जयपुर। इस साल होली का त्योहार लोंग वीकेंड के साथ आ रहा है। यह लोंग वीकेंड 28 फरवरी शनिवार से शुरू होकर 3 मार्च तक रहेगा। यानी शनिवार-रविवार और होली की दो दिन की छुट्टी मिलाकर इस बार आपके पास चार दिन का शानदार मौका है। अगर आप सोच रहे हैं कि इस बार होली को यादगार कैसे बनाएं, तो जवाब है- राजस्थान।
रंगों का यह त्योहार जब राजस्थान की हवेलियों, महलों और रेतीले धोरों के बीच मनाया जाता है, तो इसका जादू दोगुना हो जाता है। यहां की होली सिर्फ रंग नहीं, बल्कि संस्कृति, लोकगीत और ठंडाई की खुशबू से भरी होती है। तो चलिए राजस्थान की उन बेहतरीन जगहों पर, जहां होली मनाना एक अलग ही अनुभव है।
राजस्थान की ये जगहें केवल राजस्थानी लोगों का ही नहीं बल्कि विदेशी पावणों का ध्यान भी अपनी ओर खिंचती हैं।
‘ब्लू सिटी’ की होली
नीले रंग से रंगी दीवारों और मेहरानगढ़ किले की भव्य छांव में जोधपुर की होली एक अलग ही अनुभव देती है। यहां की होली में दिखावा नहीं, बल्कि प्रेम और अपनापन झलकता है। यहां की सबसे खास परंपरा है ‘गैर नृत्य’ पुरुषों का यह सामूहिक लोकनृत्य इतना मशहूर है कि इसे देखने के लिए जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों से पर्यटक खिंचे चले आते हैं। विदेशी सैलानी पुराने शहर की संकरी गलियों में स्थानीय लोगों के साथ होली खेलते हैं।
उदयपुर में बारूद की होली
झीलों की नगरी उदयपुर में होली का अनुभव राजसी, सुंदर और सांस्कृतिक होता है। पिछोला झील के किनारे और पुराने महलों के आसपास रंगों के उत्सव का एक अलग ही नजारा देखा जाता है। यहां होलिका दहन का आयोजन शाही परिवार की ओर से किया जाता है, जिसे मेवाड़ होलिका दहन कहते हैं। शाम के समय लोक नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम माहौल को आकर्षक बना देते हैं। यहां मेनार गांव में होली बारूद से खेली जाती है। यह वीर योद्धाओं के सम्मान में एक परंपरा है, जिसमें बंदूकें और तोपें चलाई जाती हैं। साथ ही पटाखे जलाए जाते हैं।
विदेशी पावणों के साथ होली
जयपुर में होली के अवसर पर पर्यटन विभाग देश-विदेश के पर्यटकों को राजस्थानी परंपराओं से रूबरू कराता है। इस वर्ष यह कार्यक्रम 3 मार्च को खासा कोठी में आयोजित किया जाएगा। इसका समय सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक रखा गया है। इस उत्सव में पारंपरिक लोक संगीत, घूमर व अन्य लोक नृत्य प्रस्तुतियां, रंगोत्सव और राजस्थानी आतिथ्य का अनुभव कराया जाएगा। आयोजन का उद्देश्य विदेशी मेहमानों और पर्यटकों को होली के सांस्कृतिक स्वरूप से परिचित कराना है।
डोलची मार होली
लट्ठ मार होली तो सभी जानते हैं लेकिन क्या आप डोलची मार होली के बारे में जानते हैं? डोलची मार होली बीकानेर की एक खास परंपरा है। इसमें पुरुष ऊंट की खाल से बनी ‘डोलची’ में पानी भरकर एक-दूसरे की पीठ पर जोर से मारते हैं। इसके साथ ही पारंपरिक रम्मत लोक नाट्य और स्थानीय गीत-नृत्य इस पर्व को विशिष्ट पहचान देते हैं। शहर की पुरानी गलियों और चौकों में सामूहिक उत्सव का वातावरण बनता है, जहां स्थानीय लोग अतिथियों का स्वागत बड़े स्नेह से करते हैं।


