बेगूसराय में ऐतिहासिक रंग डालो प्रतियोगिता शुरू:पहले दिन पांच कुआं पर उमड़ी भीड़, साइकिल के पंप से एक दूसरे पर डाला पानी

बेगूसराय में ऐतिहासिक रंग डालो प्रतियोगिता शुरू:पहले दिन पांच कुआं पर उमड़ी भीड़, साइकिल के पंप से एक दूसरे पर डाला पानी

होली को लेकर पूरा माहौल रंगीन बना हुआ है। बेगूसराय में आज दोपहर से दो दिवसीय ऐतिहासिक और अद्भुत रंग डालो प्रतियोगिता शुरू हो गया। मटिहानी गांव में शुरू प्रतियोगिता में आज पहले दिन पांच कुओं पर होली खेली गई। जिसकी शुरुआत चंडिका स्थान परिसर से हुई। चंडिका स्थान परिसर में हजारों लोग जुटे और भगवती को अबीर अर्पण के बाद परिसर के सभी नादी में पानी भरा गया। गांव के युवकों ने दो ग्रुप बनाकर एक दूसरे पर पिचकारी नहीं, बल्कि साइकिल में हवा देने वाले पंप से पानी डाला। यहां प्रतियोगिता खत्म होने के बाद धीरे-धीरे भीड़ आगे बढ़ती गई। चार अलग-अलग कुआं पर दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर जमकर रंग डाला। इस दौरान पूरे गांव का यह सामूहिक उत्सव सामाजिक समरसता का भी संदेश दे रहा था। पूरी होली शालीनता के साथ खेली गई, ना तो कहीं द्विअर्थी गाना और ना ही जोगीरा का प्रयोग किया गया। ना ही प्रतियोगिता से बाहर के लोगों को रंग डाला गया। इस अद्भुत होली को देखने के लिए गांव ही नहीं, बल्कि जिला के विभिन्न क्षेत्रों से लोग जुटे हुए थे। कल काली स्थान परिसर सहित तीन कुंआ पर होली होगी। जिसमें एक ग्रुप महिला का होगा एवं दो ग्रुप पुरुषों का होगा। अंतिम में जिसकी नादी से पहले रंग खत्म हो जाएगा, वह विजेता घोषित होगा। उनके बीच गांव के वरिष्ठ लोगों की उपस्थिति में पुरस्कार वितरण किया जाएगा। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस गांव में राजस्थान से आए माड़वार समाज के लोग राजस्थान से पिचकारी लेकर यहां आए थे। पहली बार उन्होंने ही 7 कुआं पर एक साथ होली की शुरूआत कराई। हम लोगों ने पुरखों की परंपरा को आज भी बरकरार रखा है। मटिहानी नाम का एक ऐसा गांव है, जहां के होली का इंतजार सिर्फ गांव के लोग ही नहीं, दूर-दूर के लोग एक साल तक करते हैं। यहां दो दिन मनाए जाने वाले रंगों के उत्सव में लोग रंग बाल्टी या ड्रम में नहीं घोलते, बल्कि नादी में घोल दिया जाता है। पूरे गांव के लोग एक जगह जमा होकर रंग डालो प्रतियोगिता करते हैं। रंगों के बरसात की प्रतियोगिता में शामिल लोग मटिहानी गांव में इस चर्चित होली में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती है। गांव के लोग जहां होली खेलते हैं, वहीं इस अनोखे होली को देखने के लिए दूर-दूर से लोग जमा होते हैं। यहां हजारों लोग एक जगह जुटकर ब्रज की लठमार होली नहीं, बल्कि रंगों के बरसात की प्रतियोगिता में शामिल होते हैं। मटिहानी में दो दिन मनाए जाने वाले होली की खास बात है कि कथित आधुनिकता के युग जहां कुआं विलुप्त हो गया है तो, यहां कुंआ को जिंदा रखा गया है और कुआं पर ही सामूहिक होली खेली जाती है। पहले