इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मैनपुरी जिले में वर्ष 2009 की पुलिस अभिरक्षा में मौत मामले में कड़ा रुख अपनाया है।
न्यायालय ने घटना से संबंधित वीडियो रिकॉर्डिंग, फोटोग्राफ और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य तत्काल प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता श्री अंकुर शर्मा तथा राज्य की ओर से अपर महाधिवक्ता, वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष गोयल ने पक्ष रखा। महत्वपूर्ण तथ्य अब भी अस्पष्ट हैं न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन तथा न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने कहा कि मामले में कई महत्वपूर्ण तथ्य अब भी अस्पष्ट हैं, विशेषकर घटना के वीडियो और फोटो के संबंध में। राज्य सरकार की ओर से यह कहा गया कि ये सभी साक्ष्य राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भेजे गए थे, लेकिन इसका कोई ठोस दस्तावेजी प्रमाण अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया। मृतक ने प्रेम प्रसंग के चलते आत्महत्या की अदालत ने यह भी नोट किया कि आयोग ने वर्ष 2011 में मामले को बंद करते हुए यह निष्कर्ष निकाला था कि मृतक ने प्रेम प्रसंग के चलते आत्महत्या की थी और उसमें पुलिस की कोई भूमिका नहीं थी। हालांकि, मानवाधिकार आयोग के आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि उसने किन साक्ष्यों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला, और क्या उसने कथित वीडियो व फोटोग्राफ का परीक्षण किया था या नहीं। मामले में अपर जिलाधिकारी द्वारा दाखिल हलफनामा भी न्यायालय को संतोषजनक नहीं लगा। अदालत ने कहा कि साक्ष्यों की कड़ी पूरी तरह अस्पष्ट है, जिससे जांच की निष्पक्षता पर प्रश्न उठता है। अदालत ने निर्देश दिया है कि आयोग का रजिस्ट्रार सभी संबंधित वीडियो, फोटोग्राफ और दस्तावेज तुरंत राज्य सरकार को वापस करे। राज्य का अधिकृत अधिकारी इन साक्ष्यों की सूची तैयार कर उन्हें न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करेगा। पीठ ने चेतावनी दी कि यदि अगली सुनवाई तक ये साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए, तो अदालत केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो से जांच कराने पर विचार कर सकती है। इसके साथ ही तत्कालीन एसडीएम और पुलिस अधीक्षक को भी व्यक्तिगत हलफनामे दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 5 मई 2026 को दोपहर 3 बजे निर्धारित की गई है। कोर्ट ने एस डी एम को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का भी निर्देश दिया है।ऐसा न करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी है। तत्कालीन एस पी मैनपुरी से भी दन्नाहार थाने की घटना पर हलफनामा मांगा है।


