मियां मुसलमान विवाद पर असम CM को हाइकोर्ट का नोटिस:याचिका में हिमंता को हेट स्पीच देने से रोकने की मांग की गई थी

मियां मुसलमान विवाद पर असम CM को हाइकोर्ट का नोटिस:याचिका में हिमंता को हेट स्पीच देने से रोकने की मांग की गई थी

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा के मियां मुसलामान वाले बयान पर गुवाहाटी हाइकोर्ट ने नोटिस जारी किया है। ये नोटिस राज्य में माइनॉरिटी कम्युनिटी के खिलाफ हेट स्पीच देने से रोकने के लिए निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के बाद जारी किया गया। याचिका में कहा गया था कि CM सरमा के हेट स्पीच के वीडियो वायरल होने के बावजूद, असम पुलिस ने खुद से FIR दर्ज नहीं की है। इसमें दावा किया गया है कि CM के खिलाफ कार्रवाई न करने से सजा से बचने का माहौल और डरावना असर होता है। असमिया स्कॉलर डॉ. हिरेन गोहेन और दो अन्य लोगों ने इसे दायर किया था। इस महीने की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने पहुंचे पिटीशनर्स से कहा था कि वे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाएं। कोर्ट ने केंद्र और असम DGP को भी नोटिस भेजा मामले की सुनवाई के बाद, चीफ जस्टिस आशुतोष कुमार और जस्टिस अरुण देव चौधरी की डिवीजन बेंच ने केंद्र सरकार, असम सरकार, असम डायरेकेटर जनरल ऑफ पुलिस(DGP) और मुख्यमंत्री को नोटिस जाकी किया। कोर्ट ने अंतरिम राहत की अर्जी पर भी नोटिस जारी किया। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस स्टेज पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) को नोटिस जारी करना जरूरी नहीं है। अभिषेक मनु सिंघवी बोले- CM ने पद की शपथ, सेक्युलरिज्म और भाईचारे का उल्लंघन किया एक पिटीशनर की ओर से पेश हुए सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि इस व्यक्ति के काम की एक जैसी, लगातार और आदतन प्रकृति को देखिए। वह अपने पद की शपथ और आर्टिकल 14, 15 के हर जाने-माने नियम, प्रस्तावना के शब्दों, सेक्युलरिज्म और भाईचारे और BNS के नियमों का उल्लंघन कर रहा है। सिंघवी ने कहा कि जब कोई पब्लिक ऑफिस की शपथ लेता है, खासकर राज्य का CM, तो ऐसे मामले मंजूर नहीं हैं। सिंघवी ने 2023 में छत्तीसगढ़ में सरमा की एक कथित टिप्पणी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लव जिहाद और गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन पर CM की टिप्पणियों का पूरे भारत में असर था। अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ अपमानजनक बातें की गईं, उन्हें ‘मिया मुस्लिम’ कहा गया। असम के स्कॉलर डॉ. हिरेन गोहेन की तरफ से पेश हुए सीनियर वकील सीयू सिंह ने कहा… अब जानिए मामला क्या है? असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 27 जनवरी को कहा था कि राज्य में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में 4 से 5 लाख मिया मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाएंगे। उन्होंने कहा था कि हिमंत बिस्व सरमा और भाजपा सीधे तौर पर मिया समुदाय के खिलाफ हैं। उन्होंने लोगों से मिया समुदाय को परेशान करने की अपील की। उनका कहना था कि जब तक उन्हें परेशानी नहीं होगी, वे असम नहीं छोड़ेंगे। मिया बांग्ला भाषी मुसलमानों के लिए इस्तेमाल होने वाला एक अपमानजनक शब्द है। असम सीएम के मुताबिक वे मूल निवासियों के संसाधनों, नौकरियों और जमीन पर कब्जा कर रहे हैं। तिनसुकिया जिले के डिगबोई में एक कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से सरमा ने कहा वोट चोरी का मतलब यह है कि हम कुछ मिया वोट चुराने की कोशिश कर रहे हैं। आदर्श रूप से उन्हें असम में वोट डालने की अनुमति नहीं होनी चाहिए, बल्कि बांग्लादेश में वोट देना चाहिए। सीएम ने कहा, हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि वे असम में वोट न कर सकें। सरमा बोले थे- अगर वो 5 रुपए मांगे तो 4 रुपए दो हिमंत बिस्व सरमा ने आगे कहा था कि जो कोई भी किसी भी तरह से मिया को परेशानी दे सकता है, वह दे। आप भी इसमें शामिल हैं। रिक्शा में अगर किराया 5 रुपये है, तो उन्हें 4 रुपये दीजिए। जब तक उन्हें परेशानी नहीं होगी, वे असम नहीं छोड़ेंगे। ————— ये खबर भी पढ़ें… असम CM बोले- कांग्रेस को सिर्फ अवैध बांग्लादेशियों की चिंता, हजार राहुल गांधी-गौरव गोगोई मेरी कुछ नहीं कर सकते, मियां मुसलमान मेरा गढ़ा शब्द नहीं असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 1 फरवरी को कहा कि कांग्रेस को सिर्फ अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की चिंता है, न कि असम के मूल निवासियों के हितों की। उन्होंने कहा कि हजार गौरव गोगोई और राहुल गांधी भी मेरा कुछ नहीं कर पाएंगे। मिया मुसलमान विवाद पर उन्होंने कहा कि मिया मुसलमानों शब्द मैंने नहीं गढ़ा है और यह शब्द खुद वो समुदाय इस्तेमाल करता है जो बांग्लादेश से आकर बस गए हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने खुद इस शब्द को इस्तेमाल किया है। पूरी खबर पढ़ें…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *