मास्टर प्लान सड़क विवाद में हाईकोर्ट का फैसला:नेहरू प्रतिमा से छावनी पुल मार्ग पर निगम का नोटिस निरस्त, कार्रवाई को बताया अनुचित

मास्टर प्लान सड़क विवाद में हाईकोर्ट का फैसला:नेहरू प्रतिमा से छावनी पुल मार्ग पर निगम का नोटिस निरस्त, कार्रवाई को बताया अनुचित

नेहरू प्रतिमा (मधुमिलन चौराहा) से छावनी पुल तक प्रस्तावित मास्टर प्लान सड़क के मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने नगर निगम की कार्रवाई को अनुचित ठहराते हुए जारी नोटिस को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने निगम को निर्देश दिया है कि वह मामले में पुनः सुनवाई कर विधिसम्मत आदेश पारित करे। मामला इंदौर नगर निगम के जोन-11 के भवन अधिकारी द्वारा जारी उस नोटिस से जुड़ा है, जिसमें उक्त मार्ग को बाधक बताते हुए याचिकाकर्ता बसंत रावत के मकान को सात दिन के भीतर हटाने का निर्देश दिया गया था। नोटिस के बाद छावनी क्षेत्र के व्यापारियों और निगम प्रशासन के बीच विवाद की स्थिति बन गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट जयेश गुरनानी के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर निगम की कार्रवाई को चुनौती दी गई। याचिका में कहा गया कि संबंधित मकान नगर निगम की अनुमति एवं स्वीकृत नक्शे के अनुसार निर्मित है, ऐसे में उसे हटाने की कार्रवाई विधिसम्मत नहीं है। सुनवाई के दौरान गुरनानी ने तर्क दिया कि 27 मई 2014 को नगर निगम ने स्वयं आदेश जारी कर उक्त सड़क की चौड़ाई 60 फीट (18 मीटर) निर्धारित की थी, जबकि वर्तमान नोटिस में सड़क की चौड़ाई 24 मीटर (80 फीट) बताई गई है, जो पूर्व आदेश के विपरीत है। साथ ही यह भी दलील दी गई कि इंदौर विकास योजना 2021 की वैधता को हाई कोर्ट पहले ही समाप्त घोषित कर चुका है, इसलिए उसके आधार पर कार्रवाई नहीं की जा सकती। याचिकाकर्ता की उपस्थिति में सड़क की सेंट्रल अलाइनमेंट भी निर्धारित नहीं की गई थी। इन तर्कों से सहमत होते हुए कोर्ट ने नगर निगम द्वारा जारी नोटिस को शून्य घोषित कर दिया तथा निगम को पुनः सुनवाई कर वैधानिक प्रक्रिया के तहत निर्णय लेने के निर्देश दिए। हाईकोर्ट के इस फैसले से छावनी क्षेत्र के व्यापारियों और प्रभावित पक्षों को राहत मिली है।

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