाया जाता है। यह परंपरा ग्रामीण भारत की आत्मीयता को दर्शाती है, जहां पूरा गांव एक बड़ा परिवार माना जाता है।

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आधुनिकता के दौर में भी गडरारोड जैसे क्षेत्रों में यह रिवाज जीवित है, जो सामाजिक संवेदनशीलता सिखाता है। वासु बोले, शहरों में यह भावना कम हो रही है, लेकिन यहां त्योहार दुख-सुख का साथी बन जाता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि धर्म, जाति से ऊपर उठकर प्रत्येक शोक संतप्त परिवार में बैठने जाना होता है, इससे सामुदायिक बंधन मजबूत होता है।

रंग-गुलाल और पिचकारियों से सजे प्रतिष्ठान

बाड़मेर शहर में सोमवार को होली पर्व मनाया जाएगा। शुभ मुहूर्त में होलिका दहन होगा। अगले दिन मंगलवार को धुलंडी पर रंग-गुलाल से होली खेली जाएगी। होलिका दहन से एक दिन पहले मुख्य बाजारों से लेकर गली-मोहल्लों तक हर ओर रौनक बढ़ गई है।

दुकानों के आगे अबीर, गुलाल, पिचकारी, रंग-बिरंगे गुब्बारे और सजावटी सामग्री के स्टॉल सजे हुए हैं। मिठाई की दुकानों पर ग्राहकों की कतारें लगी हैं तो कपड़ा, कॉस्मेटिक और किराने की दुकानों पर भी खरीदारी जोरों पर है। महंगाई की मार के बावजूद लोगों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिख रही।

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बाजारों में इस बार रंगों और गुलाल के दामों में बढ़ोतरी देखी गई हैं। लेकिन त्योहार के जोश के आगे कीमतें फीकी पड़ती नजर आ रही हैं। गली-मोहल्लों में चंग की थाप पर फाल्गुनी गीत गूंजने लगे हैं।

सफर में भी झलकने लगा त्योहार

होली का रंग अब यात्रा में भी साफ दिखाई देने लगा है। बड़े शहरों में काम करने वाले लोग अपने गांव और कस्बों की ओर लौट रहे हैं, ताकि अपनों के साथ त्योहार मना सकें। रविवार को शहर के रेलवे स्टेशन, केंद्रीय बस स्टैंड और स्टेशन रोड पर भारी भीड़ देखने को मिली। बसों और ट्रेनों में सीट पाने के लिए यात्रियों को जद्दोजहद करनी पड़ी। कई ट्रेनों और बसों में पहले से ही सीटें फुल थी, जिससे यात्रियों को खड़े होकर सफर करना पड़ा।

महंगाई पर भारी उत्साह

इस बार रंग, मिठाई और अन्य सामग्री के दामों में बढ़ोतरी हुई है। लेकिन त्योहार का उत्साह बरकरार है। बच्चे नई पिचकारियों और रंगों को लेकर उत्साहित हैं।

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शिव होली परम्पराः गांवों में होलाष्टक के साथ ही गेर नृत्य की धूम

होली से कुछ दिन पूर्व होलाष्टक प्रारंभ होने के साथ ही क्षेत्र के विभिन्न गांवों में लकड़ी के बने डांडियों को हाथों में लेकर पुरुष गोल घेरे में गेर नृत्य करते हैं। इस प्रकार के नृत्य करने वालों को गेरिया कहते हैं। यह होलाष्टक लगने के साथ ही प्रारंभ होता है। यह कार्यक्रम होलिका पर्व तक चलता है। इसमें ढोल, बांकिया और थाली आदि वाद्य यंत्रों के साथ किए जाने वाले गेर नृत्यों के साथ गीत गाए जाते हैं।

इस प्रकार का नृत्य करने वाले व्यक्ति सफेद धोती, सफेद अंगरखी, सिर पर लाल अथवा केसरिया रंग की पगड़ी पहनते हैं। इस दौरान मांगणियार कलाकार लोकगीतों की प्रस्तुति देने के साथ ढोल वाद्य यंत्र का प्रयोग करते हैं। ग्रामीण विक्रम सिंह ने बताया कि यह परंपरा काफी पुरानी है।

प्रमुख चौराहों पर विशेष निगरानी, 325 पुलिसकर्मी तैनात

रंगों के पर्व होली को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में मनाने के लिए जिला पुलिस ने व्यापक और बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की है। जिला मुख्यालय पर कुल 22 स्थानों पर फिक्स पिकेट लगाए गए हैं, वहीं शहर के प्रमुख चौराहों और भीड़‌भाड़ वाले इलाकों में विशेष निगरानी रखी जाएगी।

पुलिस की मोबाइल टीमें लगातार गश्त करेंगी और संवेदनशील क्षेत्रों पर अतिरिक्त बल तैनात रहेगा। व्यवस्था के तहत चार पुलिस मोबाइल, 3 रिजर्व बल, 2 हाइवे मोबाइल, यातायात शाखा का विशेष दस्ता, वज्र वाहन तथा सादावस्त्रधारी पुलिसकर्मियों को रणनीतिक रूप से नियुक्त किया गया है। प्रमुख चौराहों, बाजार क्षेत्र, धार्मिक स्थलों और आवागमन के मुख्य मार्गों पर पुलिस की सतत मौजूदगी रहेगी, ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या हुड़दंग की स्थिति पर तुरंत नियंत्रण पाया जा सके।

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एसपी बोले- कानून व्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता

पुलिस अधीक्षक नरेंद्र सिंह ने बताया कि होली के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रमुख चौराहों पर विशेष चौकसी रखी जाएगी। शराब पीकर वाहन चलाने, जबरन रंग लगाने, तेज रफ्तार वाहन चलाने या हुड़दंग मचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सोशल मीडिया पर भी निगरानी रखी जा रही है, ताकि अफवाहों पर तुरंत रोक लगाई जा सके। उन्होंने आमजन से अपील की कि होली प्रेम, भाईचारे और आपसी सद्भाव के साथ मनाएं। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम को दें।

शादी के गीतों संग फाग गायन शुरू, ग्राम देवता के रूप में पूजे जाते हैं ईलोजी

मारवाड़ अंचल में होली पर्व पर ईलोजी की पूजा-अर्चना की परंपरा आज भी पूरे उत्साह और आस्था के साथ निभाई जा रही है। निसंतानों को संतान और अविवाहितों को योग्य सुंदर वधू मिलने की कामना से श्रद्धालु ईलोजी के दर पर पहुंचते हैं। ग्राम देवता के रूप में पूजे जाने वाले ईलोजी की प्रतिमा औद्योगिक नगरी बालोतरा के मुख्य बाजार में स्थापित है। जहां होली के अवसर पर विशेष सजावट और आयोजन किए जाते हैं।

होलिका दहन तक चलेगा पूजा-अर्चना का सिलसिला

ओमप्रकाश माली ने बताया कि आमली एकादशी के दिन ईलोजी को रंग-बिरंगी पोशाक और आभूषणों से दूल्हे की तरह सजाकर पाट बैठाया गया। होली पर्व पर बैंडबाजों की धुन पर उनकी बारात निकाली जाएगी। शादी की रस्मों की तरह फाग गायन और विवाह गीतों का दौर शुरू हो चुका है, जो होलिका दहन तक निरंतर चलेगा।

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