4साल में जबलपुर के 242 मासूमों के दिल का ऑपरेशन:मुंबई से आए 40 डॉक्टरों ने लगाया हेल्थ कैंप, स्क्रीनिंग की; 100 से अधिक बच्चों की हुई जांच

स्वास्थ्य विभाग के तत्वावधान में शुक्रवार को जबलपुर के ज्वाइंट डायरेक्टर हेल्थ ऑफिस में एक बड़ा जांच शिविर आयोजित हुआ। इसमें कटनी, सिवनी, बालाघाट समेत आसपास जिलों से दिल संबंधी बीमारियों से पीड़ित बच्चों को परीक्षण के लिए लाया गया। शिविर में नारायणा हॉस्पिटल के सीनियर पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सुप्रीतम सेन ने 100 से अधिक बच्चों की जांच की। उन्होंने उन बच्चों का भी फॉलो-अप परीक्षण किया, जिनकी पहले दिल में छेद की सर्जरी हो चुकी है। इससे पहले जबलपुर के 242 बच्चे, जिनके दिल में जन्मजात छेद था, उनका सफल ऑपरेशन मुंबई स्थित नारायणा हॉस्पिटल में किया जा चुका है। सभी बच्चे अब पूरी तरह स्वस्थ बताए जा रहे हैं। 40 डॉक्टरों की टीम लगी थी बच्चों को लाने में बच्चों को शिविर तक लाने और जांच की व्यवस्था के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक हफ्ते पहले से तैयारी शुरू कर दी थी। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की 40 से अधिक डॉक्टरों की टीम ने आंगनबाड़ियों और स्कूलों में जाकर पहले ऐसे बच्चों की पहचान की, जिनके दिल में छेद की आशंका थी। चिन्हित बच्चों को शुक्रवार को परिजनों सहित कैंप तक लाया गया। आरबीएसके की डॉक्टर डॉ. नाजिया ने बताया कि 0 से 6 साल तक के बच्चों की स्क्रीनिंग आंगनबाड़ी केंद्रों में और 7 से 18 साल तक के बच्चों की जांच स्कूलों में की जाती है। उन्होंने कहा कि अधिकांश बच्चे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से होते हैं, जो महंगा इलाज नहीं करा पाते। ऐसे में उनकी मेडिकल हिस्ट्री तैयार कर आरबीएसके के माध्यम से लाखों रुपए तक का निशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जाता है। 7 साल बाद लगा कैंप 7 साल बाद बच्चों के हृदय रोग जांच शिविर का आयोजन हुआ। नारायणा अस्पताल का पहला कैंप साल 2019 में जबलपुर में लगा था, जिसके बाद 2026 में फिर विशेषज्ञ टीम पहुंची। वरिष्ठ पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सुप्रीतम सेन ने शुक्रवार को बच्चों के दिल का इको परीक्षण किया। जांच में अधिकांश बच्चे स्वस्थ पाए गए। जिन बच्चों को आगे की जांच के लिए मुंबई भेजा जाना था, उनका परीक्षण भी यहीं कर लिया गया। डॉ. सेन ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि जिन बच्चों के दिल में छेद, लीकेज या ब्लॉकेज की समस्या थी, उनकी विशेष जांच की गई। उन्होंने कहा कि यदि ऐसे बच्चों का समय पर इलाज हो जाए तो उनकी जान बचाई जा सकती है और उपचार के बाद वे सामान्य जीवन जीते हैं। बच्चों के दिल में छेद के लक्षण क्या हैं? पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सुप्रीतम सेन के अनुसार जिन बच्चों के दिल में छेद होता है, उनमें कुछ खास लक्षण दिखते हैं। ऐसे बच्चे दूध पीते-पीते जल्दी थक जाते हैं, अधिक पसीना आता है, सांस तेज चलती है और वजन सामान्य रूप से नहीं बढ़ता। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, उसे बार-बार सर्दी-खांसी की समस्या होने लगती है और कई बार रोते समय शरीर या होंठ नीले पड़ जाते हैं। डॉक्टर का कहना है कि दिल में छेद का इलाज पूरी तरह संभव है, बशर्ते बच्चे को समय पर अस्पताल पहुंचाकर सही उपचार कराया जाए। आरबीएसके बना बच्चों का सहारा आरबीएसके प्रभारी सुभाष शुक्ला ने बताया कि राज्य सरकार और नारायणा अस्पताल के संयुक्त प्रयास से दिल की बीमारियों से जूझ रहे बच्चों के लिए विशेष कैंप आयोजित किया गया। इसमें उन्हीं बच्चों के परिजनों को बुलाया गया था, जिनका ऑपरेशन हो चुका है या प्रस्तावित है। बड़ी संख्या में लोग बच्चों को लेकर जांच के लिए पहुंचे, जिनमें 25–30 नए मामलों में दिल में छेद की पुष्टि हुई। उन्होंने कहा कि चिन्हित बच्चों का इलाज आरबीएसके के माध्यम से कराया जा रहा है और जरूरत पड़ने पर कुछ बच्चों को ऑपरेशन के लिए मुंबई भेजने की तैयारी है। पिछले चार वर्षों में 240 से अधिक बच्चों का सफल ऑपरेशन कराया जा चुका है, जिनमें कई की हालत बेहद गंभीर थी, लेकिन अब सभी स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। चार साल में 242 बच्चों का हुआ ऑपरेशन बीते चार सालों में सिर्फ जबलपुर से आरबीएसके योजना के तहत 242 बच्चों का निशुल्क इलाज शासन की और से हुआ है। सभी बच्चें पूरी तरह से स्वास्थ्य है।

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *