जयमंगलागढ़ महादलित बस्ती के पक्ष में HC का निर्देश:अगली सुनवाई तक बेदखल नहीं किया जाएगा, 350 परिवार में खुशी का माहौल

जयमंगलागढ़ महादलित बस्ती के पक्ष में HC का निर्देश:अगली सुनवाई तक बेदखल नहीं किया जाएगा, 350 परिवार में खुशी का माहौल

पटना हाईकोर्ट ने जयमंगला गढ़ स्थित महादलित (मुसहर समाज) की बस्ती को हटाने के संबंध में आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने जयमंगला गढ़ मुसहर बस्ती को अतिक्रमण मानने से इनकार करते हुए पुनर्वास के बिना विस्थापन पर रोक लगा दिया है। हाईकोर्ट के इस आदेश से वहां रह रहे करीब 350 महादलित परिवार में खुशी का माहौल है। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू और जस्टिस नानी ताग्या की खंडपीठ ने CWJC-19823/2024 की सुनवाई के दौरान जयमंगला गढ़ के मुसहर बस्ती की ओर से अधिवक्ता आकांक्षा मालवीय और सरकार की ओर से महाधिवक्ता पीके शाही ने बहस की। महाधिवक्ता ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि जयमंगला गढ़ में रह रहे पर्चाधारी अतिक्रमणकारी नहीं हैं। अगर उन्हें विस्थापित करना होगा तो पहले पुनर्वासित किया जाएगा। हाईकोर्ट में एक इंटरवेनर पेटीशन दाखिल किया था प्रशासन की ओर से वहां रह रहे लोगों के घर हटाने के निर्देश के खिलाफ जयमंगला गढ़ के रहने वाले सरोज देवी, कला देवी और धनिक सदा ने हाईकोर्ट में एक इंटरवेनर पेटीशन दाखिल किया था। जिसे बहस के दौरान अदालत ने स्वीकार किया और सरकार-इंटरवेनर दोनों को प्रति शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। अगली सुनवाई तक सरकार की ओर से मुसहर बस्ती को बेदखल नहीं किया जाएगा। जयमंगला गढ़ के मुसहर बस्ती की ओर से अधिवक्ता आकांक्षा मालवीय और सरकार की ओर से महाधिवक्ता पीके शाही ने बहस की। सुनवाई के दौरान जयमंगला गढ़ के पीड़ितों की ओर से पटना हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेंद्र कुमार सिंह, नैना, बेगूसराय के वरिष्ठ अधिवक्ता वशिष्ठ कुमार अंबष्ट तथा शोधार्थी-लेखक पुष्पराज उपस्थित थे।
निर्णय को महादलितों के पक्ष में मानवतावादी न्याय कहा महादलित मुसहरों की विधिक सहायता के लिए जयमंगला गढ़ मुसहर बस्ती बचाओ संघर्ष समिति की ओर से पूर्व पंचायत समिति रामनरेश सदा ने पीयूसीएल के प्रति आभार प्रकट किया है। पीयूसीएल के प्रदेश महासचिव सरफराज ने जयमंगला गढ़ के मुसहर समाज को विस्थापन से बचाने के संघर्ष को मानवाधिकार और मानवता के हित का संघर्ष बताया है। प्रसिद्ध समाजसेवी और नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर ने भी जयमंगला गढ़ मुसहर बस्ती बचाओ संघर्ष को अपना समर्थन देते हुए उन्हें उजाड़ने के खिलाफ पटना हाईकोर्ट के निर्णय को महादलितों के पक्ष में मानवतावादी न्याय कहा है। वहीं, पद्मश्री सुधा वर्गीस ने भी जयमंगला गढ़ मुसहर बस्ती के संघर्ष को अपना समर्थन दिया है। क्या मामला है महादलित बस्ती को अतिक्रमण बताने का 2 जनवरी 2026 को मंझौल के एसडीओ ने जयमंगला गढ़ में दशकों से रह रहे महादलित समाज के लोगों को बताया था कि उनकी बस्ती को हटाकर ईको पार्क बनाया जाएगा। 10 जनवरी 2026 को चेरिया बरियारपुर के सीओ के हवाले से खबर छपी कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर से प्रस्तावित ईको पार्क के निर्माण के लिए जयमंगला गढ़ की इस बस्ती को हटाया जाएगा। इन लोगों को हटाने के बाद जिस जमीन पर बसाने का जिक्र किया गया था। उस जमीन के भूस्वामी रामाशीष प्रसाद सिंह ने CWJC 949/2026 के माध्यम से अपनी जमीन की रक्षा के लिए 16 जनवरी 2026 को पटना हाईकोर्ट में रिट दायर किया था। 22 जनवरी को रामाशीष सिंह की जमीन पर गेहूं की फसल को रौंदकर सीओ, बीडीओ, एसडीओ एवं एडीएम ने कब्जे में ले लिया। 