-कलेक्टर के आदेश का दिखा असर, बिना हेलमेट वालों पर कार्रवाई की चेतावनी
बैतूल। जिले में सडक़ सुरक्षा को लेकर प्रशासन की सख्ती अब दिखाई देने लगी है। 15 मार्च से सभी शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों के लिए दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनना अनिवार्य किए जाने के आदेश का असर सोमवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय में देखने को मिला। पहले ही दिन कई पुरुष और महिला कर्मचारी हेलमेट पहनकर कार्यालय पहुंचे। हालांकि कुछ कर्मचारी बिना हेलमेट के भी नजर आए।
कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आदेश का पालन नहीं करने वाले कर्मचारियों पर ट्रैफिक पुलिस द्वारा जुर्माने सहित आवश्यक चालानी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा चार पहिया वाहन चालकों के लिए सीट बेल्ट लगाना भी अनिवार्य किया गया है, लेकिन कई अधिकारियों के वाहन चालकों द्वारा सीट बेल्ट का उपयोग नहीं किए जाने की स्थिति भी सामने आई है।
कलेक्ट्रेट गेट पर लगाया गया सूचना बोर्ड
हेलमेट के नियम को सख्ती से लागू करने के लिए कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर एक तख्ती भी लगा दी गई है। इस पर बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाने वालों पर 500 रुपये की चालानी कार्रवाई किए जाने का उल्लेख किया गया है। कलेक्टर के आदेश के बाद कई विभाग प्रमुखों ने भी अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को हेलमेट पहनकर आने के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद पहले दिन इसका प्रभाव पूरी तरह नजर नहीं आया। कार्रवाई के डर से कुछ कर्मचारी ही हेलमेट लगाकर पहुंचे, जबकि कई कर्मचारी बिना हेलमेट के वाहन चलाते हुए दिखाई दिए।
मॉनिटरिंग को लेकर उठ रहे सवाल
हेलमेट अनिवार्य करने का आदेश जारी होने के बाद इसकी मॉनिटरिंग को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अभी तक यह तय नहीं किया गया है कि कौन यह जांच करेगा कि कर्मचारी हेलमेट पहनकर दफ्तर आ रहे हैं या नहीं। इसके अलावा चालानी कार्रवाई कौन करेगा, यह भी स्पष्ट नहीं है, क्योंकि यातायात पुलिस का अमला पहले से ही ट्रैफिक व्यवस्था और अन्य विभागीय कार्यों में व्यस्त रहता है, ऐसे में बिना हेलमेट वालों के खिलाफ नियमित कार्रवाई कैसे होगी, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।
इनका कहना
-जागरूकता के उद्देश्य से हमनें हेलमेट को अनिवार्य किया है। एक-दो दिन के बाद हेलमेट नहीं लगाने वाले वाहन चालकों को विरूद्ध कार्रवाई के लिए अभियान चलाएंगे। इसकी मॉनिटरिंग की व्यवस्था भी की जा रही है।
- नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी, कलेक्टर बैतूल।


