हिमाचल के राज्यसभा सांसद अनुराग पर प्रॉपर्टी छिपाने का आरोप:एडवोकेट ने ECI-रिटर्निंग ऑफिसर से की शिकायत, सरकारी ठेकों का मामला भी उठाया

हिमाचल के राज्यसभा सांसद अनुराग पर प्रॉपर्टी छिपाने का आरोप:एडवोकेट ने ECI-रिटर्निंग ऑफिसर से की शिकायत, सरकारी ठेकों का मामला भी उठाया

हिमाचल प्रदेश में निर्वाचित राज्यसभा सांसद अनुराग शर्मा पर नॉमिनेशन के दौरान एफिडेविट में प्रॉपर्टी की जानकारी छिपाने के आरोप लगे हैं। इसे लेकर धर्मशाला की एडवोकेट निताशा कटोच ने रिटर्निंग ऑफिसर एवं सेक्रेटरी विधानसभा, चेयरपर्सन राज्यसभा और चीफ इलेक्शन कमिश्नर को एक शिकायत भेजी है। इसमें आरोप लगाया गया कि अनुराग शर्मा ने कई चल व अचल संपत्तियों की जानकारी शपथ पत्र में नहीं दी, जबकि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 33 के तहत प्रत्याशी को अपनी और अपने परिवार की संपत्तियों की पूरी जानकारी देना अनिवार्य होता है। एडवोकेट निताशा कटोच के अनुसार— अनुराग शर्मा ने कई भूमि संपत्तियों का विवरण हलफनामे में शामिल नहीं किया। उन्होंने बताया कि मुल्थान में जुधार, कूड़धार, बैजनाथ में बीड़ खास, बड़ा भंगाल और मंडी के जोगेंद्रनगर में थारू की प्रॉपर्टी का कोई विवरण नहीं दिया गया। शिकायतकर्ता के अनुसार— एक लाइसेंसी हथियार से जुड़ी जानकारी भी नामांकन के दौरान प्रस्तुत दस्तावेजों में सही तरीके से नहीं दर्शाई गई। उनके अनुसार इस प्रकार की जानकारी छिपाना जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन है। सरकारी ठेके की भी शिकायत की गई शिकायत में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 9A का हवाला देते हुए कहा गया है कि नामांकन के समय अनुराग शर्मा एक सरकारी ठेकेदार के रूप में कार्य कर रहे थे और उनके नाम पर पीडब्ल्यूडी के लगभग 16 करोड़ रुपए के ठेके प्रगति पर बताए गए हैं। शिकायत में कहा गया है कि धारा 9A के तहत सरकार के साथ सक्रिय अनुबंध होने की स्थिति में व्यक्ति चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य ठहराया जा सकता है। रिटर्निंग ऑफिसर पर प्रमाण पत्र जल्दबाजी में देने का आरोप शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस मामले में विधानसभा सचिव द्वारा जल्दबाजी में प्रमाण पत्र जारी किया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि किसी उम्मीदवार के पास सरकारी अनुबंध लंबित हों तो स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही प्रमाण पत्र जारी किया जाना चाहिए था। एफिडेविट में गलत जानकारी देना दंडनीय: निताशा अधिवक्ता निताशा कटोच ने शिकायत में कहा है कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर यह मामला जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 125A के तहत भी कार्रवाई योग्य हो सकता है, क्योंकि चुनावी हलफनामे में गलत या अधूरी जानकारी देना दंडनीय अपराध है। उन्होंने निर्वाचन आयोग, राज्यसभा सचिवालय और संबंधित अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। जानकारी छिपाने के आरोप निराधार: विनय वहीं कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार ने इन आरोपों को निराधार बताया। विनय ने कहा कि उन्होंने खुद अपने सामने अनुराग का नामांकन भरा है। उन्होंने शपथ पत्र में पूरी जानकारी दी है। इन आरोपों पर अनुराग शर्मा का पक्ष जानने को बार बार उनसे मोबाइल पर संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।

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