Heart Disease: अब सिर्फ स्किन स्कैन से पता चलेगा कब आने वाला है हार्ट अटैक! वैज्ञानिकों ने तैयार किया जादुई स्कैनर

Heart Disease: अब सिर्फ स्किन स्कैन से पता चलेगा कब आने वाला है हार्ट अटैक! वैज्ञानिकों ने तैयार किया जादुई स्कैनर

Heart Disease: जर्मनी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी नई तकनीक विकसित की है, जो बिना किसी सुई या दर्द के सिर्फ त्वचा को स्कैन करके दिल की बीमारी के शुरुआती खतरे पहचान सकती है। इस तकनीक का नाम है फास्ट-RSOM स्किन स्कैन। आसान शब्दों में कहें तो यह स्कैन त्वचा के नीचे मौजूद बेहद बारीक रक्त नलिकाओं (blood vessels) की हालत को बहुत साफ तरीके से दिखा देता है, जो अब तक संभव नहीं था।

अब तक डॉक्टर दिल की बीमारी का खतरा ज्यादातर ब्लड टेस्ट, बीपी, कोलेस्ट्रॉल या मरीज की लाइफस्टाइल देखकर आंकते थे। लेकिन इन तरीकों से बीमारी तब पकड़ में आती है, जब शरीर के अंदर काफी नुकसान हो चुका होता है। फास्ट-RSOM इस कमी को पूरा करता है, क्योंकि यह उन बदलावों को पकड़ लेता है जो बीमारी के बहुत शुरुआती दौर में ही शुरू हो जाते हैं।

त्वचा के नीचे छुपे संकेत

यह नई तकनीक त्वचा के जरिए सबसे छोटी रक्त नलिकाओं की 3D तस्वीरें लेती है। इससे यह देखा जा सकता है कि ये नलिकाएं कितनी सही तरीके से फैल और सिकुड़ रही हैं। इस क्षमता में कमी को माइक्रोवैस्कुलर एंडोथीलियल डिसफंक्शन (MiVED) कहा जाता है। यही समस्या आगे चलकर दिल की गंभीर बीमारियों की वजह बन सकती है। खास बात यह है कि अब तक इंसानों में इन बदलावों को सीधे और बिना ऑपरेशन देख पाना लगभग नामुमकिन था। फास्ट-RSOM पहली बार डॉक्टरों को यह सुविधा देता है कि वे बिल्कुल शुरुआती स्तर पर ही खतरे को पहचान सकें।

दिल की सेहत पर सीधी नजर

हेल्महोल्ट्ज एसोसिएशन ऑफ जर्मन रिसर्च सेंटर्स की टीम के मुताबिक, यह तकनीक डॉक्टरों को समय रहते इलाज शुरू करने में मदद कर सकती है। इससे मरीज के लिए पर्सनलाइज्ड इलाज तय करना आसान होगा और लंबे समय तक दिल की सेहत बेहतर रखी जा सकेगी। हेल्महोल्ट्ज म्यूनिख के शोधकर्ता डॉ. हेलॉन्ग हे के अनुसार, फास्ट-RSOM की मदद से हम पहली बार इंसानों में सबसे छोटी रक्त नलिकाओं के स्तर पर एंडोथीलियल समस्या को बिना किसी सर्जरी देख पा रहे हैं।

लाइफस्टाइल से जुड़ा खतरा भी पकड़ेगा

यह स्कैन खास तौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है, जो स्मोकिंग करते हैं, हाई ब्लड प्रेशर से जूझ रहे हैं या मोटापे का शिकार हैं। आम तौर पर इन कारणों से दिल की बीमारी का खतरा बढ़ता है, लेकिन फास्ट-RSOM सीधे यह दिखाता है कि इन आदतों ने रक्त नलिकाओं को कितना नुकसान पहुंचाया है।

कैसे काम करता है फास्ट-RSOM?

RSOM यानी Raster Scan Optoacoustic Mesoscopy एक ऐसी तकनीक है, जिसमें हल्की रोशनी के पल्स त्वचा पर डाले जाते हैं। इससे अल्ट्रासाउंड सिग्नल बनते हैं और त्वचा के नीचे की बेहद साफ 3D तस्वीरें मिलती हैं। यह पूरी प्रक्रिया सुरक्षित और दर्द रहित होती है। कुल मिलाकर, फास्ट-RSOM भविष्य में दिल की बीमारी की पहचान और रोकथाम का तरीका बदल सकता है। समय रहते खतरे को पकड़कर लोग बड़ी बीमारियों से बच सकते हैं और अपनी सेहत पर बेहतर नियंत्रण पा सकते हैं।

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