‘यूरोलॉजी समस्या को छिपाना सबसे बड़ी गलती’:इंदौर में जुटे देश-विदेश के 70 एक्सपर्ट्स, बोले- 40 साल की उम्र के बाद सालाना जांच जरूरी

‘यूरोलॉजी समस्या को छिपाना सबसे बड़ी गलती’:इंदौर में जुटे देश-विदेश के 70 एक्सपर्ट्स, बोले- 40 साल की उम्र के बाद सालाना जांच जरूरी

आजकल किडनी स्टोन, प्रोस्टेट बढ़ना (BPH), पेशाब में जलन या खून आना, बार-बार यूरिन इंफेक्शन और ब्लैडर-किडनी कैंसर जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। कम पानी पीना, जंक फूड, धूम्रपान, लंबे समय तक बैठकर काम करना और पेशाब रोकना इसके मुख्य कारण हैं। इनसे बचने के लिए रोज 3-4 लीटर पानी पिएं, नियमित व्यायाम करें, नमक और तले-भुने भोजन से बचें और 40 वर्ष की उम्र के बाद सालाना जांच जरूर कराएं। ये बातें इंदौर में आयोजित यूरोलॉजी की इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस USICON-2026 के दूसरे दिन देश-विदेश से आए एक्सपर्ट्स ने अपने जागरूकता संदेश में कहीं हैं। उन्होंने चेताया कि पेशाब में दर्द, रुकावट, खून, कमर दर्द या रात में बार-बार उठना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज करना गंभीर बीमारी को न्योता दे सकता है। कम दिनों तक भर्ती और जल्दी रिकवरी हो फोकस
ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. सुशील भाटिया ने कहा- USICON को सिर्फ एक मेडिकल कॉन्फ्रेंस के रूप में नहीं, बल्कि हेल्थ मिशन के रूप में डिजाइन किया है। यहां दिखाई जा रही रोबोटिक और लेजर तकनीकें मरीजों के लिए वरदान हैं। कम दर्द, कम खून, कम दिनों तक अस्पताल में भर्ती और जल्दी रिकवरी हो, यह खास फोकस है। इंदौर इलाज के लिए भी देश की पहली पसंद बने। ऑर्गनाइजिंग कमेटी के चेयरमैन डॉ. संजय शिंदे ने कहा डॉक्टरों का यह आयोजन समाज से जुड़ा हुआ दिखे इसलिए साइक्लोथॉन, मैराथन और हेरिटेज वॉक जैसे कार्यक्रम रखे गए। स्वस्थ जीवनशैली ही हर बीमारी की पहली दवा है। अगर लोग फिट रहेंगे तो अस्पतालों की जरूरत ही कम पड़ेगी। बड़े स्तर की लाइव सर्जरी गर्व की बात ऑर्गनाइजिंग कमेटी के ट्रेजरर डॉ. नीतीश पाटीदार ने बताया 70 से ज्यादा इंटरनेशनल फैकल्टी और इतने बड़े स्तर की लाइव सर्जरी इंदौर में होना हमारे लिए गर्व की बात है। यह आयोजन शहर की क्षमता, इंफ्रास्ट्रक्चर और मेडिकल एक्सीलेंस को दुनिया के सामने दिखा रहा है। इससे मेडिकल टूरिज्म को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा। को-ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. रवि नागर ने कहा कि हर सेशन को प्रैक्टिकल बनाया है ताकि डॉक्टर सिर्फ सुनें नहीं, बल्कि देखकर और समझकर सीखें। यहां सीखी गई तकनीकें छोटे शहरों और गांवों तक बेहतर इलाज पहुंचाने में मदद करेंगी। हमारा लक्ष्य मरीज की जिंदगी आसान बनाना है। सही इलाज से बीमारियां हो सकती हैं पूरी तरह ठीक
को-ऑर्गनाइजिंग चेयरमैन डॉ. श्याम अग्रवाल ने लोग अक्सर यूरोलॉजी की समस्याओं को शर्म या लापरवाही में छिपा लेते हैं। यही सबसे बड़ी गलती है। समय पर जांच और सही विशेषज्ञ से इलाज कराने पर ज्यादातर बीमारियां पूरी तरह ठीक हो सकती हैं। जागरूकता ही असली इलाज है और USICON इसी जागरूकता को बढ़ाने का मंच बन रहा है। सर्जरी की नई तकनीकों का किया प्रदर्शन ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में 70 से अधिक अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी और देश के वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट्स ने दिनभर रोबोटिक, लेजर और मिनिमली इनवेसिव सर्जरी की नई तकनीकों का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम की शुरुआत योग सत्र से हुई। इसके बाद सेमी-लाइव सर्जिकल सेशन, इंटरनेशनल सोसाइटी लेक्चर, यूरो-ऑन्कोलॉजी केस डिस्कशन, एंडो-यूरोलॉजी अपडेट्स और विश्वस्तरीय विशेषज्ञों द्वारा लाइव सर्जरी का सीधा प्रसारण किया गया। अलग-अलग हॉल में एक साथ कई सत्र चलते रहे, जहां युवा डॉक्टरों ने ऑपरेशन थिएटर की बारीकियां बड़े स्क्रीन पर रियल टाइम में देखीं और सीखी। पूरा दिन ‘देखो–समझो–सीखो’ थीम पर केंद्रित रहा। दोपहर बाद मेहमानों के लिए हेरिटेज वॉक का आयोजन किया गया। इसमें देश-विदेश से आए डॉक्टरों ने राजबाड़ा, सराफा और पुराने इंदौर की गलियों के इतिहास को जाना। आयोजकों का कहना है कि मेहमान यहां से केवल मेडिकल ज्ञान ही नहीं, बल्कि इंदौर की संस्कृति, स्वाद और आत्मीयता की यादें भी साथ लेकर जाएं। इससे पहले सुबह 6 बजे सुपर कॉरिडोर पर सैकड़ों डॉक्टर, सर्जन और युवा रेजिडेंट्स साइक्लोथॉन में शामिल हुए। सफेद कोट की जगह स्पोर्ट्स गियर में ये एक्सपर्ट्स साइकिल चलाते हुए फिटनेस और एक्टिव लाइफस्टाइल का संदेश देते नजर आए। “डॉक्टर फिट तो देश फिट” का नारा पूरे रास्ते गूंजता रहा। 1 फरवरी को ‘पास द बैटन ऑफ लाइफ’ थीम पर होने वाली मैराथन को लेकर भी प्रतिभागियों में खासा उत्साह है, जो ऑर्गन डोनेशन और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश देगी।

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