इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने जिलाधिकारी लखनऊ को मंगलवार को कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया है। यह मामला राजधानी के प्रसिद्ध शिक्षण संस्थान ला मार्टिनियर की जमीन को बिना उचित प्रक्रिया के अधिग्रहण करने के प्रयास के आरोपों से संबंधित है। न्यायालय ने पूर्व में जमीन की पैमाइश का आदेश दिया था, जिसका अनुपालन न होने पर यह निर्देश जारी किया गया। यह आदेश न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने ला मार्टिनियर कॉलेज की याचिका पर पारित किया। याचिका में बताया गया है कि कोठी मार्टिन साहब, गणेशगंज स्टेशन स्थित कॉलेज की जमीनें हैं, जहां से ग्रीन कॉरिडोर प्रोजेक्ट के तहत सड़क और फ्लाईओवर का निर्माण करने की सरकारी योजना है। कॉलेज ने आरोप लगाया है कि यह निर्माण संस्थान के मालिकाना हक वाली जमीनों पर किया जा रहा है, जबकि लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए), जिला प्रशासन या राज्य सरकार ने न तो संस्थान की सहमति ली है और न ही कोई अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू की है। याचिका पर सुनवाई करते हुए, न्यायालय ने 27 फरवरी को संबंधित जमीनों की पैमाइश का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि राज्य सरकार के अधिकारियों और संस्थान के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में उप जिलाधिकारी, सदर पैमाइश कर रिपोर्ट न्यायालय को सौंपेंगे। सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान, संस्थान की ओर से एलडीए उपाध्यक्ष द्वारा मुख्य सचिव (जो लखनऊ ला मार्टिनियर चैरिटीज के पदेन वरिष्ठ ट्रस्टी भी हैं) को 27 फरवरी को भेजा गया एक पत्र प्रस्तुत किया गया। इस पत्र में संस्थान की जमीनों पर नौ पिलर के निर्माण के लिए सहमति मांगी गई थी। संस्थान ने आरोप लगाया कि बिना प्रक्रिया का पालन किए उसकी जमीनों पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। जब न्यायालय ने राज्य सरकार के अधिवक्ता से पैमाइश के संबंध में पूछा, तो उन्होंने बताया कि अभी तक पैमाइश की कोई प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। इस पर न्यायालय ने जिलाधिकारी को आदेश दिया कि वे उपस्थित होकर आदेश का अनुपालन न करने पर स्पष्टीकरण दें। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि उन्हें सुनने के बाद अवमानना की कार्यवाही भी शुरू की जा सकती है।


