मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शनिवार को असम में चुनाव प्रचार की शुरुआत की। उन्होंने कोकराझार जिले के गोसाईंगांव विधानसभा क्षेत्र में झामुमो प्रत्याशी फ्रेडरिक्सन हांसदा के पक्ष में जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान हेमंत सोरेन ने झारखंड की वीर परंपरा का उल्लेख किया। कहा, यहां के आदिवासियों ने आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और कभी गुलामी स्वीकार नहीं की। उन्होंने कहा कि अब झुकने का समय नहीं, बल्कि अधिकार लेने का समय है। उन्होंने कहा कि यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि आदिवासी और वंचित समाज के अधिकारों को घर-घर तक पहुंचाने का अभियान है। हेमंत सोरेन ने कहा कि असम के चाय बागान में काम करने वाले लोगों को अबतक उनका अधिकार नहीं मिल पाया है। हम उस अधिकार के लिए आपके संघर्ष के साथ हैं।
भाजपा देने वाला नहीं, बल्कि लेने वाला हाथ है: हेमंत सोरेन ने आरोप लगाया कि भाजपा देने वाला नहीं, बल्कि लेने वाला हाथ है। कुछ लोग पैसे के बल पर संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग करते हैं। चुनाव के समय मंच से मीठी-मीठी बातें करते हैं, जबकि जमीनी सच्चाइयों से दूर रहते हैं। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, प्रोफेसर बनाना ही वास्तविक सशक्तीकरण है। झारखंड के सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था बेहतर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि आज झारखंड में निजी स्कूलों से अपने बच्चों को हटाकर अभिभावक सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। सरकारी स्कूलों की 9,000 सीटों के लिए 40 हजार बच्चों ने परीक्षा दी। यह बेहतर शिक्षा व्यवस्था का परिणाम है। उन्होंने शिक्षा को आज की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए सभी से अपने बच्चों को शिक्षित करने पर बल दिया। बताया कि झारखंड में आदिवासी युवाओं की उच्च शिक्षा का पूरा खर्च सरकार द्वारा वहन करने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि असम में भी ऐसी ही व्यवस्था लाना चाहते हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शनिवार को असम में चुनाव प्रचार की शुरुआत की। उन्होंने कोकराझार जिले के गोसाईंगांव विधानसभा क्षेत्र में झामुमो प्रत्याशी फ्रेडरिक्सन हांसदा के पक्ष में जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान हेमंत सोरेन ने झारखंड की वीर परंपरा का उल्लेख किया। कहा, यहां के आदिवासियों ने आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और कभी गुलामी स्वीकार नहीं की। उन्होंने कहा कि अब झुकने का समय नहीं, बल्कि अधिकार लेने का समय है। उन्होंने कहा कि यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि आदिवासी और वंचित समाज के अधिकारों को घर-घर तक पहुंचाने का अभियान है। हेमंत सोरेन ने कहा कि असम के चाय बागान में काम करने वाले लोगों को अबतक उनका अधिकार नहीं मिल पाया है। हम उस अधिकार के लिए आपके संघर्ष के साथ हैं।
भाजपा देने वाला नहीं, बल्कि लेने वाला हाथ है: हेमंत सोरेन ने आरोप लगाया कि भाजपा देने वाला नहीं, बल्कि लेने वाला हाथ है। कुछ लोग पैसे के बल पर संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग करते हैं। चुनाव के समय मंच से मीठी-मीठी बातें करते हैं, जबकि जमीनी सच्चाइयों से दूर रहते हैं। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, प्रोफेसर बनाना ही वास्तविक सशक्तीकरण है। झारखंड के सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था बेहतर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि आज झारखंड में निजी स्कूलों से अपने बच्चों को हटाकर अभिभावक सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। सरकारी स्कूलों की 9,000 सीटों के लिए 40 हजार बच्चों ने परीक्षा दी। यह बेहतर शिक्षा व्यवस्था का परिणाम है। उन्होंने शिक्षा को आज की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए सभी से अपने बच्चों को शिक्षित करने पर बल दिया। बताया कि झारखंड में आदिवासी युवाओं की उच्च शिक्षा का पूरा खर्च सरकार द्वारा वहन करने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि असम में भी ऐसी ही व्यवस्था लाना चाहते हैं।


