मंत्रालय, सरकारी विभागों और कंपनियों में लग्जरी वाहन किराए पर लगाने का झांसा देकर कारें हड़पने वाले मास्टरमाइंड हिमाचल शर्मा को पुलिस ने आखिरकार जयपुर से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी बेहद शातिर है। वह वाहन मालिकों से बड़े सरकारी विभागों में गाड़ी अटैच कराने के नाम पर अनुबंध करता था। शुरुआत में एक-दो महीने किराया देता था, इसके बाद वाहन गायब कर देता था। न तो वाहन मालिक को किराया मिलता था और न ही वाहन वापस मिलते थे। जिस कंपनी या विभाग का अनुबंध बताया जाता था, वहां पूछताछ करने पर सामने आता था कि ऐसे किसी वाहन को अटैच ही नहीं किया गया है। आरोपी अब तक 30 से अधिक लोगों की गाड़ियां हड़प चुका है, जिनकी अनुमानित कीमत करीब चार करोड़ रुपये है। वह पुलिस अधिकारी की वर्दी पहनकर भी ठगी करता था और पहले थानेदार (सब-इंस्पेक्टर) की वर्दी में भी पकड़ा जा चुका है। डीएसपी क्राइम ब्रांच नागेंद्र सिंह सिकरवार ने बताया कि श्योपुर निवासी संजय धाकड़ पुत्र पूरन धाकड़ ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि उसकी मुलाकात सिटी सेंटर स्थित पटेल नगर निवासी हिमाचल शर्मा पुत्र राकेश शर्मा से हुई थी। हिमाचल ने खुद को सरकारी विभागों और कंपनियों में पहचान वाला बताते हुए वाहनों को किराए पर लगवाने का दावा किया था। इसी भरोसे पर संजय धाकड़ ने अपना ट्रैक्टर 25 हजार रुपये प्रतिमाह पर दे दिया। इसके बाद उसके कुछ अन्य परिजनों ने भी अपने वाहन किराए पर लगा दिए। वाहन लेने के बाद आरोपी फरार हो गया। जब काफी समय तक किराया नहीं मिला और संपर्क भी नहीं हो पाया तो वाहन मालिक संबंधित विभागों में पहुंचे। वहां पता चला कि वाहन अनुबंध पूरी तरह फर्जी थे। इसके बाद क्राइम ब्रांच में शिकायत की गई। इन लोगों के वाहन हड़पे गए हिमाचल शर्मा ने संजय धाकड़, रविंद्र धाकड़, विशाल धाकड़, बलवीर धाकड़, अंकित धाकड़, सुकेर धाकड़, दीपू धाकड़, नरेंद्र धाकड़, दीपक धाकड़, सुनील गुर्जर, धर्मेंद्र जिवरिया, शुभम पाल सिंह जादौन, ऊषा देवी परमार, हेमंत शर्मा, शिवा यादव, विवेक त्रिपाठी, चंचल श्रीवास्तव, शशांक जैन, रेनू तोमर, विनोद धाकड़, कल्याण यादव, संजय शर्मा, प्रदीप बघेल, योगेंद्र गुर्जर, संतोष धाकड़, शुभम त्रिपाठी, राकेश भटेले, रणवीर सिंह सेंगर, सतेंद्र त्रिपाठी और मुकेश परिहार से वाहन अनुबंध के नाम पर ठगी की। 9 साल पहले खाकी वर्दी में पकड़ाया था हिमाचल शर्मा लंबे समय से अपराध कर रहा है। करीब 9 साल पहले, वर्ष 2016 में, वह एसआई की वर्दी पहने एक जीप में पकड़ा गया था, जिस पर मध्यप्रदेश नगर सेना का मोनो लगा था। उसके पास पिस्टल भी थी और बोलेरो गाड़ी में नीली बत्ती रखी हुई थी। पूछताछ में उसने खुद को होमगार्ड का प्लाटून कमांडर बताया, लेकिन परिचय पत्र जांच में फर्जी निकला। इसके बाद उस पर एफआईआर दर्ज की गई थी। लगातार बदल रहा था ठिकाना मामला दर्ज होने के बाद से ही क्राइम ब्रांच की टीम उसकी तलाश में लगी थी। आरोपी लगातार ठिकाने बदल रहा था। रविवार को टीम ने उसे जयपुर में घेराबंदी कर गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद क्राइम ब्रांच की टीम उसे लेकर ग्वालियर रवाना हो गई है।


