आज (19 मार्च) हम चैत्र प्रतिपदा के साथ हिंदू नववर्ष का स्वागत कर रहे हैं। लेकिन खगोल विज्ञान के नजरिए से देखें तो समय के चक्र में एक बड़ा बदलाव आ चुका है। प्राचीन काल में जिस दिन चंद्र नववर्ष (प्रतिपदा) होता था, उसी दिन सूर्य भी अपनी पहली राशि ‘मेष’ में प्रवेश करता था। आज स्थिति यह है कि चंद्र नववर्ष और सौर नववर्ष (मेष संक्रांति) के बीच 26 दिनों का बड़ा अंतर आ गया है। इस साल नववर्ष 19 मार्च को है, वहीं सूर्य 14 अप्रैल को मेष राशि में जाएगा। क्यों आया तारीखों में यह अंतर? कुशालपुर दंतेश्वरी मंदिर के प्रधान डॉ. आशुतोष झा के अनुसार, आज से 1700 से 2000 साल पहले (लगभग 285 ईस्वी के आसपास) ये दोनों घटनाएं एक ही दिन होती थीं। उस समय सूर्य और चंद्रमा की गणना में ‘पूर्ण सामंजस्य’ था, जिसका उल्लेख हमारे प्राचीन ग्रंथ ‘सूर्य सिद्धांत’ में मिलता है। तारीखों के इस बड़े अंतर की असली वजह एक खगोलीय घटना है, जिसे ‘अयनचलन’ कहते हैं। ऐसे बढ़ा फासला ज्योतिषाचार्य डॉ. दत्तात्रेय होस्केरे इसे सरल भाषा में समझाते हुए कहते हैं कि, पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमते समय एक ‘लट्टू’ या भंवरे की तरह मामूली सा डगमगाती है। इस डगमगाहट के कारण वह बिंदु (वसंत संपात), जहां से गणना शुरू होती है, हर साल थोड़ा पीछे खिसक जाता है। हालांकि यह बदलाव बहुत सूक्ष्म है, लेकिन 72 सालों में यह 1 डिग्री और 2000 सालों में लगभग 26 दिन का अंतर पैदा कर चुका है। भारतीय गणित का कमाल, ‘अधिकमास’ से सुधारते हैं गलती सौर वर्ष लगभग 365 दिन का होता है और चंद्र वर्ष 354 दिन का। हर साल जो 11 दिन बच जाते हैं, वे 3 साल में एक पूरे महीने के बराबर हो जाते हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पंडित मनीष शर्मा के मुताबिक, भारतीय गणित की श्रेष्ठता इसी में है कि हम हर 32.5 महीने में एक ‘अधिकमास’ जोड़कर इस अंतर को खत्म कर देते हैं। यही कारण है कि अयनचलन के बावजूद हमारे त्योहार (जैसे होली, दिवाली) अपनी सही ऋतुओं में ही आते हैं। दो भागों में बंटे हमारे नववर्ष उत्सव चंद्र नववर्ष (19 मार्च): इसे गुड़ी पड़वा या उगादि कहा जाता है। यह हमारा मानसिक और आध्यात्मिक नववर्ष है। इसी दिन से चैत्र नवरात्रि शुरू होती है, जिसका समापन 27 मार्च को रामनवमी पर होगा। सौर नववर्ष (14 अप्रैल): जब सूर्य वास्तव में मेष राशि में प्रवेश करता है। इसे पंजाब में बैसाखी, बंगाल में पोइला बैशाख और केरल में विशु के रूप में मनाते हैं। यह प्रकृति और फसलों का नववर्ष है।


