छतरपुर, बुंदेलखंड के प्राचीन शहरों में से एक, में आज पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ होलिका दहन किया जाएगा। इस अवसर पर हिरण्यकश्यप, भक्त प्रह्लाद और होलिका की कथा सुनाई जाएगी, जिसके बाद विधि-विधान से पूजन कर अग्नि प्रज्वलित की जाएगी। शहर के हटवारा मोहल्ले में वर्षों पुरानी परंपरा के तहत होलिका सजाई गई है। स्थानीय निवासी चौबे चौधरी और राक्कू चौधरी ने बताया कि कटीली झाड़ियों और लकड़ियों से ढांचा तैयार किया गया है, जिसमें गोबर के कंडे, हवन सामग्री, कपूर और लकड़ी रखी गई है। होलिका के बीच में होलिका की प्रतिमा और उसकी गोद में बैठे भक्त प्रह्लाद की प्रतिमा स्थापित की गई है। शुभ मुहूर्त के अनुसार आज देर रात होलिका दहन होगा। इस आयोजन में घर-परिवार, मोहल्ले और शहर के सभी वर्गों के सैकड़ों लोग, जिनमें बच्चे, बुजुर्ग, युवा और महिलाएं शामिल हैं, उपस्थित रहेंगे। इस दौरान बच्चों में मिठाइयां, रंग, गुलाल और पिचकारी बांटी जाएंगी। बड़े-बुजुर्गों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया जाएगा और साल भर के गिले-शिकवे व बुराइयां होलिका दहन के साथ दूर की जाएंगी। व्यवसायी और सामाजिक जानकार नाथूराम गुप्ता ने बताया कि उदय तिथि के अनुसार पूर्णिमा कल है, लेकिन चंद्र ग्रहण के कारण होलिका दहन आज ही किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि छतरपुर, बुंदेलखंड का एक प्राचीन शहर होने के नाते, अपने त्योहारों को पारंपरिक और श्रद्धा भाव से मनाने के लिए जाना जाता है। परंपरा के अनुसार, महिलाएं पहले होलिका की पूजा करेंगी। इसके बाद हिरण्यकश्यप-प्रह्लाद की कथा सुनाई जाएगी और फिर होलिका का दहन किया जाएगा। दहन के उपरांत लोग एक-दूसरे को रंग और गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं देंगे। होलिका दहन को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। शहर में इस पर्व को सामाजिक सद्भाव और भाईचारे के साथ मनाने की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।


