Heart Health: दिल में शॉर्ट सर्किट? कहीं आपकी धड़कन भी तो नहीं दे रही इस गंभीर बीमारी का संकेत!

Heart Health: दिल में शॉर्ट सर्किट? कहीं आपकी धड़कन भी तो नहीं दे रही इस गंभीर बीमारी का संकेत!

Heart Health: क्या आपकी चलते-चलते ही दिल की धड़कन बढ़ जाती है? तो जायज सी बात है कि आप भी इसको सामान्य ही मानते होंगे और इसको नजरअंदाज कर देते होंगे। लेकिन अगर आपकी धड़कन 150 से 170 बीपीएम (BPM) तक बढ़ जाती है, तो यह सुप्रावेंट्रिकुलर टैचीकार्डिया (SVT) का संकेत हो सकता है। यह समस्या हमारे हार्ट के ऊपरी कक्षों में गति में बदलाव या सरल भाषा में कहें तो यह शॉर्ट सर्किट के कारण होती है। आइए जानते हैं कि सुप्रावेंट्रिकुलर टैचीकार्डिया (SVT) क्या होता है? यह क्यों होता है? इसके लक्षण और बचाव क्या होते हैं?

क्या होती है सुप्रावेंट्रिकुलर टैचीकार्डिया ?(SVT Heart Condition)

यह हमारे हार्ट से जुड़ी एक स्थिति है जिसमें हमारे दिल की धड़कन एकदम से ऐसे बढ़ जाती है जैसे स्विच ऑन करते ही पंखे की गति। अक्सर व्यायाम या दौड़ के दौरान हमारी धड़कन धीरे-धीरे बढ़ती है, लेकिन दिल के ऊपरी कक्षों में इलेक्ट्रोनिक बदलाव के कारण यह समस्या उत्पन्न होती है।

सुप्रावेंट्रिकुलर टैचीकार्डिया के लक्षण क्या होते हैं?(SVT Heart Condition Symptoms)

  • 150-170 प्रति मिनट धड़कन का बढ़ जाना
  • चक्कर आना
  • हाथ-पैर फूलना
  • सांस लेने में तकलीफ होना
  • सीने में तेज दर्द होना
  • मरीज का बेहोश हो जाना

सुप्रावेंट्रिकुलर टैचीकार्डिया (SVT) के कारण क्या होते हैं?(SVT Heart Condition Cause)

  • हार्ट का इलेक्ट्रिकल शॉर्ट सर्किट
  • ज्यादा कैफीन का सेवन
  • पानी की मात्रा कम होना
  • नींद की कमी होना
  • बहुत ज्यादा तनाव लेना
  • शराब और धूम्रपान का सेवन

सुप्रावेंट्रिकुलर टैचीकार्डिया (SVT) से बचने के उपाय क्या होते हैं?(SVT Heart Condition Prevention)

  • अचानक ऐसा हो तो तुरंत एक जगह स्थिर हो जाएं
  • गहरी सांस लें और चेहरे पर पानी छिड़कें
  • वर्कआउट से तुरंत पहले कैफीन का सेवन न करें
  • व्यायाम के दौरान शरीर में पानी की कमी न होने दें

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से न आजमाएं, बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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