मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने शहर में डिवाइडर और फुटपाथ पर लगे अवैध होर्डिंग्स को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने इंदौर नगर निगम को निर्देश दिए हैं कि नियमों के विरुद्ध लगाए गए होर्डिंग्स की पहचान कर उनके खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की जाए। यह आदेश जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें याचिकाकर्ता सुदेश गुप्ता की ओर से अधिवक्ता अभिनव पी. धनोडकर ने पैरवी की। याचिका में आरोप लगाया गया कि निजी पक्षों को विज्ञापन अधिकार देने और शहर में यूनिपोल या होर्डिंग्स लगाने का कार्य मध्यप्रदेश आउटडोर विज्ञापन मीडिया नियम, 2017 के प्रावधानों के विपरीत किया गया है। सुनवाई के दौरान एडवोकेट धनोडकर ने तर्क दिया कि नियमों के अनुसार डिवाइडर और फुटपाथ पर किसी भी प्रकार के होर्डिंग्स की अनुमति नहीं है, इसके बावजूद बड़ी संख्या में ऐसे होर्डिंग्स लगाए गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इनसे आम नागरिकों की आवाजाही बाधित हो रही है और सड़क सुरक्षा पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। याचिका के साथ प्रस्तुत तस्वीरों में भी शहर के विभिन्न स्थानों पर ऐसे होर्डिंग्स दिखाए गए। मामले की सुनवाई में राज्य शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता अमित भाटिया उपस्थित रहे। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। साथ ही, याचिकाकर्ता को सात कार्य दिवस के भीतर रजिस्टर्ड डाक से नोटिस भेजने और चार सप्ताह के भीतर उसकी वापसी सुनिश्चित करने को कहा गया है। अंतरिम आदेश में न्यायालय ने विशेष रूप से नगर निगम आयुक्त को निर्देशित किया है कि वे डिवाइडर और फुटपाथ पर नियमों के विरुद्ध लगे सभी होर्डिंग्स की जांच कर उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करें। यह आदेश न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ द्वारा पारित किया गया। मामले की अगली सुनवाई नियत समय पर होगी।


