ग्वालियर हाईकोर्ट की एकल पीठ ने साल 2005 से लंबित एक द्वितीय अपील को खारिज कर दिया है। यह अपील 24 हजार 219 रुपए के बिजली बिल से जुड़े 21 साल पुराने कानूनी विवाद से संबंधित थी। न्यायमूर्ति दीपक खोत ने इस अपील की सुनवाई की। यह मामला अनिल कुमार गर्ग द्वारा दायर एक वाद से जुड़ा था। गर्ग ने 24,219 रुपए के बिजली बिल को अवैध बताते हुए इसे रद्द करने और स्थायी निषेधाज्ञा की मांग की थी। उनका आरोप था कि विभाग ने बिना उचित निरीक्षण के अधिक लोड और अनियमित उपयोग का हवाला देकर बिल जारी किया था, और मीटर को गलत तरीके से छेड़छाड़ युक्त बताया था। निचली अदालतों के निष्कर्ष तथ्यात्मक माने ट्रायल कोर्ट ने वादी द्वारा साक्ष्य प्रस्तुत न करने के आधार पर इस वाद को खारिज कर दिया था। प्रथम अपीलीय न्यायालय ने भी इस निर्णय को बरकरार रखा, यह मानते हुए कि वादी को पर्याप्त अवसर दिए गए थे, लेकिन वह साक्ष्य देने के लिए उपस्थित नहीं हुआ। न्यायालय ने यह भी कहा कि संशोधन आवेदन केवल कार्यवाही को लंबित रखने के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया था। न्यायमूर्ति दीपक खोत ने अपने फैसले में कहा कि निचली अदालतों के निष्कर्ष तथ्यात्मक थे और उनमें कोई विधिक त्रुटि या विकृति नहीं पाई गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि द्वितीय अपील में तभी हस्तक्षेप संभव है जब कोई महत्वपूर्ण विधिक प्रश्न उत्पन्न हो। केवल साक्ष्यों के पुनः आकलन के लिए धारा 100 सीपीसी के तहत हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता, खासकर जब निचली अदालतों ने तथ्यों के आधार पर समान निष्कर्ष दिए हों।


