पवन सिंह-ज्योति सिंह तलाक मामले में आज सुनवाई:कोर्ट सुलह का दे सकता आखिरी मौका, पिछली तारीख में सुनवाई टल गई थी

पवन सिंह-ज्योति सिंह तलाक मामले में आज सुनवाई:कोर्ट सुलह का दे सकता आखिरी मौका, पिछली तारीख में सुनवाई टल गई थी

भोजपुरी स्टार पवन सिंह और उनकी पत्नी ज्योति सिंह के तलाक से जुड़ा मामला कोर्ट में चल रहा है। आरा सिविल कोर्ट के कुटुंब न्यायालय में बुधवार को दोनों फिर से आमने-सामने होंगे। कोर्ट की ओर से रिश्ते को आखिरी मौका दिया जाएगा, ताकि दोनों आपसी सहमति से अपने विवाद को सुलझा सकें। इससे पहले एक महीने पहले सुनवाई होनी थी, पर पवन सिंह और ज्योति सिंह कोर्ट नहीं पहुंचे थे। फैमिली कोर्ट के जज भी नहीं आएं थें। 10 करोड़ रुपए और मकान देने को कहा था ज्योति सिंह के वकील विष्णुधर पांडेय ने कहा कि अगर ज्योति सिंह के साथ पवन सिंह नहीं रहना चाहते हैं तो 10 करोड़ रुपए और एक मकान देने के साथ मामला चलने तक उन्हें खर्च दें। 11 फरवरी ज्योति सिंह साड़ी में कोर्ट पहुंची थीं। मांग में सिंदूर भी था। उस दिन पवन सिंह बीमारी का हवाला देकर कोर्ट नहीं पहुंचे थे। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अस्पताल के बेड से उनकी पेशी हुई थी। ज्योति सिंह ने जज से कहा था, मुझे सिर्फ तारीख मिलती है वकील विष्णुधर पांडेय के मुताबिक, ज्योति सिंह ने जज के सामने कोर्ट में कहा था कि मुझे हर सुनवाई पर सिर्फ अगली तारीख मिलती है। एक महिला होकर मैं हर तारीख पर खुद कोर्ट में उपस्थित होती हूं, लेकिन मेरे पति न तो कोई ठोस फैसला कर पा रहे हैं और न ही समय पर कोर्ट पहुंच रहे हैं। विक्रमगंज कोर्ट में सुनवाई का समय तय था, इसके बावजूद पवन सिंह वहां नहीं पहुंचे। अगर वे चाहते तो आ सकते थे, लेकिन मेरी खामोशी और दर्द को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। यह कहते हुए ज्योति फूट-फूट कर रो पड़ीं। ज्योति ने जज से कहा था, ‘7 साल के वैवाहिक जीवन में मुझे सिर्फ मानसिक पीड़ा और अनिश्चितता मिली है। न पति का साथ मिला, न सहारा और न ही कानूनी रूप से मिलने वाला कोई अधिकार। मैं हर बार सुलह और किसी ठोस फैसले की उम्मीद लेकर कोर्ट आती हूं, लेकिन बदले में सिर्फ इंतजार ही मिलता है।” वकील के मुताबिक, ज्योति सिंह ने अंत में हाथ जोड़कर सिर्फ एक ही मांग रखी- “माय लॉर्ड, मुझे बस इंसाफ चाहिए।’ भोजपुरी स्टार पवन सिंह और उनकी पत्नी ज्योति सिंह के तलाक से जुड़ा मामला कोर्ट में चल रहा है। आरा सिविल कोर्ट के कुटुंब न्यायालय में बुधवार को दोनों फिर से आमने-सामने होंगे। कोर्ट की ओर से रिश्ते को आखिरी मौका दिया जाएगा, ताकि दोनों आपसी सहमति से अपने विवाद को सुलझा सकें। इससे पहले एक महीने पहले सुनवाई होनी थी, पर पवन सिंह और ज्योति सिंह कोर्ट नहीं पहुंचे थे। फैमिली कोर्ट के जज भी नहीं आएं थें। 10 करोड़ रुपए और मकान देने को कहा था ज्योति सिंह के वकील विष्णुधर पांडेय ने कहा कि अगर ज्योति सिंह के साथ पवन सिंह नहीं रहना चाहते हैं तो 10 करोड़ रुपए और एक मकान देने के साथ मामला चलने तक उन्हें खर्च दें। 11 फरवरी ज्योति सिंह साड़ी में कोर्ट पहुंची थीं। मांग में सिंदूर भी था। उस दिन पवन सिंह बीमारी का हवाला देकर कोर्ट नहीं पहुंचे थे। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अस्पताल के बेड से उनकी पेशी हुई थी। ज्योति सिंह ने जज से कहा था, मुझे सिर्फ तारीख मिलती है वकील विष्णुधर पांडेय के मुताबिक, ज्योति सिंह ने जज के सामने कोर्ट में कहा था कि मुझे हर सुनवाई पर सिर्फ अगली तारीख मिलती है। एक महिला होकर मैं हर तारीख पर खुद कोर्ट में उपस्थित होती हूं, लेकिन मेरे पति न तो कोई ठोस फैसला कर पा रहे हैं और न ही समय पर कोर्ट पहुंच रहे हैं। विक्रमगंज कोर्ट में सुनवाई का समय तय था, इसके बावजूद पवन सिंह वहां नहीं पहुंचे। अगर वे चाहते तो आ सकते थे, लेकिन मेरी खामोशी और दर्द को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। यह कहते हुए ज्योति फूट-फूट कर रो पड़ीं। ज्योति ने जज से कहा था, ‘7 साल के वैवाहिक जीवन में मुझे सिर्फ मानसिक पीड़ा और अनिश्चितता मिली है। न पति का साथ मिला, न सहारा और न ही कानूनी रूप से मिलने वाला कोई अधिकार। मैं हर बार सुलह और किसी ठोस फैसले की उम्मीद लेकर कोर्ट आती हूं, लेकिन बदले में सिर्फ इंतजार ही मिलता है।” वकील के मुताबिक, ज्योति सिंह ने अंत में हाथ जोड़कर सिर्फ एक ही मांग रखी- “माय लॉर्ड, मुझे बस इंसाफ चाहिए।’  

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