‘बांग्लादेश में हिंदू मारे जा रहे हैं, प्रधानमंत्री रोकें’:लखनऊ में नेहा सिंह राठौर बोलीं- मैंने कभी संविधान नहीं तोड़ा, लेकिन मुझे गुंडा कहा जाता है

‘बांग्लादेश में हिंदू मारे जा रहे हैं, प्रधानमंत्री रोकें’:लखनऊ में नेहा सिंह राठौर बोलीं- मैंने कभी संविधान नहीं तोड़ा, लेकिन मुझे गुंडा कहा जाता है

‘मैंने कभी संविधान नहीं तोड़ा। सारे नियम माने। जो कुछ भी बोला, हर बात के लिए खुद ही जिम्मेदार हूं। सवाल उठाने से ही नोटिस पहुंच जाता है। नोटिस के बाद जब कोतवाली जाओ तो समाज में तमाम बातें उठने लगती हैं। हमारे समाज के लोग ही कहने लगते हैं कि जरूर इसने कुछ किया होगा। उन्हें नहीं पता होता कि नोटिस क्या है।’ यह कहना है लोक गायिका नेहा सिंह राठौर का। नेहा कहती हैं कि हमारे प्रधानमंत्री जी बड़े पावरफुल हैं, उन्हें बांग्लादेश में हिंदू की हत्या रुकवानी चाहिए। नेहा ने कहा कि मैं कुछ गाती हूं, लिखती हूं तो मुझे गुंडा कहा जाता है। दरअसल, उनकी गिरफ्तारी या हिरासत के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 7 जनवरी को रोक लगा दी। यह राहत मिली तो हमेशा मुखर रहने वाली नेहा से दैनिक भास्कर डिजिटल ने बात की। बातचीत में उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट, प्रधानमंत्री से पूछे गए सवालों, उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था, बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमलों और अपने खिलाफ बने माहौल पर बोला। अब आगे पढ़िए, नेहा सिंह राठौर से दैनिक भास्कर की बातचीत… सवाल : सुप्रीम कोर्ट से गिरफ्तारी पर राहत मिलने के बाद आप क्या सोचती हैं? जवाब : मेरे लिए यह बहुत ही सुखद खबर है और मैं बेहद खुश हूं। मैं सुप्रीम कोर्ट का दिल से सम्मान करती हूं और उसके हर आदेश को पूरी तरह स्वीकार करती हूं। मेरी हमेशा यही कोशिश रही है कि जो भी बात कहूं, वह संवैधानिक दायरे में हो। मैं अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी संविधान की मर्यादा का पूरा ध्यान रखती हूं। मैंने कभी कानून या संविधान का उल्लंघन करने वाली कोई पोस्ट नहीं की है और न ही आगे करूंगी। सवाल: सुप्रीम कोर्ट भी कहता है कि ऐसा बयान या विचार न हो, जिससे कोई आहत हो? जवाब : मैं बिल्कुल साफ कहना चाहती हूं कि मैं कोई भी पोस्ट शराब या किसी नशे की हालत में नहीं करती। यह कहना कि “कल रात ज्यादा पी लिया था और सुबह माफी मांग रही हूं”, मेरे बारे में पूरी तरह झूठी और मनगढ़ंत बात है। मैं सोच-समझकर और जिम्मेदारी के साथ लिखती हूं। मेरी हर पोस्ट सामाजिक, संवैधानिक मर्यादा और कानूनी दायरे में रहकर सवाल उठाती है, न कि किसी उन्माद या लापरवाही से। सवाल : जिन पोस्ट पर मुकदमा हुआ, उनमें सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का आरोप है? जवाब : बिल्कुल नहीं। मुझे याद है कि तीन-चार साल पहले ‘यूपी में का बा पार्ट-2’ के दौरान कानपुर देहात में दीक्षित परिवार पर बुलडोजर कार्रवाई हुई थी। उस मामले में भी मुझे नोटिस मिला था, जबकि मैं तब दिल्ली में रहती थी। नोटिस में कहा गया कि मेरे गाने से समुदायों के बीच तनाव फैल सकता है, जबकि वह नोटिस पूरी तरह असंवैधानिक था। वह मुझे डराने और दबाने का प्रयास था। यह कहना गलत है कि मैंने सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए कोई पोस्ट की। सवाल : क्या अब आगे पोस्ट करने से पहले आत्ममंथन करेंगी? जवाब : मैंने कभी ऐसी कोई टिप्पणी नहीं की जिससे सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़े। कल भी मैं लिखती-गाती थी, आज भी लिखती-गाती हूं और आगे भी करती रहूंगी। सवाल पूछना और अपनी बात कहना मेरा संवैधानिक अधिकार है और मैं उसे छोड़ने वाली नहीं हूं। सवाल : कहा जा रहा है कि आपने सीएम योगी पर