दिन सभी लोग पांच कुआं पर जमा होते हैं और कई ड्रम, नांद एवं अन्य बड़े बर्तन में रंग रखा जाता है। होली को लेकर पूरा माहौल रंगीन बना हुआ है। बेगूसराय में आज दोपहर से दो दिवसीय ऐतिहासिक और अद्भुत रंग डालो प्रतियोगिता शुरू हो गया। मटिहानी गांव में शुरू प्रतियोगिता में आज पहले दिन पांच कुओं पर होली खेली गई। जिसकी शुरुआत चंडिका स्थान परिसर से हुई। चंडिका स्थान परिसर में हजारों लोग जुटे और भगवती को अबीर अर्पण के बाद परिसर के सभी नादी में पानी भरा गया। गांव के युवकों ने दो ग्रुप बनाकर एक दूसरे पर पिचकारी नहीं, बल्कि साइकिल में हवा देने वाले पंप से पानी डाला। यहां प्रतियोगिता खत्म होने के बाद धीरे-धीरे भीड़ आगे बढ़ती गई। चार अलग-अलग कुआं पर दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर जमकर रंग डाला। इस दौरान पूरे गांव का यह सामूहिक उत्सव सामाजिक समरसता का भी संदेश दे रहा था। पूरी होली शालीनता के साथ खेली गई, ना तो कहीं द्विअर्थी गाना और ना ही जोगीरा का प्रयोग किया गया। ना ही प्रतियोगिता से बाहर के लोगों को रंग डाला गया। इस अद्भुत होली को देखने के लिए गांव ही नहीं, बल्कि जिला के विभिन्न क्षेत्रों से लोग जुटे हुए थे। कल काली स्थान परिसर सहित तीन कुंआ पर होली होगी। जिसमें एक ग्रुप महिला का होगा एवं दो ग्रुप पुरुषों का होगा। अंतिम में जिसकी नादी से पहले रंग खत्म हो जाएगा, वह विजेता घोषित होगा। उनके बीच गांव के वरिष्ठ लोगों की उपस्थिति में पुरस्कार वितरण किया जाएगा। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस गांव में राजस्थान से आए माड़वार समाज के लोग राजस्थान से पिचकारी लेकर यहां आए थे। पहली बार उन्होंने ही 7 कुआं पर एक साथ होली की शुरूआत कराई। हम लोगों ने पुरखों की परंपरा को आज भी बरकरार रखा है। मटिहानी नाम का एक ऐसा गांव है, जहां के होली का इंतजार सिर्फ गांव के लोग ही नहीं, दूर-दूर के लोग एक साल तक करते हैं। यहां दो दिन मनाए जाने वाले रंगों के उत्सव में लोग रंग बाल्टी या ड्रम में नहीं घोलते, बल्कि नादी में घोल दिया जाता है। पूरे गांव के लोग एक जगह जमा होकर रंग डालो प्रतियोगिता करते हैं। रंगों के बरसात की प्रतियोगिता में शामिल लोग मटिहानी गांव में इस चर्चित होली में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती है। गांव के लोग जहां होली खेलते हैं, वहीं इस अनोखे होली को देखने के लिए दूर-दूर से लोग जमा होते हैं। यहां हजारों लोग एक जगह जुटकर ब्रज की लठमार होली नहीं, बल्कि रंगों के बरसात की प्रतियोगिता में शामिल होते हैं। मटिहानी में दो दिन मनाए जाने वाले होली की खास बात है कि कथित आधुनिकता के युग जहां कुआं विलुप्त हो गया है तो, यहां कुंआ को जिंदा रखा गया है और कुआं पर ही सामूहिक होली खेली जाती है। पहले दिन सभी लोग पांच कुआं पर जमा होते हैं और कई ड्रम, नांद एवं अन्य बड़े बर्तन में रंग रखा जाता है।  

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