High Blood Pressure Injection: साल में सिर्फ 2 इंजेक्शन और बीपी कंट्रोल? जानें भारत में कब तक आ सकती है यह जादुई दवा

High Blood Pressure Injection: साल में सिर्फ 2 इंजेक्शन और बीपी कंट्रोल? जानें भारत में कब तक आ सकती है यह जादुई दवा

High Blood Pressure Injection: हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) के इलाज में आने वाले समय में बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अभी तक मरीजों को रोज दवा खानी पड़ती है, लेकिन भविष्य में साल में सिर्फ 2 इंजेक्शन लगवाकर ही ब्लड प्रेशर कंट्रोल किया जा सकेगा। सुनने में भले ही यह भविष्य की बात लगे, लेकिन वैज्ञानिक इस दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं और कई नई दवाएं अंतिम चरण के ट्रायल में हैं।

दुनिया भर में ब्लड प्रेशर की दवाएं सालों से मौजूद हैं, फिर भी इसे कंट्रोल करना आसान नहीं हो पाया है। विशेषज्ञों का कहना है कि समस्या दवाओं की कमी नहीं, बल्कि मरीजों का दवा नियमित न लेना, इलाज से थक जाना और हेल्थ सिस्टम की कमियां हैं। World Health Organization के अनुसार, 140/90 mm Hg या उससे ज्यादा ब्लड प्रेशर को हाइपरटेंशन माना जाता है। सामान्य ब्लड प्रेशर 120/80 mm Hg से कम होना चाहिए।

दुनिया और भारत में स्थिति चिंताजनक

आज दुनिया में करीब 1.4 अरब लोग हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित हैं, लेकिन उनमें से बहुत से लोगों को पता ही नहीं कि उन्हें यह बीमारी है। जिनका इलाज चल भी रहा है, उनमें से भी बहुत कम लोगों का ब्लड प्रेशर सही कंट्रोल में है। भारत में भी हालात ऐसे ही हैं। Indian Council of Medical Research की रिपोर्ट के मुताबिक करोड़ों भारतीय हाई बीपी से जूझ रहे हैं, लेकिन बड़ी संख्या में लोगों का ब्लड प्रेशर नियंत्रण में नहीं है।

रोज की गोली से साल में 2 इंजेक्शन तक

अब तक हाई बीपी का इलाज रोज की दवाओं से ही होता आया है। लेकिन कई मरीजों को डायबिटीज, मोटापा और कोलेस्ट्रॉल जैसी दूसरी बीमारियां भी होती हैं, जिससे उन्हें कई दवाएं लेनी पड़ती हैं। समय के साथ लोग दवा लेना भूल जाते हैं या दवा से थक जाते हैं। Dr Mohit Gupta, जो G B Pant Hospital और University College of Medical Sciences से जुड़े हैं, बताते हैं कि अब रिसर्च ऐसे इंजेक्शन पर हो रही है जो शरीर में ब्लड प्रेशर बढ़ाने वाली प्रक्रिया को शुरुआत में ही रोक देते हैं।

कुछ नई दवाएं जीन स्तर पर काम करती हैं और ब्लड प्रेशर बढ़ाने वाले हार्मोन के बनने को कम कर देती हैं। इन पर Roche Pharma और Alnylam जैसी कंपनियां काम कर रही हैं। वहीं Novo Nordisk सूजन कम करने वाली थेरेपी विकसित कर रही है, जिससे दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी घट सकता है।

फायदे बड़े, लेकिन चिंता भी

इन इंजेक्शन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि मरीज को रोज दवा लेने की जरूरत नहीं होगी। इससे इलाज सही तरीके से चलता रहेगा और हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा कम हो सकता है। लेकिन कुछ चिंताएं भी हैं। सबसे बड़ी समस्या कीमत हो सकती है, क्योंकि ऐसी नई दवाएं अक्सर बहुत महंगी होती हैं। दूसरी चिंता यह है कि इनके लंबे समय तक इस्तेमाल के प्रभाव अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं। Dr Dorairaj Prabhakaran का मानना है कि साल में एक या दो बार लगने वाले इंजेक्शन भविष्य में इलाज को आसान बना सकते हैं, लेकिन इन्हें अपनाने से पहले सुरक्षा और कीमत दोनों पर गंभीरता से विचार जरूरी है।

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