गाने बंद कर दिए और पीएम मोदी पर लिख रही हैं? जवाब : ऐसा बिल्कुल नहीं है। मेरा सबसे लोकप्रिय गीत ‘यूपी में का बा’ ही रहा है। ‘मंत्री का बेटवा बड़ा रंगदार बा, किसानों की छाती पर रौंदत मोटर बा’, ‘कोरोना से लखन मर गइले, लाशन से गंगा भर गइले’ ये पंक्तियां लोगों को आज भी याद हैं। ज्यादातर लोग मुझे ‘यूपी में का बा’ से ही पहचानते हैं। इसलिए यह कहना कि मैं डर की वजह से कुछ लिखना बंद कर रही हूं, पूरी तरह गलत है। सवाल : आप रात में हजरतगंज कोतवाली बयान देने पहुंचीं? जवाब : मुझे तो साजिशकर्ता बताया जाता है, यूपी का गुंडा और वांटेड तक कहा जाता है। जबकि सच्चाई यह है कि मैं कानून की छात्रा नहीं हूं, मैंने विज्ञान पढ़ा है। जैसे ही मैंने नोटिस देखा, मैं सीधे हजरतगंज कोतवाली पहुंच गई। इसके पीछे कोई रणनीति नहीं थी। मुझे बस इतना पता था कि बुलावा आया है, तो जाना जरूरी है। मुझे कानूनी दांव-पेंच नहीं आते। सवाल : आपने बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्या को लेकर प्रधानमंत्री से क्या कहा था? जवाब : मैंने ट्वीट के जरिए प्रधानमंत्री से सिर्फ यह अनुरोध किया था कि बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रही हिंसा को रोका जाए। मैं वहां हो रही हत्याओं को सही नहीं ठहरा रही हूं। प्रधानमंत्री एक बेहद शक्तिशाली पद पर हैं, एक कॉल से भी हालात सुधर सकते हैं। मैंने यह भी कहा कि भारत में भी हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सबकी सुरक्षा बराबर होनी चाहिए। किसी को भी मरने का अधिकार नहीं है। सवाल : भारत के भीतर हुई कई हत्याओं का जिक्र किया, उसका संदर्भ क्या था? जवाब : मैंने रायबरेली, अंकिता भंडारी, इंदौर जैसी घटनाओं का जिक्र इसलिए किया ताकि यह बताया जा सके कि हिंसा किसी भी धर्म के खिलाफ हो, वह गलत है। हिंदुस्तान में भी लोग मारे जा रहे हैं, घर गिराए जा रहे हैं। सवाल यह है कि दोषी कौन है और फैसला कौन करेगा? भीड़ को यह अधिकार किसने दिया कि वह किसी को पीट-पीटकर मार दे? कानून का फैसला अदालत को करना चाहिए, न कि सड़क को। सवाल: कोतवाली से लौटने के बाद आपने वीडियो पोस्ट किया? जवाब : हम एक साधारण, मध्यमवर्गीय और शरीफ परिवार से आते हैं। हमारा कोई आपराधिक बैकग्राउंड नहीं है। गांव-देहात में जब यह खबर जाती है कि पुलिस ने नोटिस दिया है, तो लोग खुद ही मान लेते हैं कि जरूर कुछ गलत किया होगा। दिल्ली में जब पुलिस आई तो पहले सम्मान से बात की, बाद में नजरें बदल गईं। समाज पुलिस-कचहरी का नाम सुनते ही फैसला सुना देता है, यही सबसे दुखद है। सवाल : क्या आप राजनीति में आने पर विचार कर रही हैं? जवाब : फिलहाल मैंने ऐसा कोई ठोस फैसला नहीं किया है। मेरा किसी राजनीति दल से कोई बैर नहीं है। अगर भविष्य में कभी इस तरह का प्रस्ताव आता है, तो उस पर जरूर विचार किया जा सकता है। फिलहाल अभी ऐसा कुछ नहीं है। सवाल : पुलिस जांच को लेकर आपका क्या रुख है? जवाब : मैं पुलिस के हर सवाल का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हूं। जब भी मुझे बुलाया जाएगा, मैं जाऊंगी। मुझे अपने शब्दों और अपने काम पर भरोसा है। मैंने कुछ भी गैर-कानूनी नहीं किया है। मेरी लड़ाई संविधान के भीतर रहकर है और आगे भी रहेगी। ————— संबंधित खबर भी पढ़िए… ‘चौकीदरवा कायर बा’ गाने वाली नेहा की गिरफ्तारी पर रोक:सुप्रीम कोर्ट ने योगी सरकार को भेजा नोटिस, कहा- कोई कार्रवाई नहीं होगी सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को नेहा सिंह राठौर की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद उन्होंने ‘चौकीदरवा कायर बा’… गाना गाया था। इसके बाद वाराणसी और लखनऊ में उनके खिलाफ FIR दर्ज हुई थी। पूरी खबर पढ़ें

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