बंटवारे से नाखुश था, गला दबाकर पिता को मार डाला:छिंदवाड़ा में बड़ा बेटा गिरफ्तार; कहासुनी के बाद मारपीट भी की थी

बंटवारे से नाखुश था, गला दबाकर पिता को मार डाला:छिंदवाड़ा में बड़ा बेटा गिरफ्तार; कहासुनी के बाद मारपीट भी की थी

छिंदवाड़ा जिले के बिछुआ थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम गोनावाड़ी में 58 वर्षीय पतिराम परतेती की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस ने मंगलवार को खुलासा कर दिया। यह अंधा हत्याकांड किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि पतिराम के बड़े बेटे ने ही जमीन बंटवारे के विवाद में अंजाम दिया था। पुलिस ने आरोपी बेटे को गिरफ्तार कर लिया है। दरअसल, 1 फरवरी 2026 को पतिराम परतेती की अज्ञात परिस्थितियों में मौत की सूचना छोटे बेटे जितेंद्र परतेती ने पुलिस को दी थी। सूचना पर बिछुआ पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में परिस्थितियां संदिग्ध पाई गईं, जिसके बाद पुलिस ने हत्या की आशंका के आधार पर अज्ञात आरोपी के खिलाफ धारा 103(1) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की। बंटवारे को लेकर चल रहा था विवाद
पुलिस जांच में सामने आया कि पतिराम परतेती के दो बेटे हैं। पिता ने दोनों के बीच जमीन का बंटवारा कर दिया था। बड़ा बेटा बबलू परतेती (36) खेत वाले मकान में रहता था, जबकि छोटा बेटा गांव वाले मकान में पिता के साथ निवास करता था। बड़ा बेटा जमीन बंटवारे से संतुष्ट नहीं था और इस संबंध में मामला तहसील न्यायालय बिछुआ में विचाराधीन था। इसी विवाद को लेकर 28 जनवरी को पेशी भी हुई थी। सुबह हुआ विवाद, गला दबाकर की हत्या
1 फरवरी की सुबह करीब 7 बजे पतिराम परतेती खेत वाले कोठे पर मौजूद थे। इसी दौरान बड़े बेटे बबलू परतेती से जमीन को लेकर विवाद हो गया। कहासुनी बढ़ते-बढ़ते मारपीट में बदल गई। गुस्से में आकर बबलू ने पहले हाथ-पैर से पिता के साथ मारपीट की और फिर गला दबाकर उनकी हत्या कर दी। घटना की जानकारी मिलते ही थाना प्रभारी निरीक्षक सतीश उइके पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। शव का पंचनामा तैयार कर पोस्टमार्टम कराया गया। जांच के दौरान मिले साक्ष्यों और परिस्थितिजन्य तथ्यों के आधार पर आरोपी बबलू परतेती को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ में उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। इस हत्याकांड के खुलासे में निरीक्षक सतीश उइके, सहायक उप निरीक्षक शिवशंकर सिंह, अजय सिंह बघेल, प्रमोद कुमार धुर्वे, यशवंत मर्सकोले, राकेश उइके, राकेश सेवटकर, फूलभानशाह परते, लोकेश पटले और पप्पी बरखाने की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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