27 जनवरी को हाईकोर्ट में चेरिया बरियारपुर के सीओ नंदन कुमार ने किसान की जमीन कब्जा नहीं करने का शपथ पत्र दायर किया। इससे पहले 15 जनवरी 2026 को चेरिया बरियारपुर के सीओ नंदन कुमार ने 335 परिवारों को 5 जनवरी 2026 की तारीख में नोटिस जारी किया था। जिसमें पूरी बस्ती को अतिक्रमणकारी बताया गया। 20 जनवरी को सीओ ने अपने कार्यालय में नोटिस का जवाब देने का समय तय किया था। इसके बाद यहां रहने वाले लोगों ने बेगूसराय के वरिष्ठ अधिवक्ता वशिष्ठ कुमार अंबष्ट को अपना अधिवक्ता बनाकर बासगीत पर्चा, इंदिरा आवास, प्रधानमंत्री आवास, 10+2 तक की पढ़ाई करने के लिए सरकारी स्कूल, स्वास्थ्य उपकेंद्र, 2 आंगनबाड़ी केंद्र की मौजूदगी के साक्ष्य के साथ अतिक्रमण के आरोप को खारिज किया। लेखक ने हस्तक्षेप किया मामले को देखते हुए मंझौल के रहने वाले और चर्चित पुस्तक नंदीग्राम डायरी के लेखक पुष्पराज ने इसे गंभीरता से लिया। देश भर में विस्थापन विरोधी पत्रकारिता के लिए पुष्पराज ने अलग-अलग राज्यों में लेखन किया है। पुष्पराज ने मानवाधिकार संगठन पीयूसीएल की मदद से पटना में अधिवक्ता आकांक्षा मालवीय की सहायता ली और प्रथम चरण में शासन द्वारा अतिक्रमणकारी घोषित मुसहर बस्ती को उजड़ने से तत्काल बचा लिया गया। मुसहर समाज पर दमन की कोशिश- पुष्पराज पुष्पराज बताते हैं कि बीडीओ, सीओ, एसडीओ एवं एडीएम ने शासन की ताकत से मुसहर समाज को अपनी बस्ती छोड़कर अन्यत्र जाने के लिए बहुत अधिक दवाब बनाया। 15 जनवरी को बेगूसराय के डीएम ने जयमंगला गढ़ मुसहर बस्ती बचाओ संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल से स्पष्ट कहा था कि हम पुनर्वास के बिना मुसहर बस्ती को उजाड़ने के लिए संकल्पित हैं। जबकि पटना हाईकोर्ट ने मुसहर बस्ती को उजाड़ने का आदेश नहीं दिया था। बिहार के वेटलैंड और रामसर साइट के संवर्धन के संबंध में दायर याचिका CWJC- 19823/2024 के निर्देश में माननीय हाईकोर्ट ने 18 दिसंबर 2025 को अपने आदेश के 5 वें पैरा की पहली पंक्ति में स्पष्ट लिखा था कि अगर अतिक्रमण है तो उसे वैधानिक तरीके से हटाया जाएगा। पटना हाईकोर्ट ने जयमंगला गढ़ स्थित महादलित (मुसहर समाज) की बस्ती को हटाने के संबंध में आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने जयमंगला गढ़ मुसहर बस्ती को अतिक्रमण मानने से इनकार करते हुए पुनर्वास के बिना विस्थापन पर रोक लगा दिया है। हाईकोर्ट के इस आदेश से वहां रह रहे करीब 350 महादलित परिवार में खुशी का माहौल है। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू और जस्टिस नानी ताग्या की खंडपीठ ने CWJC-19823/2024 की सुनवाई के दौरान जयमंगला गढ़ के मुसहर बस्ती की ओर से अधिवक्ता आकांक्षा मालवीय और सरकार की ओर से महाधिवक्ता पीके शाही ने बहस की। महाधिवक्ता ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि जयमंगला गढ़ में रह रहे पर्चाधारी अतिक्रमणकारी नहीं हैं। अगर उन्हें विस्थापित करना होगा तो पहले पुनर्वासित किया जाएगा। हाईकोर्ट में एक इंटरवेनर पेटीशन दाखिल किया था प्रशासन की ओर से वहां रह रहे लोगों के घर हटाने के निर्देश के खिलाफ जयमंगला गढ़ के रहने वाले सरोज देवी, कला देवी और धनिक सदा ने हाईकोर्ट में एक इंटरवेनर पेटीशन दाखिल किया था। जिसे बहस के दौरान अदालत ने स्वीकार किया और सरकार-इंटरवेनर दोनों को प्रति शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। अगली सुनवाई तक सरकार की ओर से मुसहर बस्ती को बेदखल नहीं किया जाएगा। जयमंगला गढ़ के मुसहर बस्ती की ओर से अधिवक्ता आकांक्षा मालवीय और सरकार की ओर से महाधिवक्ता पीके शाही ने बहस की। सुनवाई के दौरान जयमंगला गढ़ के पीड़ितों की ओर से पटना हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेंद्र कुमार सिंह, नैना, बेगूसराय के वरिष्ठ अधिवक्ता वशिष्ठ कुमार अंबष्ट तथा शोधार्थी-लेखक पुष्पराज उपस्थित थे।
