आगरा के ट्रांस यमुना क्षेत्र में हुए सनसनीखेज राज चौहान हत्याकांड के बाद पुलिस की विवेचना जारी है। राज की मां ने क्षेत्र के हिस्ट्रीशीटर मोनू यादव पर आरोप लगाए थे। पुलिस मामले की जांच कर रही है, लेकिन इसी बीच मोनू यादव पुराने मामले में अपनी जमानत तुड़वाकर कोर्ट में पेश होकर जेल चला गया। 23 दिसंबर की रात टेढ़ी बगिया के पास गेस्ट हाउस में दिल दहला देने वाला हत्याकांड हुआ था। पांच युवकों ने 18 राउंड गोलियां चलाईं थीं। राज चौहान के सात गोलियां लगी थीं। उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया था। मुख्य आरोपित अरबाज मंसूरी पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था। नौ हत्यारोपी जेल में बंद हैं। इसमें मुखबिरी करने वाले राज चौहान के दोस्त भी शामिल हैं। करीब छह आरोपियों की पुलिस को तलाश है। हत्याकांड के बाद राज चौहान की मां ने हिस्ट्रीशीटर मोनू यादव पर आरोप लगाए थे। उन्होंने इस संबंध में पुलिस आयुक्त दीपक कुमार को भी प्रार्थना पत्र दिया था। पुलिस को साजिशकर्ता में गैंगस्टर आलोक यादव पर भी शक था। मोनू और आलोक के संबंध में पुलिस साक्ष्य संकलित कर रही थी। वहीं दूसरी तरफ पुलिस की कार्यप्रणाली से नाखुश राज चौहान की मां ने लखनऊ में शिकायत की थी। स्थानीय नेताओं ने यह मामला लखनऊ में वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष उठाया। जानकारी के बाद पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने खुद विवेचना की समीक्षा की। पुलिस को निर्देशित किया कि इस मामले में जो भी लिप्त है बचना नहीं चाहिए। पुलिस सात दिन में दोनों आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य जुटाए। दोनों शामिल हैं तो जेल भेजा जाए। पुलिस सूत्रों के अनुसार मोनू यादव को इसकी भनक लग गई थी। वह गुपचुप जमानत कटाकर जेल चला गया। रंगदारी और एससी/एसटी ऐक्ट के एक मुकदमे में उसने अपनी जमानत कटवाई। उसके जेल में दाखिल होने के बाद पुलिस को जानकारी हुई। पुलिस ने दी थी दबिश
पिछले दिनों मोनू यादव के घर पर पुलिस ने दबिश भी दी। मगर, वो पुलिस के हाथ नहीं लगा था। इसके बा ही मोनू को आभास हो गया था कि पुलिस उस पर शिकंजा कस रही है। इसके चलते ही उसने जेल जाना सही समझा। दिया था सुरक्षा का भरोसा
राज चौहान की मां ने मोनू यादव से अपनी और परिवारीजनों की जान को खतरा बताया था। मुख्यमंत्री को प्रेषित प्रार्थनापत्र की जांच आगरा एसटीएफ यूनिट को मिली थी। एसटीएफ ने राज की मां को सुरक्षा का आश्वासन दिया। एसटीएफ पिछले चार-पांच दिन से मोनू यादव के बारे में जानकारी जुटा रही थी।


