Historical Library Raipur: रायपुर में प्रशासनिक पारदर्शिता और ऐतिहासिक दस्तावेजों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जिला प्रशासन ने ब्रिटिश काल से लेकर अविभाजित मध्यप्रदेश दौर तक के प्रशासनिक अभिलेखों और ऐतिहासिक परियोजनाओं से जुड़े दस्तावेजों को संरक्षित करने के लिए एक विशेष ग्रंथालय की स्थापना की है। इसका उद्देश्य वर्षों से बिखरे पड़े महत्वपूर्ण शासकीय दस्तावेजों को एक ही स्थान पर सुरक्षित रखना और उन्हें प्रशासनिक व शोध कार्यों के लिए सुलभ बनाना है।
ऐतिहासिक धरोहर को सहेजने की पहल
अक्सर देखा गया है कि पुराने सरकारी रिकॉर्ड अलग-अलग विभागों में रखे होने के कारण शोधार्थियों और अधिकारियों को संदर्भ सामग्री जुटाने में कठिनाई होती है। कई बार समय के साथ महत्वपूर्ण दस्तावेज नष्ट या क्षतिग्रस्त भी हो जाते हैं। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए यह ग्रंथालय तैयार किया गया है, जहां ऐतिहासिक और प्रशासनिक महत्व के दस्तावेज व्यवस्थित रूप से संकलित किए गए हैं।
यहां अविभाजित मध्यप्रदेश काल के नियम-कानून, विभिन्न अधिनियम, विधानसभा और विधान परिषद की कार्यवाहियों के अभिलेख सुरक्षित रखे गए हैं। अब तक 1062 से अधिक पुस्तकें और दस्तावेज एकत्र किए जा चुके हैं। विशेष रूप से वर्ष 1911 से 1971 तक की जनगणना से संबंधित प्रकाशन भी यहां उपलब्ध हैं, जो सामाजिक-आर्थिक शोध के लिए अत्यंत उपयोगी माने जाते हैं।
प्रशासन और शोध कार्यों को मिलेगा बल
ग्रंथालय में राजस्व, वित्त, योजना, कृषि, सिंचाई, जेल तथा अन्य विभागों से संबंधित महत्वपूर्ण अभिलेख रखे गए हैं। उच्च न्यायालय से जुड़ी संदर्भ सामग्री भी यहां उपलब्ध कराई गई है। इससे अधिकारियों, कर्मचारियों, विधि विशेषज्ञों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों को एक ही स्थान पर प्रमाणिक जानकारी मिल सकेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से प्रशासनिक निर्णयों में पारदर्शिता बढ़ेगी और नीति निर्माण में ऐतिहासिक संदर्भों का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। साथ ही शोध कार्यों को भी नई दिशा मिलेगी।

डिजिटल एक्सेस की तैयारी
कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह और मुख्य कार्यपालन अधिकारी कुमार बिश्वरंजन के मार्गदर्शन में जिला पंचायत कार्यालय के द्वितीय तल पर यह ग्रंथालय स्थापित किया गया है। भविष्य में इन दस्तावेजों को डिजिटल रूप में उपलब्ध कराने की योजना भी बनाई गई है, ताकि ऑनलाइन माध्यम से अधिक से अधिक लोग इनका लाभ उठा सकें। इस पहल को प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने, ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखने और शोध संस्कृति को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक सकारात्मक और दूरदर्शी कदम माना जा रहा है।
Raipur Research Facility: रायपुर में स्थापित इस विशेष ग्रंथालय से शोधार्थियों (Researchers) को कई स्तरों पर सीधा लाभ मिलेगा:
- एक ही स्थान पर प्रामाणिक सामग्री
ब्रिटिश काल, अविभाजित मध्यप्रदेश और पुराने प्रशासनिक दौर के नियम-कानून, अधिनियम, विधानसभा कार्यवाही, जनगणना रिपोर्ट (1911–1971) जैसी दुर्लभ सामग्री अब एक ही जगह उपलब्ध है। इससे अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी।
- ऐतिहासिक डेटा तक आसान पहुंच
सामाजिक, आर्थिक, कानूनी और प्रशासनिक शोध करने वालों को प्रामाणिक ऐतिहासिक आंकड़े मिलेंगे। खासकर जनगणना और राजस्व दस्तावेज शोध पत्र (Research Papers) और पीएचडी कार्य के लिए बेहद उपयोगी होंगे।
- नीति विश्लेषण में मदद
पब्लिक पॉलिसी, प्रशासन और कानून के शोधकर्ता पुराने निर्णयों, अधिनियमों और नीतियों की तुलना वर्तमान व्यवस्था से कर सकेंगे। इससे बेहतर विश्लेषण और तथ्यात्मक अध्ययन संभव होगा।
- समय और संसाधन की बचत
पहले पुराने रिकॉर्ड खोजना मुश्किल और समय लेने वाला काम था। अब व्यवस्थित अभिलेखों के कारण शोध प्रक्रिया तेज और सरल होगी।
- भविष्य में डिजिटल एक्सेस
यदि दस्तावेज ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाते हैं, तो देश-विदेश के शोधार्थी भी दूर बैठकर इनका उपयोग कर सकेंगे, जिससे अकादमिक सहयोग और बढ़ेगा। कुल मिलाकर यह ग्रंथालय शोध की गुणवत्ता, प्रमाणिकता और पहुंच—तीनों को मजबूत करेगा।