निर्णय को महादलितों के पक्ष में मानवतावादी न्याय कहा महादलित मुसहरों की विधिक सहायता के लिए जयमंगला गढ़ मुसहर बस्ती बचाओ संघर्ष समिति की ओर से पूर्व पंचायत समिति रामनरेश सदा ने पीयूसीएल के प्रति आभार प्रकट किया है। पीयूसीएल के प्रदेश महासचिव सरफराज ने जयमंगला गढ़ के मुसहर समाज को विस्थापन से बचाने के संघर्ष को मानवाधिकार और मानवता के हित का संघर्ष बताया है। प्रसिद्ध समाजसेवी और नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर ने भी जयमंगला गढ़ मुसहर बस्ती बचाओ संघर्ष को अपना समर्थन देते हुए उन्हें उजाड़ने के खिलाफ पटना हाईकोर्ट के निर्णय को महादलितों के पक्ष में मानवतावादी न्याय कहा है। वहीं, पद्मश्री सुधा वर्गीस ने भी जयमंगला गढ़ मुसहर बस्ती के संघर्ष को अपना समर्थन दिया है। क्या मामला है महादलित बस्ती को अतिक्रमण बताने का 2 जनवरी 2026 को मंझौल के एसडीओ ने जयमंगला गढ़ में दशकों से रह रहे महादलित समाज के लोगों को बताया था कि उनकी बस्ती को हटाकर ईको पार्क बनाया जाएगा। 10 जनवरी 2026 को चेरिया बरियारपुर के सीओ के हवाले से खबर छपी कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर से प्रस्तावित ईको पार्क के निर्माण के लिए जयमंगला गढ़ की इस बस्ती को हटाया जाएगा। इन लोगों को हटाने के बाद जिस जमीन पर बसाने का जिक्र किया गया था। उस जमीन के भूस्वामी रामाशीष प्रसाद सिंह ने CWJC 949/2026 के माध्यम से अपनी जमीन की रक्षा के लिए 16 जनवरी 2026 को पटना हाईकोर्ट में रिट दायर किया था। 22 जनवरी को रामाशीष सिंह की जमीन पर गेहूं की फसल को रौंदकर सीओ, बीडीओ, एसडीओ एवं एडीएम ने कब्जे में ले लिया। 27 जनवरी को हाईकोर्ट में चेरिया बरियारपुर के सीओ नंदन कुमार ने किसान की जमीन कब्जा नहीं करने का शपथ पत्र दायर किया। इससे पहले 15 जनवरी 2026 को चेरिया बरियारपुर के सीओ नंदन कुमार ने 335 परिवारों को 5 जनवरी 2026 की तारीख में नोटिस जारी किया था। जिसमें पूरी बस्ती को अतिक्रमणकारी बताया गया। 20 जनवरी को सीओ ने अपने कार्यालय में नोटिस का जवाब देने का समय तय किया था। इसके बाद यहां रहने वाले लोगों ने बेगूसराय के वरिष्ठ अधिवक्ता वशिष्ठ कुमार अंबष्ट को अपना अधिवक्ता बनाकर बासगीत पर्चा, इंदिरा आवास, प्रधानमंत्री आवास, 10+2 तक की पढ़ाई करने के लिए सरकारी स्कूल, स्वास्थ्य उपकेंद्र, 2 आंगनबाड़ी केंद्र की मौजूदगी के साक्ष्य के साथ अतिक्रमण के आरोप को खारिज किया। लेखक ने हस्तक्षेप किया मामले को देखते हुए मंझौल के रहने वाले और चर्चित पुस्तक नंदीग्राम डायरी के लेखक पुष्पराज ने इसे गंभीरता से लिया। देश भर में विस्थापन विरोधी पत्रकारिता के लिए पुष्पराज ने अलग-अलग राज्यों में लेखन किया है। पुष्पराज ने मानवाधिकार संगठन पीयूसीएल की मदद से पटना में अधिवक्ता आकांक्षा मालवीय की सहायता ली और प्रथम चरण में शासन द्वारा अतिक्रमणकारी घोषित मुसहर बस्ती को उजड़ने से तत्काल बचा लिया गया। मुसहर समाज पर दमन की कोशिश- पुष्पराज पुष्पराज बताते हैं कि बीडीओ, सीओ, एसडीओ एवं एडीएम ने शासन की ताकत से मुसहर समाज को अपनी बस्ती छोड़कर अन्यत्र जाने के लिए बहुत अधिक दवाब बनाया। 15 जनवरी को बेगूसराय के डीएम ने जयमंगला गढ़ मुसहर बस्ती बचाओ संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल से स्पष्ट कहा था कि हम पुनर्वास के बिना मुसहर बस्ती को उजाड़ने के लिए संकल्पित हैं। जबकि पटना हाईकोर्ट ने मुसहर बस्ती को उजाड़ने का आदेश नहीं दिया था। बिहार के वेटलैंड और रामसर साइट के संवर्धन के संबंध में दायर याचिका CWJC- 19823/2024 के निर्देश में माननीय हाईकोर्ट ने 18 दिसंबर 2025 को अपने आदेश के 5 वें पैरा की पहली पंक्ति में स्पष्ट लिखा था कि अगर अतिक्रमण है तो उसे वैधानिक तरीके से हटाया जाएगा।  

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